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धर्मजागृति, हिंदू-संगठन एवं राष्ट्ररक्षा हेतु साधकोंद्वारा साधनास्वरूप आर्थिक हानि सहते हुए भी चलाया जानेवाला एकमात्र मासिक !
मार्च २०१५

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है हिन्दुुओें का नववर्षारंभ । इसी विचार से करेंगे धर्मजागृति का शुभारंभ ॥

परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का चैत्र शुक्ल प्रतिपदा निमित्त संदेश 
प्रत्येक हिन्दू के घर पर हिन्दू धर्म की पताका फहराने का संकल्प करें !
(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले
धर्मशिक्षा का अभाव, राज्यकर्ताआें की खोखली सर्वधर्मसमभाव की शिक्षा और पाश्‍चात्य संस्कृति के आक्रमणों के कारण आज अधिकांश घरों में हिन्दू संस्कृति और हिन्दू धर्म लुप्त हो गया है । इससे हिन्दुआें के आचार-विचार, आहार-विहार, वेशभूषा-केशरचना आदि में परिवर्तन आया है । संपूर्ण विश्‍व में श्रेष्ठ संस्कृति की पताका फहरानेवाले हिन्दू धर्म की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है । कृण्वन्तो विश्‍वमार्यम् ।, अर्थात पूरे विश्‍व को श्रेष्ठ बनाएंगे, यह हमारे पूर्वजों ने उद्घोषित किया था ।

गोवा के सनातन आश्रम को गीता आश्रम की गुरुमां गीतेश्‍वरीजी का पावन चरणस्पर्श !

सनातन का आश्रम पृथ्वी पर स्थित परमधाम है ! - गुरु मां गीतेश्‍वरीजी 
गुरु मां गीतेश्‍वरीजी का परिचय
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी से वार्तालाप करती हुईं गुरु मां गीतेश्‍वरीजी
    ईश्‍वर की इच्छानुसार वर्ष १९७५ में गुरु मां की भेंट प.पू. १००८ स्वामी हरिहरजी महाराज से हुई । उन्होंने वर्ष १९७७ में प.पू. १००८ स्वामी हरिहरजी महाराज से दीक्षा ली थी । मोन्रोविया में उन्होंने मोन्रोविया गीता आश्रम के महासचिव के पद पर १० वर्ष सेवा की । वर्तमान में वे देहली में निवासरत हैं तथा उनके गुरु प.पू. श्री १००८ स्वामी हरिहरजी महाराज की इच्छानुसार गीता की सीख विश्‍व के लोगों तक पहुंचाने की सेवा कर रही हैं । 

देहली में विश्‍व पुस्तक मेला २०१५

सनातन संस्था द्वारा किया जा रहा हिन्दू धर्म का कार्य प्रशंसनीय है !
- स्वामी अवधेशानंद गिरीजी महाराज
स्वामी अवधेशानंद गिरीजी महाराज को प्रदर्शनी की
जानकारी देते हुए पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे (बाईं ओर)
    नई देहली - यहां के प्रगति मैदान में १४ से २२ फरवरी तक विश्‍व पुस्तक मेला २०१५ का आयोजन किया गया था । इसका उद्घाटन पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी के हस्तों किया गया । इसमें सनातन भारतीय संस्कृति संस्था द्वारा अध्यात्म एवं राष्ट्र-धर्म, बच्चों पर सुसंस्कार, आचारधर्मपालन आदि विषयों पर ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई गई । १५ फरवरी को स्वामी अवधेशानंद गिरीजी महाराज प्रदर्शनी पर पधारे और उसका अवलोकन कर बोले, इस संगठन द्वारा किया जा रहा हिन्दू धर्म का कार्य बहुत अच्छा है ।

संपादकीय

गर्वहरण !
        जनता किसी दल को पाठ पढाने की सोच ले, तो उसके लिए ऐसा करना बाएं हाथ का खेल है, इसका अनुभव भाजपा को देहली के चुनाव में हुआ होगा । आजकल के राजनीतिक दलों को जय-पराजय साधारण-सी घटना लगती होगी । इसके पश्‍चात भी, पूर्णतः नई आम आदमी पार्टी से इतने बुरे ढंग से पराजित होने पर अति बलवान भाजपा को गहरी चोट अवश्य पहुंची होगी । लोकसभा चुनाव में अभूतपूर्व विजय के पश्‍चात, भाजपा ने विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र, झारखंड व हरियाणा राज्य भी जीते । जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों में उसके प्रत्याशी अभूतपूर्व संख्या में जीते थे ।

आजकल के हिन्दुआें समान मूर्ख पूरे विश्‍व में कोई नहीं होगा !

परात्पर गुरु डॉ. आठवले
     'जब रोगी को किसी औषध से लाभ नहीं होता, तो चिकित्सक औषध बदलता है । इसी प्रकार, जब किसी चिकित्सक के उपचार से रोगी को लाभ नहीं होता, तो वह चिकित्सक बदलता है । किंतु, एक भी राजनीतिक दल, गत ६८ वर्ष में भारत और हिन्दू के रसातल में मिल जाने पर भी, हिंदू लोकतंत्र के स्थान पर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना नहीं कर पा रहे हैं !' (२.२.२०१५) 

हिन्दू महासभा का आवाहन : हिन्दू पत्नियोंवाले मुसलमान अभिनेता हिन्दू बन जाएं !

     देहली - लव जिहाद की बढती समस्या को देखते हुए हिन्दू महासभा ने मुसलमान अभिनेताआें को हिन्दू बन जाने का आवाहन किया है । उनका कहना है कि अधिकतर मुसलमान अभिनेता हिन्दू युवतियों से विवाह करते हैं । साथ ही हिन्दी फिल्मों में हिन्दू लडकी और मुसलमान लडके को प्यार करते हुए दिखाया जाता है । ये फिल्में देखनेवाली हिन्दू लडकियां इस प्रेम का आदर्श अपने सामने रखती हैं और कट्टरपंथी लडकों के प्रेमजाल में फंस जाती हैं । सूत्रों से जानकारी मिली है कि इन लडकियों को उपभोगने के उपरांत, उन्हें वेश्याव्यवसाय अथवा आतंकवादी गतिविधियों में सम्मिलित होनेपर विवश किया जाता है । अब केंद्र सरकार कोे छानबीन कर, उस पर रोक लगानी होगी !

बुलंदशहर (उत्तरप्रदेश) में धर्मांधों द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद, हिन्दुस्थान मुर्दाबाद की देशद्रोही घोषणाएं !

हिन्दुआें का सामूहिक हत्याकांड करने व दो दिन में गांव छोडने की धमकी !
हिन्दुआें के घर - दुकानों में फेंके जिहादी पर्चे ! 
बुलंदशहर भारत में है या पाकिस्तान में ?
    लक्ष्मणपुरी (लखनऊ)- धार्मिकदृष्टि से संवेदनशील बुलंदशहर स्थित ऊंचागांव और अहमदगढ में १ फरवरी की रात धर्मांधों ने मार्गपर आकर पाकिस्तान जिंदाबाद, हिन्दुुस्थान मुर्दाबाद की देशद्रोही घोषणाएं दीं । इतना ही नहीं धर्मांधों ने गैरमुसलमानों को गांव छोडकर चले जाने की धमकियां दीं और कहा यदि वे ऐसा नहीं करते तो सामूहिक हत्याकांड करेंगे । (संदर्भ : जागरण) (यह है उत्तरप्रदेश के सत्ताधारी समाजवादी दल द्वारा धर्मांधों की चापलूसी किए जाने का परिणाम ! धर्मांधों का मस्तक ठिकाने पर लाने के लिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करें ! - संपादक)

बिहार के एक विद्यालय में वन्दे मातरम् न गाने का महापंचायत का निर्णय !

वन्दे मातरम् के स्थान पर सर्वधर्म प्रार्थना
करने का निर्णय मांझी जिला भारत में है अथवा पाकिस्तान में ?
    मांझी (बिहार) - मांझी जिले में दुलदुलिया गांव के एक विद्यालय में प्रतिदिन प्रार्थना के पश्‍चात, वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत गाया जाता था । १३ जनवरी को कुछ समाजकंटकों ने लाठी-डंडे तथा हॉकी स्टिक के साथ विद्यालय में जाकर वन्दे मातरम् गायन का विरोध किया और शिक्षकों को चेतावनी दी । इसके पश्‍चात, विद्यालय में यह गीत गायन रोक दिया गया । इस पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है । अब इसके स्थान पर सर्वधर्म प्रार्थना कही जाएगी, ऐसा निर्णय दुलदुलिया की महापंचायत ने लिया है ।  (राजनीतिक लाभ के लिए विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना नष्ट करनेवाली राष्ट्रद्रोही महापंचायत ! - संपादक)

बंगाल के अल्पसंख्यक मंत्री गियासुद्दीन मुल्ला की उपस्थिति में धर्मांधों का हिन्दुआें पर सशस्त्र आक्रमण !

    कोलकाता (बंगाल) - यहां के २४ परगना जिले में धर्मांधों की सशस्त्र टोलियों ने बंगाल के अल्पसंख्यक मंत्री गियासुद्दीन मुल्ला की उपस्थिति में २८ और २९ जनवरी को सरस्वतीपूजन के पश्‍चात मूर्तियों का विसर्जन कर लौट रहे हिन्दू युवकों पर आक्रमण किया । उस समय मस्जिद के भोंपू से मुसलमानों को आक्रमण में सहभागी होने हेतु उकसाया जा रहा था । पुलिस सदा की भांति घटनास्थल पर देर से पहुंची । (देश में त्योहार-उत्सवों पर, धर्मांधों का हिन्दुआें पर आक्रमण नित्य की ही घटना हो गई है । अतः, वास्तव में अच्छे दिन लाने का एकमात्र विकल्प है, हिन्दू राष्ट्र ! - संपादक)

राजस्थान के विद्यालयों में सूूर्यनमस्कार लागू करने पर मुसलमान संगठनों का विरोध!

    जयपुर - राजस्थान के शासकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रार्थनासभा में सूर्यनमस्कार लागू करने पर जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द, पॉप्युुुलर फ्रंट ऑफ इण्डिया और अन्य मुसलमान संगठनों ने विरोध व्यक्त किया है । इन संगठनों ने बैठक कर संयुक्त-पत्र जारी किया है, जिसमें लिखा है, यह व्यवस्था मुसलमानों के लिए पूर्णतः अस्वीकार्य है । हम वैध मार्ग से इसका विरोध करेंगे । 
     मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने राजकीय विद्यालयों में सूर्यनमस्कार और योग लागू करना  उचित है, ऐसा कहा है ।

हिन्दू देवी-देवताआें का अनादर करनेवालों के जालस्थल का बहिष्कार करें !

    हिन्दुआें के शिव, गणेश आदि देवता एवं पवित्र चिह्नों को टी-शर्ट पर अंकित कर उनका विज्ञापन करनेवाले तथा उन्हें बेचनेवाले ऑनलाईन स्टोअर wyo.in के विषय में हिन्दू जनजागृति समिति को शिकायतें मिली हैं । समितिद्वारा उन्हें तुरंत पत्र भेजकर इस अनादर के विषय में जागृति की गई । इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी हेतु देखें समिति का जालस्थल (वेबसाइट) : http://www.hindujagruti.org/news35673.html 
धर्माभिमानी हिन्दू वैधानिक मार्ग से अपना निषेध व्यक्त करें :
Phone : +९१-०२२-२६८५०१४१, +९१-०९७६९३५८४०८,
Email : support@wyo.in, info@wyo.in, Website : www.wyo.in
 

सुदर्शन चैनल के श्री. सुरेश चव्हाणकेजी का जन्मदिन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न !

श्री. सुरेश चव्हाणकेजी को भेंटवस्तु देते हुए हिन्दू
जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. पिंगळेजी
    देहली - सुदर्शन चैनल के देहली के मुख्य कार्यालय मीडिया मंदिर में चैनल के सर्वेसर्वा श्री. सुरेश चव्हाणकेजी का जन्मदिन १८ फरवरी को नागरी पत्रकार दिन के रूप में मनाया गया । इस अवसर पर श्री. चव्हाणकेजी ने कहा, आज सुदर्शन चैनल जिस ऊंचाई पर पहुंचा है, वह केवल भगवान की कृपा और सहकारी कर्मचारियों के कारण हुआ है । यह एक धर्मयुद्ध है ।

हिन्दू जनजागृति समिति की उत्तुंग उडान !

हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के यज्ञकुंड में १ हजार हिन्दू धर्मजागृति सभाआें की समिधा अर्पित !
    वर्ष २००२ में राष्ट्र एवं धर्म रक्षणार्थ सक्रिय हिन्दू जनजागृति समिति की स्थापना हुई । राष्ट्र-धर्म की वर्तमान दुर्दशा को देखते हुए लोकतंत्र नहीं, अपितु हिन्दू राष्ट्र की स्थापना ही सब समस्याओं का उत्तर है । इसलिए हिन्दुत्व की रक्षा एवं हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने हेतु हिन्दू जनजागृति समिति निरंतर ९ वर्षों से अनेक स्थानों पर जिला तथा गांव में हिन्दू धर्मजागृति सभाएं आयोजित कर रही है ।

मुसलमानों द्वारा हिन्दू धर्म की आलोचना पर साधकों ने किया प्रतिवाद !

    देहली - यहां के विश्‍व पुस्तक मेले में मुसलमान धर्मीय ने वेद और कुरआन फैसला करते हैं ! कितने दूर कितने पास नाम से पुस्तक प्रदर्शन लगाया था । यहां पर हिन्दू धर्म पर टिप्पणी करनेवाले फलक लगाए गए थे । उदा. मूर्तिपूजा गलत है, साकार उपासना का निषेध, परमेश्‍वर साकार नहीं है आदि । इस प्रदर्शनी पर एक मुसलमान (एक हिन्दू से) : मूर्तिपूजा करना गलत है । इसलिए मत करो । (हिन्दू व्यक्ति चुप था ।) यह सुनकर एक हिन्दुत्ववादी व्यक्ति ने प्रतिवाद किया।

फ्रांस में बनी वस्तुआें का प्रयोग न करें ! पंजाब के शाही इमाम का फतवा

    लुधियाना (पंजाब) - यहां की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने पत्रकार परिषद में कहा कि, किसी भी परिस्थिति में मुसलमान पैगंबर का अनादर नहीं सहेगा । तदुपरांत उन्होंने एक फतवा जारी किया, मुसलमान फ्रांस में बनी वस्तुआें और फ्रांस एयरलाइन्स का बहिष्कार करें । उन्होंने आगे कहा, हम पूर्णतः आतंकवाद के विरोध में हैं; परंतु हमारे पैगंबर का अनादर हमसे सहन नहीं होगा । फ्रांस से प्रकाशित होनेवाले समाचारपत्र शार्ली हेब्दो में मुहम्मद पैगंबर का व्यंग्यचित्र प्रकाशित करने के विरोध में विश्‍वभर के मुसलमानों ने कडे शब्दों में विरोध दर्शाया ।

कर्णावती (अहमदाबाद) महानगरपालिका के परिपत्रकानुसार विद्यालयों में सरस्वती वंदना कार्यक्रम करने हेतु उर्दू विद्यालयों का नकार !

    कर्णावती (गुजरात) - महानगरपालिका के परिपत्रकानुसार सर्व विद्यालयों में सरस्वती वंदना कार्यक्रम संपन्न हुआ; परंतु अल्पसंख्यकों के उर्दू विद्यालयों ने सरस्वती वंदना कार्यक्रम के लिए अस्वीकृति दर्शाई । कुछ धर्मांधों ने अल्पसंख्यक क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का निषेध किया । (सर्वधर्मसमभाव के नाम पर ईद और बडा दिन मनानेवाले हिन्दुआें को करारा तमाचा ! - संपादक)

नक्सलवादी, अर्थात अधिकारों के लिए लडनेवाला योद्धा ! - बिहार के मुख्यमंत्री के देशद्रोही वक्तव्य

    मधेपुरा (बिहार) - बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने टेंगराहा गांव में आदर्श ग्राम योजना व पुरैनी गांव में कृषि मेले के उद्घाटन के समय कहा, नक्सलवादी अधिकारों के लिए लडनेवाले योद्धा हैं ।
    उन्होंने आगे कहा, शोषण से घबरा कर लोग हाथ में शस्त्र लेते हैं । अच्छा जीवन किसे नहीं चाहिए । किंतु, उन्हें लडने के लिए बाध्य किया जाता है । मैं ऐसे लोगों का  समर्थक हूं । गत कुछ दिनों में आत्मसमर्पण करनेवाले १६० नक्सलियों को डेढ-डेढ लाख रुपए और घर बनाने के लिए भूमि दी जाएगी । (नक्सलवाद का समर्थन करनेवाले मुख्यमंत्री पर देशद्रोह का अभियोग चलाकर उन्हें आजन्म कारागृह में डालें  !  - संपादक)

हिन्दू महासम्मेलन में मुसलमान परिवार की घर वापसी पर मचा हंगामा !

     लखीमपुर खीरी (उ.प्र.) - यहां विश्‍व हिन्दू परिषद की ओर से हिन्दू महासम्मेलन का आयोजन किया गया था । इसमें २००६ में स्वेच्छा से मुसलमान बन चुके एक परिवार ने हिन्दू धर्म में लौटने की घोषणा की । उनके घोषणा करते ही पुलिस उन्हें बंदी बना कर थाने ले गई । विश्‍व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन स्थल से थाने तक, इसके विरोध में मोर्चा निकालकर प्रदर्शन किया ।

प्रत्येक मस्जिद में गौरी-गणेश की मूर्तियां रखने की हिन्दुआें को छूट मिले ! - सांसद योगी आदित्यनाथ

 सांसद योगी आदित्यनाथ
    वाराणसी (उ.प्र.) - यहां ८.२.२०१५ के भारत माता मंदिर परिसर में विश्‍व हिन्दू परिषद ने विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया था । इस में संत, महंत और धर्माचार्य सम्मिलित हुए थे । इस सम्मेलन में मार्गदर्शन करते हुए भाजपा के सांसद महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा, लाखों हिन्दू जब बाबा विश्‍वनाथ के दर्शन करने जाते हैं, तो ज्ञानवापी मस्जिद मुंह चिढाती है । ज्ञानवापी मस्जिद में नंदी और गौरी-गणेश बंधक हैं, जिन्हें हर हाल में मुक्त कराना होगा ।

ईसाई विद्यालय पर हुए कथित आक्रमण पर सरकार ने तत्परता से देहली पुलिस आयुक्त से मांगा उत्तर !

    देहली - यहां के ईसाई विद्यालय होली चाइल्ड ऑक्जीलियम में बारह फरवरी की रात कथित आक्रमण की घटना हुई । इस प्रकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहली के पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी को बुलवाकर इस घटना के विषय में उनसे उत्तर मांगा । केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी भी दोपहर को इस विद्यालय में पहुंची और उन्होंने घटना की जानकारी ली । कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर इस घटना की निंदा की है । (बंगाल, असम, केरल, बिहार, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र एवं गोवा आदि राज्यों में आए दिन अनेक मंदिरों में चोरियां होती रहती हैं । कई मंदिरों का अनादर और अनेक मंदिरों पर आक्रमण होते हैं; परंतु केंद्र के किसी मंत्री ने ईसाई स्कूलसंबंधी घटना की ओर जिस प्रकार तत्परता से ध्यान दिया है, उस प्रकार मंदिरों पर कभी ध्यान नहीं दिया । कांग्रेस का राज समाप्त हो गया है । फिर भी हिन्दुआें की स्थिति दयनीय है । ऐसे में हिन्दू राष्ट्र स्थापित करने के अतिरिक्त अन्य कोई पर्याय शेष नहीं है ! - संपादक)

हिन्दू धर्म के खरे बैरी हिन्दू ही हैं !

(कहते हैं ) मैं भगवद्गीता को जला दूंगा !
    मैसूर (कर्नाटक) - विविध शासकीय कर्मचारी संगठनों द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में धर्मद्रोही विचारक प्रा. के.एस. भगवान ने संतापजनक वक्तव्य किए । उन्होंने कहा, भगवद्गीता अत्यंत अपवित्र, अपमानकारक एवं अपायकारक ग्रंथ है । भगवद्गीता वैदिकों का (ब्राह्मणों का) ग्रंथ है । राष्ट्रीय ग्रंथ होने की उसमें योग्यता नहीं है । (हिन्दुओं को इस विषवमन के लिए प्रा. भगवान को वैधानिक मार्ग से फटकारना चाहिए ! - संपादक) यदि सभाध्यक्ष ने सम्मति दी, तो यहीं पर भगवद्गीता को जला दूंगा । (भगवद्गीता को जला देने पर भी उसमें विद्यमान विचार नष्ट नहीं होंगे ! - संपादक ) उपस्थित व्यक्तियों में से कुछ व्यक्तियों ने भगवान के विचारों को सहमति दर्शाई; परंतु महसूलमंत्री श्रीनिवासप्रसाद ने भगवद्गीता जलाने को अनुमति नहीं दी । (तालिबानियों समान हिन्दू धर्म की आलोचना कर, भगवद्गीता जलाने का समर्थन करनेवाला एक आतंकवादी गुट समाज में उत्पन्न हो रहा है । यह भारतीयों के लिए विनाशकारी है । सरकार को समय रहते ही इसे नियंत्रित करना आवश्यक है ! - संपादक )

जिहादी साहित्य हटाने से २५ लाख मुसलमानों द्वारा फेसबुक के बहिष्कार की धमकी!

हिन्दुओ, धर्मांधों की भांति संगठित हो जाएं,
तो कोई भी आपके श्रद्धास्थानों पर हाथ डालने का दुस्साहस नहीं करेगा !
    न्यूयॉर्क (दक्षिण अमरीका) - फेसबुक पर विश्‍व के अनेक धर्मांध तथा जिहादी संगठन इस्लाम संबंधी लेख प्रकाशित (अपलोड) करते हैं । इसपर ४ खातों के लेख में कट्टर जिहादी और आतंकवादी संगठनों की प्रशंसा की गई थी । इन लेखों को पढकर विश्‍व के अनेक युवक-युवतियां जिहादी संगठनों की ओर आकर्षित हो रहे थे । इसलिए फेसबुक प्रतिष्ठान ने इन ४ खातों के पृष्ठ हटा दिए । इसपर, २५ लाख मुसलमानों ने उसे धमकी दी कि, यदि आपने ये पृष्ठ पुनः प्रकाशित नहीं किए, तो हम आपके फेसबुक का बहिष्कार करेंगे । इसके साथ धर्मांधों ने यह भी मांग की है कि फेसबुक प्रतिष्ठान यह नियम बनाए कि इस जालस्थल पर इस्लामविरोधी साहित्य रखे जाने पर, उसे तुरंत बंद कर दिया जाएगा । इसके साथ ही उसपर कार्यवाही भी करनी पडेगी । यदि ऐसा नहीं हुआ, तो सभी मुसलमान फेसबुक छोडकर मदीना डॉट कॉम नामक इस्लामिक जालस्थल का उपयोग आरंभ करेंगे ।

चीन में विदेशी शैक्षिक पुस्तकों पर प्रतिबंध !

चीन में नृत्य करते हुए इमाम
     बीजिंग (चीन) - युवा पीढी पर पाश्‍चात्य जीवन-प्रणाली के प्रभाव को रोकने हेतु चीन शासन ने विदेशी पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है । इसके साथ ही चीन के शिक्षामंत्री युआन ग्युरेन ने एक परिसंवाद (सेमिनार) में उपस्थित सभी विश्‍वविद्यालय प्रमुखों को इस संबंध में आदेश दे दिया है । इस परिसंवाद में पेकिंग विश्‍वविद्यालय तथा त्सिंघुआ विश्‍वविद्यालय सहित अनेक प्रमुख शिक्षा संस्थाआें के पदाधिकारी उपस्थित थे ।

सनातन संस्था के चौथे संतरत्न पू. निकम जी का देहत्याग !

पू. नारायण निकम
सातारा (महाराष्ट्र) - सनातन संस्था के चौथे संतरत्न पू. नारायण निकम (पू. निकमतात्या), वय ८२ वर्ष, २५ जनवरी २०१५ को सवेरे १०.४५ बजे, अपने निवासस्थान पर देहत्याग किया । अंधे होने पर भी पू. निकमजी ने अंतर्साधना कर अध्यात्म में संतपद प्राप्त किया था । सेना में सैनिक रहे, पश्‍चात दृष्टिहीन हुए पू. निकमतात्याजी ने सबके सामने शीघ्र आध्यात्मिक उन्नति का आदर्श प्रस्तुत किया है ।

नगरों, भवनों आदि के विदेशी नामों को हटाने के लिए आंदोलन करें !

     अरबों से पुर्तगाली, फ्रेंच, डच, अंग्रेज तक सभी विदेशियों ने साम्राज्य विस्तार के उद्देश्य से भारत पर आक्रमण किए । पश्‍चात, उस साम्राज्य को टिकाने के लिए यहां के मूल निवासी हिन्दुआें का छल-बल से धर्मपरिवर्तन करवाया । स्मरण रहे, धर्मपरितर्र्न से केवल धर्म का परिर्तन नहीं होता, इससे राष्ट्रांतर और सांस्कृतिक जीवन संबंधी दृष्टिकोण  भी परिवर्तित होता है ।
स्वतंत्रताप्राप्ति के पश्‍चात आज भी हमारे देश में परतंत्रता के चिह्न नगरों, भवनों, मार्गों आदि के नामों के रूप में विद्यमान हैं ।
    उदाहरणार्थ - 'इलाहाबाद',' अहमदाबाद',' वास्को' आदि नगर और 'अकबर रोड', 'लोदी रोड' आदि मार्ग । विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा रखे गए ये नाम, अर्थात हिन्दुआें पर किए गए भीषण अत्याचारों के चिह्न !
नगर, वास्तु आदि का हिन्दू पद्धतिनुसार नामकरण करना अर्थात स्थानशुद्धि करना : स्वभाषा में उपयोग किए जानेवाले फारसी, अंग्रेजी आदि विदेशी शब्द दूर रखकर, उसके स्थान पर देशी भाषा के शब्दों का ही उपयोग करने से भाषाशुद्धि होती है और स्वभाषा के चैतन्य में वृद्धि होती है । हममें से अनेक जन अपने नाम के आरंभ के अक्षर अर्थात इनीशियल अंग्रेजी भाषा में लिखते होंगे, उदा. 'डी.के. कपूर' ऐसा लिखने के स्थान पर, यदि हम 'दर्शन कुमार कपूर' लिखेंगे, तो आपके ध्यान में आएगा कि उसमें अधिक चैतन्य प्रतीत होता है । इसी प्रकार वर्तमान में नगर, वास्तु, मार्ग आदि विदेशी आक्रमकों के नाम हटाकर स्थानशुद्धि करने से उस स्थान के चैतन्य में वृद्धि होती है ।
    ध्यान दीजिए, आंदोलन से नगरों के नाम परिवर्तित किए जा सकते हैं ! : शिवसेना के आंदोलन से 'बाम्बे' का नाम 'मुंबई' हुआ । 'मद्रास' का नाम 'चेन्नई', 'कलकत्ता' का 'कोलकाता' हुआ। प्रभावी आंदोलन कर, विदेशी नामों को भारतीय नाम दिए जा सकते हैं ।

भारतीय परंपरा के अनुकूल नई शिक्षानीति के विषय में चिंतन आवश्यक ! - (पू.) डॉ. चारुदत्त पिंगळे

(पू.) डॉ. चारुदत्त पिंगळे
     भोपाल के धर्मपाल शोधपीठ और राजघाट, वाराणसी के गांधी विद्या संस्थान की ओर से भोपाल के स्वराज भुवन सभागृह में, 'द ब्यूटीफूल ट्री : राष्ट्रीय शिक्षा की नवरचना' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित थी । इस संगोष्ठी में ८ फरवरी को हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने भारतीय परंपरा के अनुकूल नई शिक्षानीति के विषय में अध्ययन-प्रबंध प्रस्तुत किया । उसे हम अपने पाठकों के लिए यहां दे रहे हैं ।

इतिहास के विकृतिकरण का राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद का षड्यंत्र !

     'राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं तुलनात्मक अध्ययन केंद्र' के अध्यक्ष श्री. नीरज अत्री राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा इतिहास की पुस्तकों में हुए विकृतिकरण के अभ्यासक हैं । हमारे पूर्वजों की छवि मलिन करने के संदर्भ में प्रस्तुत है यह लेख ...
१. बच्चों के मन में पूर्वजों की प्रतिमा को जानबूझकर मलिन करनेवाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद : जब हम अपने पूर्वजों के जीवन मूल्यों से अवगत होते हैं तो स्वयं ही अपनी धरोहर पर गर्व होता है । गौरव और आत्मसम्मान ऐसी उपलब्धियां हैं कि ये स्वयं ही आत्मविश्‍वास को जन्म दे देती हैं । युद्धनीति में भी ये महत्त्वपूर्ण हैं । आत्मविश्‍वास से भरा व्यक्ति प्रत्येक कार्य को अपनी क्षमता से भी अधिक कुशलता से कर लेता है ।

हिन्दू जनजागृति समिति के जालस्थल पर अब वीडियो वार्तापत्र भी उपलब्ध !

    धर्म पर आधारित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए कार्यरत हिन्दू जनजागृति समिति के hindujagruti.org जालस्थल (वेबसाइट) पर अब प्रतिदिन वीडियो वार्तापत्र (वीडियो न्यूज) भी उपलब्ध करवाया जा रहा है ।  प्रत्येक व्यक्ति को अपने समय के अनुसार समिति के जालस्थल पर हिन्दी भाषा में यह वार्तापत्र देखने के लिए उपलब्ध रहेगा ।
    दर्शक समिति के जालस्थल की अंग्रेजी एवं हिन्दी, दोनों ही भाषाओं में वार्ता विभाग में (News Section) वार्तापत्र के वीडियोज् देख सकेंगे । उनकी मार्गिका (लिंक) आगे दी हैं :
अंग्रेजी : http://www.hindujagruti.org/news/35383.html
हिन्दी : http://www.hindujagruti.org/hindi/news/16329.html

पूर्णकालिक संवाददाता, संपादक, निवेदक और वीडियो एडिटरकी आवश्यकता !

    इस सेवा के लिए प्रशिक्षित, अर्धप्रशिक्षित, अप्रशिक्षित; परंतु प्रशिक्षित होकर सेवा करने की इच्छा रखनेवाले पूर्णकालिक मनुष्यबल की आवश्यकता है । प्रारंभ में आवश्यक मनुष्यबल की संख्या इसप्रकार है ।
संपादकीय सेवा (वृत्तलेखन) : ६, निवेदक : ४, वीडियो एडिटर (ध्वनिचित्र संकलक) : ५, चित्रीकरण तंत्रज्ञ : १,  अन्य सेवा :
    उसीप्रकार इस हिन्दू वार्ता कार्यक्रम के लिए पत्रकार की सेवा कर सकनेवालों की भी शीघ्र आवश्यकता है ।
यह सेवा करने हेतु इच्छुक व्यक्ति के पास आगे दी गई सुविधाएं होनी चाहिए ! : इस सेवा के लिए इच्छुक व्यक्ति के पास ५ अथवा उससे अधिक मेगापिक्सेल कैमरेवाला भ्रमणभाष अथवा छायाचित्रक (कैमरा), उपलब्ध छायाचित्र और चलचित्र (वीडियो) भेजने के लिए संगणक अथवा भ्रमणसंगणक तथा उच्च क्षमता का इंटरनेट कनेक्शन आदि सुविधाएं होना आवश्यक है ।

हिन्दू वाहिनी इस प्रस्तावित प्रकल्प के निर्माण हेतु अपनी ओर से एक छोटी भेंट के लिए, मीडिया ऐसेट मैनेजमेंट प्रणाली क्रय करने के लिए धन के रूप में सहायता प्रदान करें !

     आज के आधुनिक विश्‍व में इलेक्ट्रॉनिक प्रचार-तंत्र प्रचार का अत्यंत प्रभावी माध्यम है । इसलिए, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य में हिन्दुत्ववादी समाचारवाहिनियों की नितांत आवश्यकता है । हिन्दू धर्म की पताका सारे विश्‍व में फहरे, यह अपना अंतिम कर्तव्य माननेवाली हिन्दू जनजागृति समिति ने हिन्दू समाचारवाहिनी आरंभ कर, यह महाकठिन कार्य करने का संकल्प किया है । समिति के  कार्यकर्ता सर्वस्व त्याग कर, इस कार्य में सहभागी हो रहे हैं । यह व्यापक ध्येय शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण हो, इस हेतु प्रत्येक को यथाशक्ति सहयोग करना चाहिए ।

प्रस्तावित हिन्दू वाहिनीकी ध्येयपूर्ति की दिशा में प्रथम चरण के रूप में हिन्दू वार्ता हेतु निम्नलिखित सामग्री की शीघ्रता से आवश्यकता !

    समाज तक हिन्दुत्ववादी दृष्टिकोण पहुंचाने हेतु हिन्दू जनजागृति समिति हर संभव प्रयास  कर रही है । समाजमन में धर्मप्रेम वृद्धिगंत करने हेतु अब समिति के जालस्थल से हिन्दुत्ववादी विचारधनयुक्त हिन्दू वार्ता यह कार्यक्रम प्रदर्शित होनेवाला है । इसमें राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के समाचार हिन्दुत्ववादी दृष्टिकोणों सहित दर्शकों को दिखाए जाएंगे । प्रस्तावित हिन्दू वाहिनी की ध्येयपूर्ति की दिशा में समिति का यह प्रथम चरण होगा ।
हिन्दू वार्ता के प्रक्षेपण हेतु निम्नलिखित सामग्री की शीघ्रता से आवश्यकता है ।
     जो पाठक, शुभचिंतक एवं धर्माभिमानी इस सेवा हेतु आवश्यक सामग्री अथवा धनरूप में सहायता कर धर्मकार्य में सहभागी हो सकते हैं, वे श्री. योगेश शिंदे से ८४५१००६१३० इस क्रमांक पर संपर्क करें । - (पू.) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

पाठक, शुभचिंतक एवं धर्माभिमानियों से विनती !

समाज, राष्ट्र और धर्म की हानि तथा हिन्दुत्व के कार्य के समाचार भेजें ! 
    वर्तमान की दूरदर्शन वाहिनी (चैनल) हिन्दुआें के देवी-देवताआें और आस्थाकेंद्रों का उपहास, उनकी निंदा और विकृत पाश्‍चात्य प्रथाआें की जयजयकार कर रही हैं । वे हिन्दुआें पर कट्टरपन्थियों द्वारा हो रहे आक्रमण, भ्रष्टाचार आदि के विरुद्ध कभी जागृति नहीं करतीं । इन सबसे होनेवाली समाज, राष्ट्र और धर्म की हानि रोकना, हिन्दू संस्कृति का प्रसार करना इत्यादि के लिए हिन्दुआें की अपनी दूरदर्शन वाहिनी होनी आवश्यक है । इसलिए शीघ्र ही सनातन प्रभात नियतकालिक और Hindujagruti.org के संयुक्त तत्त्वावधान में हिन्दू वार्ता नामक इंटरनेट चैनल आरंभ किया जानेवाला है ।

साधकों को सूचना एवं पाठकों से विनती !

राजस्थान में हिन्दू-संगठन के कार्य में सक्रिय रूप से
सम्मिलित होने में सक्षम हिन्दुत्वनिष्ठों की जानकारी भेजें !
    हिन्दू राष्ट्र्र स्थापित करने के दृष्टिकोण से हिन्दू जनजागृति समिति अनेक स्थानों पर हिन्दू संगठन के लिए प्रयास कर रही है । राजस्थान में भी, हिन्दू संगठन के कार्य को शीघ्र ही आरंभ करने का, समिति का प्रयास है । इस निमित्त राजस्थान के कुछ जनपदों में समिति प्रथम ही जानेवाली है । हिन्दू संगठन का कार्य अधिक तीव्र गति से होने हेतु यहां के स्थानीय हिन्दुत्वनिष्ठों को विविध प्रकार की सहायता की आवश्यकता है ।

राजस्थान के स्वामी आेंकारानंदजी महाराज की गोवा के सनातन आश्रम को सदिच्छा भेंट !

सनातन ईश्‍वर की ओर ले जानेवाली शताब्दी एक्स्प्रेस है !
- स्वामी आेंकारानंदजी महाराज
     रामनाथी (गोवा) - ३० दिसंबर को राजस्थान के स्वामी ओंकारानंदजी महाराज, (आयु ७५ वर्ष) ने रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम को सदिच्छा भेंट दी । आश्रम देखकर उन्होंने कहा, सनातन का यह कार्य देखने पर ध्यान में आया कि प.पू. डॉ. आठवले ऋषि हैं, इसलिए इतना बडा कार्य कर रहे हैं ।

जोधपुर एवं बीकानेर में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से हिन्दू-संगठन प्रारंभ !

धर्मरक्षा हेतु हिन्दूजन धर्माचरण कर संगठित हों !
- रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
मार्गदर्शन करते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे तथा उनके साथ श्री. गजानन केसकर
धर्मप्रसार के कार्य में स्वामी आेंकारानंदजी महाराज का योगदान
    राजस्थान में धर्मप्रसार का कार्य हो इसलिए स्वामी आेंकारानंदजी महाराज ने पूरी सहायता करने का दायित्व लिया । उनके अनुरोध पर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे राजस्थान भ्रमण पर हैं । इस दृष्टि से राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में महाराजजी के परिचय से कार्यकर्ताआें के निवास एवं भोजन की व्यवस्था हो रही है । साथ ही अनेक हिन्दुत्वनिष्ठों से स्वामी आेंकारानंदजी महाराज परिचित भी करवा रहे हैं । इस प्रसारकार्य का संक्षिप्त ब्योरा...

तक्षशिला आदि विद्यापीठों की भांति, भावी अध्यात्म विश्‍वविद्यालय !

    विद्यार्थियों को राष्ट्र-धर्मनिष्ठ एवं संत बनाना तथा विविध योगमार्गों के साधकों का ईश्‍वरप्राप्ति हेतु मार्गदर्शन करना, यह इस अध्यात्म विश्‍वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य है ! इस विश्‍वविद्यालय में दी जानेवाली शिक्षा की प्रमुख विशेषताएं हैं - १४ विद्याआें एवं ६४ कलाआें की साधना के रूप में शिक्षा एवं वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से आध्यात्मिक शोध !

जनवरी में उत्तर भारत में हिन्दू जनजागृति समिति के कार्य का ब्यौरा

हिन्दू जनजागृति समीति एवं सनातन संस्था की ओर से उत्तर भारत के विविध स्थानों पर राष्ट्र्रध्वज का मान रखें विषय पर प्रबोधन !

विद्यार्थियों एवं नागरिकों का प्रबोधन
    मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर के द्वार पर समितिके कार्यकर्ताआें ने ४०० पर्चे बांटे । नोएडा के मेट्रो अस्पताल के सामने भी इस विषय पर समाज का प्रबोधन किया गया । फरीदाबाद के सेक्टर २९ स्थित होली चाइल्ड स्कूल के बाहर विद्यार्थियों और अभिभावकों में पर्चे बांटकर प्रबोधन किया । इसका लाभ ३०० विद्यार्थियों एवं कुछ अभिभावकों ने लिया । नई देहली में अशोक नगर स्थित फ्लोरेंस स्कूल में राष्ट्रध्वज का सम्मान व राष्ट्र्रभक्ति की प्रेरणा देने हेतु सनातन संस्था के साधक श्री. अरविंद गुप्ता एवं श्रीमती राजरानी माहुर ने प्रश्‍नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया ।

राजीम कुंभमेले में हिन्दू जनजागृति समिति और सनातन संस्था का सहभाग

    राजीम (छत्तीसगढ)  -  महाशिवरात्रि१ फरवरी २०१५ को राजीम कुंभके आयोजकों द्वारा हिंदू जनजागृति समिति के श्री. चित्तरंजन सुराल को संगम-आरतीसे पहले उपस्थित श्रद्धालुआें का मार्गदर्शन करने हेतु आमंत्रित किया था ।   
     इस मार्गदर्शन में श्री. सुराल ने कहा, कुंभमेले के पवित्र वातावरण में श्रद्धालु अधिकाधिक नामजप कर लाभ ले सकते हैं । संगम पर साबुन लगाकर स्नान करना, कुल्ला करना, कपडे धोना, बरतन मांजना, कचरा आदि फेंकना अनुचित है । ब्रह्मांडपुराण में उल्लेख है कि ऐसे तीर्थ के समीप शौच करना, कूडा-मलमूत्र फेंकना आदि १४ प्रकार के कर्म निषिद्ध हैं । ऐसा करनेवाले महापापी होते हैं; उन्हें गोहत्या का पाप लगता है ।
    इस समय पूजनीय साध्वी प्रज्ञा भारतीजी, वेदरतन सेवा प्रकल्पके संयोजक श्री. अशोक राजपूत तथा अन्य कई साधु-महंतों की वंदनीय उपस्थिति थी ।

प्रयाग में श्री श्री १००८ शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराजजी के शुभहस्तों अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ग्रंथ का विमोचन

श्री श्री १००८ शंकरदेव
चैतन्य ब्रह्मचारीजी महाराज
    प्रयाग (उत्तरप्रदेश) - माघ पूर्णिमा के पावन पर्व पर सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ग्रंथ का विमोचन अखिल भारतीय धर्मसंघ, दुर्गाकुंड, वाराणसी के अध्यक्ष श्री श्री १००८ श्री शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारीजी महाराज के करकमलों से हुआ । इस शुभ अवसर पर उक्त संस्था के महामंत्री छोटे महाराजजी श्री. जगजीतन पांण्डेयजी भी उपस्थित थे । सनातन संस्थाके साधक श्री. गुरुराज प्रभु द्वारा श्री श्री १००८ शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारीजी महाराज तथा स्वामी श्री जगजीतन पाण्डेयजी महाराजजी का सम्मान किया गया ।

भोपाल में राष्ट्रीय शिक्षा की नवरचना विषय पर संगोष्ठी में हिन्दू जनजागृति समिति का सहभाग !

बाएं से सर्वश्री रामेश्‍वर मिश्र, त्रिभुवननाथ शुक्ल,
डॉ. देवेन्द्र दीपक, पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे तथा श्री. मोहनलाल छीया
    भोपाल (म.प्र.) - यहां धर्मपाल शोधपीठ, भोपाल एवं गांधी विद्या संस्थान, काशी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा की नवरचना विषय पर संगोष्ठी कार्यक्रम में देशभर के शिक्षाविद्, शिक्षाक्षेत्र में कार्यरत मान्यवर तथा अध्यात्म क्षेत्र में कार्यरत लोग निमंत्रित थे ।

नेपाल में हिन्दू जनजागृति समिति के कार्य को उत्तम प्रतिसाद !

    बुटवल (नेपाल )- यहां ९ से १० जनवरी को संत सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें १०० संत और धर्मगुरु उपस्थित थे । सम्मेलन में पधारे स्वामी सम्बुद्ध महाराजजी ने कहा, मेरी इच्छा है कि हिन्दू जनजागृति समिति के साधक हमारे आश्रम में आकर औरों को भी सेवा और भक्तिभाव सिखाएं । इसके साथ ही नेपाल के धर्माभिमानी कार्यकर्ताआें ने हिन्दी भाषा के लघुग्रंथों का नेपाली भाषा में अनुवाद करने हेतु मांग की । वर्तमान में, यहां के कुछ धर्माभिमानी ४ विविध लघुग्रंथों का नेपाली भाषा में अनुवाद कर रहे हैं । काठमांडू के श्रीअरोबिन्द आश्रम ने साप्ताहिक धर्मशिक्षावर्ग की मांग की है ।

शिवरात्रि निमित्त हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा शिवमंदिर में ग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पाद की प्रदर्शनी का आयोजन

स्वामी श्रद्धानंदगिरीजी महाराज
    शिवबाडी, बीकानेर - यहां के प्रसिद्ध श्री लालेश्‍वर महादेव मंदिर में समिति द्वारा धर्मशिक्षा फलक और सात्त्विक उत्पाद एवं ग्रंथों की प्रदर्शनी लगाई गई । मंदिर के महंत स्वामी संवित् सोमगिरीजी महाराज ने प्रदर्शनी लगाने के लिए मंदिर के दर्शनीय भाग में जगह उपलब्ध करवाई । स्वामीजी ने स्वयं सभी भक्तों को प्रदर्शनी का लाभ लेनेका आवाहन किया । यहां के श्री भैरव गिरीमठ के शिवमंदिर में प्रदर्शनी लगाने हेतु मंदिर के महंत स्वामी श्रद्धानंदगिरीजी महाराज ने पूर्ण व्यवस्था की ।

भीनासर में हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा धर्माभिमानी हिन्दुआें की बैठक; युवाआें ने ली धर्मशिक्षा हेतु प्रतिदिन संगठित होने की प्रतिज्ञा !

श्री सुबोध गिरीजी महाराज
    भीनासर, बीकानेर - भक्तानंद शिवमंदिर के महंत संवित् श्री सुबोध गिरीजी महाराज ने महाशिवरात्रि निमित्त ग्राम के युवा व महानुभवों को एकत्रित कर एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने उपस्थित ४० से भी अधिक ग्रामस्थों को संबोधित किया । इस समय संवित् श्री सुबोध गिरीजी महाराज ने अहिन्दुआें की विकृत वास्तविकता पर प्रकाश डालते हुए हिन्दुआें को धर्मरक्षा हेतु संगठित होने का आवाहन किया । कार्यक्रम की प्रस्तावना समिति के श्री. आनंद जाखोटिया ने की।
     इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु इस मंदिर परिसर में चलाए जा रहे वाचनालय के सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक सहभाग लिया । कार्यक्रमके उपरांत प्रतिदिन १५ मिनट आरती एवं धर्म संबंधी चर्चा हेतु मंदिर में एकत्रित आने की युवाआें ने प्रतिज्ञा ली । इस समय मंदिर की मुख्य सडक पर धर्मशिक्षा प्रदर्शनी लगाई गई ।

भीनासर में पू. रघुवीरजी महाराज की हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा भेंट !

 पू. रघुवीरजी महाराज
    भीनासर - यहां के श्री मुरली मनोहर धोरा के (इस पहाडी पर परमश्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदासजी महाराज ने वास्तव्य किया था ।) पू. रघुवीरजी महाराज की भेंट लेकर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने उन्हें समिति के कार्य से अवगत कराया।
    पू. रघुवीरजी महाराज ने आसपास के कुछ क्षेत्रों में समिति के कार्यक्रम करवाने हेतु सहायता करनेकी तैयारी दर्शाई । साथ ही इस धोरे पर २३ फरवरीसे ३ मार्च तक होनेवाले श्रीरामचरितमानस के सामूहिक पारायण में ग्रंथ एवं धर्मशिक्षा फलकों की प्रदर्शनी लगाने की अनुमति भी दी ।

संस्कृतिरक्षा से धर्मरक्षा !

    संस्कृति की रक्षा अर्थात धर्म की रक्षा है और धर्मरक्षा से ही राष्ट्र-निर्माण के कार्य को गति मिलती है । आजकल पश्‍चिमी संस्कृति के अंधानुकरण के कारण हिन्दू संस्कृति लुप्त होने की स्थिति में है । इसीलिए, सर्वत्र अधर्म फैलकर राष्ट्र में अराजकता उत्पन्न हो गई है ।
     ऐसे में संस्कृतिरक्षा के माध्यम से धर्मरक्षा करना, प्रत्येक राष्ट्रप्रेमी एवं धर्मप्रेमी नागरिक का कर्तव्य है । इस अंक के निमित्त हम महान भारतीय संस्कृति के विविध अंगों तथा उनपर होनेवाले आघातों की जानकारी दे रहे हैं । इसके माध्यम से सबको संस्कृतिरक्षा हेतु प्रेरणा मिले, ऐसी धर्मसंस्थापक भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में प्रार्थना है !

हिन्दुओ, भारतीय होने का अभिमान करें !

योगऋषि प.पू. रामदेवबाबा
     विश्‍व को सर्वप्रथम बोलना, अर्थव्यवस्था, न्यायव्यवस्था, शिक्षाव्यवस्था, गणित, संस्कृति, आरोग्यशास्त्र आदि सबकुछ भारत ने सिखाया । हमारी संस्कृति इतनी प्राचीन और विकसित होने पर भी हम आजकल दूसरे देशों की ओर देखते हैं । २०० वर्ष पहले एलोपैथी का अस्तित्व नहीं था । उस समय कौन-सी उपचार-पद्धति थी ?
    विश्‍वभर से लोग हमारे देश में सीखने आते थे । अतः, हमें इस देश में जन्म लेने और यहां की संस्कृति में पलने का अभिमान होना चाहिए । - योगऋषि प.पू. रामदेवबाबा

हिन्दुओ, दैनिक कृत्यों के परिपूर्ण अध्ययन से युक्त महान हिन्दू संस्कृति की रक्षा एवं संवर्धन करना, हमारा धर्मकर्तव्य है !

दंतधावन की उचित पद्धति
  • उकडूं बैठकर गरदन आगे झुकाकर दांत स्वच्छ कीजिए । यह संभव न हो, तो एक स्थानपर खडे होकर कीजिए ।
  • ब्रश से नहीं, अनामिकासे दांत स्वच्छ कीजिए ।
  • दंतधावन हेतु नीम, खैर, करंज और गूलर, इन वृक्षों की टहनी अथवा फिटकरी का चूर्ण, आयुर्वेदिक दंतमंजन, गाय के गोबर के उपलों की राख का प्रयोग कीजिए । 

परमेश्‍वर को सखा माननेवाली हिन्दू संस्कृति !

    महाभारत युद्ध जीतने के पश्‍चात युधिष्ठिर ने अपना दूत पराभूत राजाआें के पास भेजा और उनका जीता हुआ प्रदेश उन्हें लौटा दिया । उत्तम प्रशासन के लिए सहयोग का आश्‍वासन दिया । उन्होंने उन राजाआें को भेजे संदेश में कहा, युद्ध सिद्धांतों के लिए था, उसके पीछे राक्षसी महत्त्वाकांक्षा नहीं थी । परमेश्‍वर को सखा मानने से हिन्दुआें को दूसरे का छीनने की इच्छा नहीं होती । ऐसा है, भारत ! - सुघोष (दैनिक सनातन प्रभात, पौष शु. दशमी, कलियुग वर्ष ५११३ (३.१.२०१२)

श्रेष्ठतम और प्राचीनतम !

१. जिस समय पूरा विश्‍व वन्य जीवन यापन कर रहा था, उस समय इस भूमि पर अत्यंत उच्चतम तत्त्वज्ञान और वेदऋचाआें के स्वर गूंजा करते थे । 
२. जिस समय विश्‍व के लोगों को वस्त्र परिधान करने का ज्ञान नहीं था, उस समय यहां अत्यंत कोमल रेशमी वस्त्रों का निर्माण होता था ।

अन्नसेवन अर्थात पवित्र यज्ञकर्म !

भोजन से पूर्व यह श्‍लोक बोलें !
ब्रह्मार्पणं ब्रह्महकिर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मैक तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ॥
॥ श्रीमद्भगवद्गीता ॥ (अध्याय ४, श्‍लोक २४)
अर्थ : भोजन-ग्रहण के इस ब्रह्मकर्मरूपी यज्ञ में आग्नि हवि एवं अर्पणकर्ता भी ब्रह्म है । जो व्यक्ति इस प्रकार सर्वत्र ब्रह्म-दृष्टि रखता है, उसे निश्‍चित ही ब्रह्म-भाव की प्राप्ति होती है । भोजनके समय इस मंत्र के पाठ से अन्न के दोष दूर हो जाते हैं ।

भोजनकी उचित पद्धति

     'टेबल-कुर्सी' अथवा सीधे भूमि पर नहीं; आसन अथवा पीढे पर पालथी लगाकर भोजन करने हेतु बैठें ।
  •  भोजन हेतु, दक्षिण दिशा की ओर मुख कर न बैठें ।
  • देवता को भोजन अर्पित कर, नाम जपते हुए उसे ग्रहण करें ।
  • जूठन वर्जित करें; इससे अनिष्ट शक्ति की पीडा हो सकती है ।
  • थाली में परोसे गए अन्नपदार्थ न छोडें । थाली के निकट गिरे अन्नकण, भोजन के उपरांत तुरंत उठा लें ।

प्राचीन हिन्दू संस्कृति के विविध अंगों का अध्ययन कर संस्कृतिरक्षा हेतु संगठित हों!

आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर की, रक्षा करें !
    भारतीयों को अंग्रेजों का दास बनाने के लिए भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर नष्ट करने की योजना ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत करनेवाला मैकाले ही भारतीय संस्कृति का शत्रु

नारी को पूजनीय मानकर सर्वोच्च स्थान देनेवाली भारतीय संस्कृति को न भूलें !

    आन-मान, मर्यादा, स्वाभिमान के प्रतीक पराक्रमी वीर महाराणा प्रताप के वीर पुत्र अमर सिंह ने युद्धभूमि में मुगल सेनापति अब्दुल रहीम खां को परास्त कर दिया । उन्होंने आवेश में आकर मुगल सरदारों के साथ उनकी पत्नियों को भी बंदी बना लिया । महाराणा प्रताप को जब यह समाचार मिला, तो वे बीमार होने पर भी युद्धक्षेत्र में जाकर अमर सिंह पर गरज पडे, "अमर सिंह ! ऐसा नीच काम करने से पहले तू मर क्यों नहीं गया । हमारी भारतीय संस्कृति को कलंकित करते हुए तुझे लाज नहीं आई ?"

विश्‍व का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ, मोक्षप्रदायिनी गंगा की रक्षा करें !

      प्राचीनतम काल से गंगाजी की कथा, हिन्दू संस्कृति की अमृतगाथा है । राष्ट्र-प्रतीक गंगा आज विश्‍व से नष्टप्राय हो रही १० नदियों में से एक है । इसीलिए गंगारक्षा के लिए प्रयत्न करना, प्रत्येक नागरिक का सांस्कृतिक, राष्ट्रीय तथा धार्मिक कर्तव्य ही है ! गंगा नदी की आध्यात्मिक धरोहर संजोने हेतु उसकी निर्मलता, प्रवाहीपन एवं पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है । इस हेतु आगे दिए कृत्य करें !

हिन्दुओ, गोमाता में देवताआें का वास है; अत: गोरक्षा धर्मकर्तव्य है !


१. गोपालन : आरोग्य, समृद्धि एवं निसर्गशुद्धि का मूलमंत्र !
    पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, मूत्र तथा गोबर) असाध्य रोगों पर रामबाण औषधि है, इसलिए यह रासायनिक औषधियों का उत्तम विकल्प है । गोबर तथा गोमूत्र से बनी खाद से अनाज की उपज एवं गुणवत्ता बढती है ।

हिन्दू संस्कृति की अद्वितीय विशेषता

प्रगत प्राचीन स्थापत्यकला
    भारत में स्थापत्यकला की दृष्टि से अप्रतिम खजुराहो अथवा मीनाक्षी मंदिर भव्य और विश्‍वप्रसिद्ध मंदिर हैं । इसी प्रकार, भोणगांव (जनपद धुलिया, महाराष्ट्र) में  ध्वनि-चमत्कार उत्पन्न करनेवाले दो मंदिर और एक समाधि मंदिर हैं, लक्ष्मणपुर (लखनऊ) में भूलभुलैया भवन है।

पाश्‍चात्यों तथा हिन्दुआें की श्रद्धा, साहित्य एवं संस्कृति !

गुरुदेव डॉ. काटेस्वामी जी
    हिन्दुआें की सनातन जीवन-प्रणाली के प्रति श्रद्धा और पाश्‍चात्यों की श्रद्धा में दो ध्रुवों जितना अंतर है ! पाश्‍चात्यों की जैसी श्रद्धा है, वैसे ही उनके शास्त्र और साहित्य हैं ! धर्म और मोक्ष, ये दो पुरुषार्थ पाश्‍चात्य संस्कृति को अमान्य हैं । उसमें परलोक, पुनर्जन्म आदि कुछ नहीं हैं । उनकी संस्कृति इहवादी, अर्थवादी और कामवासना पर आधारित है । हमारी संस्कृति से उसकी तुलना कैसे हो सकती है ? हमारी जैसी श्रद्धा है, वैसे हमारे शास्त्र और साहित्य हैं । हमारी आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक भूमिकाआें में शोकांतिका के लिए स्थान नहीं है । पाश्‍चात्योंके साहित्य, ग्रंथ और उनकी टीका पढने से ज्ञात होता है कि हमारे साहित्यकारों की रचनाएं अभिरुचिहीन होती हैं, यह निर्विवाद सत्य है । उस समय के हमारे साहित्य में शोकांतिकाएं नहीं थीं, आज नहीं हैं और आगे भी संभवतः न हों । हमें अपनी संस्कृति शुद्ध रखनी चाहिए । उसमें आसुरी संस्कृति का मिश्रण नहीं होना चाहिए । - (साप्ताहिक सनातन चिंतन, १८ जानेवारी २००७, अंक ४९, वर्ष १)

हिन्दुओ, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर संजोने के लिए यह करें !

ताजमहल के तहखाने के बंद द्वार खोलने की मांग करें !
हिन्दुआें का तेजोमहालय

धर्मनिरपेक्ष शासनकर्ताओं को संस्कृतिरक्षा हेतु निम्नलिखित कृत्यों के लिए बाध्य करें !

तीर्थयात्राओं के लिए अनुदान
    यदि हज यात्रियों के लिए अनुदान की व्यवस्था की जा सकती है, तो यह व्यवस्था चारधाम, अमरनाथ अथवा कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रियों के लिए भी होनी चाहिए । 

संवत्सरारंभ मनाने की योग्य पद्धति (चैत्र शु. प. १ अर्थात २१ मार्च २०१५)

पूर्वप्रबंध : नववर्ष के दिन सुबह शीघ्र उठकर अभ्यंगस्नान करें । आम के पत्तों के बंदनवार बनाकर प्रत्येक द्वारपर लाल फूलों के साथ बांधें ।

होली पारंपरिक धार्मिक प्रथानुसार मनाएं !

    वर्तमान में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (अंनिस) जैसे धर्मद्रोही संगठन एवं निधर्मी राजनेता वृक्षहानि का कारण बताकर कूडे-कचरेकी होली जलाएं, ऐसा अनुचित संदेश समाज में प्रसारित करते हैं । कचरे की होली कदापि न जलाएं; क्योंकि उससे वातावरण दूषित होता है । इसके विपरीत होलिकादेवी का पूजन कर रहे हैं, इस भावसे होली मनाने से वातावरण सात्त्विक बनता है ।

तृतीय महायुद्ध की भीषणता पर अंकुश लगाने हेतु अग्निहोत्र (चैत्र शु. प. ६)

१.  तृतीय महायुद्ध की भीषणता तथा उसपर उपाय
    'तृतीय महायुद्ध में अणुबम के किरणोत्सर्ग से हमारे प्राण न जाएं तथा दूसरों के प्राणों की रक्षा हो, इसके लिए अग्निहोत्र एवं साधना करें !' - परात्पर गुरु डॉ. आठवले (३०.९.२००७)

श्रीराम की उपासना (चैत्र शु. प. ९)

     प्रजा का जीवन सुखी-संतुष्ट एवं ऐश्‍वर्यसंपन्न बनानेवाले; अपराध, भ्रष्टाचार, रोग-व्याधि, आपत्ति-विपत्ति आदि से मुक्त राज्य के निर्माता मर्यादापुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम अर्थात पूर्णतः आदर्श अवतारी पुरुष !

कोटि-कोटि प्रणाम !


गुरु हरगोबिंद सिंह पुण्यतिथि  (१९ मार्च)

श्री हनुमान उपासना (चैत्र शु. पूर्णिमा)

    तेल, सिंदूर, मदार के (रुई के) पत्ते एवं पुष्पों में श्री हनुमान के सूक्ष्म स्पंदन (तत्त्व) आकृष्ट करने की क्षमता अधिक होती है । ये घटक पदार्थ श्री हनुमान की मूर्ति को अथवा चित्र को अर्पण करने से मूर्ति अथवा चित्र जागृत होने में सहायता होती है । उससे मूर्ति अथवा चित्र में विद्यमान चैतन्य का लाभ उपासक को होता है ।

क्रांतिकार्य की अग्निज्वाला

 २३.३.१९३१ को इन
त्रिमूर्ति को अंग्रेजों ने फांसी दी ।
    क्रांति कब अनिवार्य हो जाती है, इस संदर्भ में भगतसिंह के विचार
     बाल्यावस्था में भगतसिंह का मन धार्मिक विचारों से प्रभावित था । आगे, युवावस्था में पदार्पण करते ही वे गांधीवादी राष्ट्र्रभक्ति से क्रांतिकारी आतंकवाद की ओर मुडे । उन्होंने कहा, जनआंदोलन की नीति के रूप में अहिंसा आवश्यक है, हिंसा नहीं । जनक्रांति का आधार हिंसा नहीं हो सकती । परंतु, इतिहास ने अथवा सत्ताधारी वर्ग ने यदि हिंसा करने के लिए विवश किया, तो क्रांतिकारी आवश्यक हिंसा करने से पीछे न हटें । एक भयानक; कितु अत्यंत आवश्यक अथवा अंतिम मार्ग के रूप में क्रांतिकारी हिंसा का आधार लें । - श्री. शरद बेडेकर (मराठी पुस्तक, विचारवंतांचा ईश्‍वर)

गोटिपुआ : ईश्‍वर से आतंरिक मिलाप करानेवाला ओडिशा का एक दुर्लभ नृत्यप्रकार !

    १. पिछली पंक्ति में खडे (बाईं ओर से) श्री. बनंबर स्वैन, श्री. सिबेंद्र दास, नृत्यप्रशिक्षक श्री. बटक्रिश्‍ना दास, श्री. कबिराज प्रधान, मध्य पंक्ति में (बाईं ओर से) श्री. किरण दलाई, कु. अभिराम दास, श्री. अजय (के.वी) स्वैन, नीचे बैठे हुए (बाईं ओर से) कु. रामानुजा सेठी, कु. कान्हा कुंभार, कु. रामकृष्णा सेठी, कु. संतोष बराल, कु. अमिर नायक २. एक वृक्षपर श्रीकृष्ण और राधा खडे हैं, ऐसा दर्शानेवाला नृत्यप्रकार

धर्मसत्संग की वीसीडी का प्रसारण

    विविध राज्यों में (उत्तर भारत, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश) स्थानीय केबल नेटवर्क द्वारा सनातन संस्था चेन्नई तथा हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा निर्मित हिन्दी धर्मसत्संग की वीसीडी का प्रसारण हो रहा है । ५७,३४,००० से अधिक दर्शक इसका लाभ ले रहे हैं ।

फरीदाबाद की श्रीमती उषा रखेजा (आयु ६३ वर्ष), श्रीमती शकुंतला किंगर (आयु ६५ वषर्र्) और श्रीमती कुसुम कुलश्रेष्ठ (आयु ६७ वर्ष) ने प्राप्त किया ६१ प्रतिशत अध्यात्मिक स्तर !

६१ प्रतिशत स्तर प्राप्त करनेवालों की विशेषताएं !
    ये जीव माया से अलिप्त हो पाते हैं । उनका मनोलय आरंभ होकर, वे विश्‍वमन के विचार ग्रहण कर पाते हैं । जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर महर्लोक में स्थान प्राप्त होता है ।
बाईं ओर से श्रीमती उषा रखेजा, श्रीमती शकुंतला
किंगर, पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे एवं श्रीमती कुसुम कुलश्रेष्ठ
   फरीदाबाद (हरियाणा) - ११.२.२०१५ को सनातन के संत पू. पिंगळेजी ने फरीदाबाद केंद्र के साधकों की व्यष्टि साधना के संदर्भ में बैठक ली । उसमें श्रीमती कुसुम कुलश्रेष्ठ से जब पूछा गया कि वे ६० प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त करने में कहां कम पडती हैं, तो उन्होंने कहा कि वे चिडचिडापन, इस दोष पर नियंत्रण पाने में कम पडती हैं । इसपर पू. पिंगळेजी ने कहा कि साधना के प्रति उनके इस खेद और आंतरिक साधना के कारण ही उनका आध्यात्मिक स्तर ६१ प्रतिशत हो गया है । उनमें अंतर्मुखता, सेवा के प्रति तत्परता, दूसरों का विचार करना, ये गुण भी हैं ।

सनातन-निर्मित ग्रंथसंपदा के प्रति अनन्य भाव रखनेवाले तथा धर्मजागृति की तीव्र लगनवाले असम के धर्माभिमानी श्री. अंजनज्योति बरुआजी !

 श्री. अंजनज्योति बरुआजी
१. हिन्दुत्ववादियों से संपर्क करवाने के लिए अपना समय देना
    मुझे असम के न तो मार्ग ज्ञात थे और न ही वहां की असमियां भाषा ! इसलिए, मैंने श्री. बरुआजी से पूछा, मुझे हिन्दुत्ववादियों से मिलने जाना है । क्या आप मेरे साथ चल सकते हैं ? तब वे सहर्ष तैयार हो गए ।
२. धर्मजागृति की तीव्र लगन
    सर्व हिन्दुत्ववादियों से संपर्क होने के पश्‍चात मैंने उनसे एक मंदिर में चलने की विनती की । मंदिर में देवता के दर्शन करने के पश्‍चात मैंने उनसे पूछा, आप गोवा के रामनाथी स्थित सनातन आश्रम में जाकर सनातन-निर्मित ग्रंथों का असमियां भाषा में अनुवाद करने की सेवा कर सकते हैं ? इसपर उन्होंने तुरंत हां कही । पहली ही बार मिलने पर सेवा के विषय में पूछने पर त्वरित किसी का हां कहना, यह मेरे लिए अद्भुत अनुभव था ।