धर्मजागृति, हिंदू-संगठन एवं राष्ट्ररक्षा हेतु साधकोंद्वारा साधनास्वरूप आर्थिक हानि सहते हुए भी चलाया जानेवाला एकमात्र मासिक !

अल्पसंख्यकोंके तुष्टीकरण हेतु देशप्रेमी सनातन संस्थापर प्रतिबंध लगानेका प्रयास करनेवाली हिंदूद्रोही कांग्रेस !

  सनातन संस्थापर जूनसे अक्टूबरकी अवधिमें प्रतिबंध लगनेकी संभावना  
नई देहली  - सनातन संस्थापर जूनसे अक्टूबरकी कालावधिमें कभी भी प्रतिबंध लगानेकी घोषणा केंद्र सरकार कर सकती है । इस विषयमें केंद्रीय गृहमंत्रालयके वरिष्ठ अधिकारियोंसे मिलनेपर उन्होंने कहा, निर्वाचनसे पूर्व (चुनावपूर्व) इस विषयमें हेतु पूर्वक चर्चा की जाएगी । उसमें यह देखा जाएगा कि अल्पसंख्यकोंके मत (वोट) सरकारके पक्षमें हैं अथवा नहीं । यदि अल्पसंख्यकोंके मत सरकारके पक्षमें होंगे, तो संभवत: सनातन संस्थापर प्रतिबंध लगाया जाएगा तथा सांप्रदायिक एवं लक्ष्यित हिंसा प्रतिबंधक कानून भी पारित होगा । 
- प.पू. डॉ. जयंत बाळाजी आठवले 

प्रतिबंधके पश्चात वार्षिक सदस्योंका सदस्यता शुल्क शुभचिंतक लौटाएंगे, यह विश्वास रखें !

    सनातन प्रभातपर प्रतिबंध लगनेपर पाठकोंकी सदस्यता शुल्ककी अग्रिम राशि उन्हें लौटा दी जाएगी । प्रतिबंध हटनेपर सनातन प्रभात पुनः प्रारंभ किया जाएगा । पाठको, हमने कभी अर्थलाभ हेतु सनातन प्रभातका उपयोग नहीं किया है ।
    हिंदुओंमें जागृति हो, हिंदू समाज बलसंपन्न बने एवं हिंदू राष्ट्रके (विश्वकल्याणार्थ कार्यरत सात्त्विक लोगोंद्वारा चलाए गए राज्यके) रूपमें लगनेवाला मधुर फल हिंदू समाज चख सके, यही हमारा उद्देश्य है । कांग्रेस सरकारके धर्मद्रोहके कारण लगाए जानेवाले प्रतिबंधको देखते हुए यह प्रकर्षसे बतानेकी इच्छा हो रही है कि अभीतक जो दृष्टिकोण सनातन प्रभातके माध्यमसे मिले हैं, उनके आधारपर हिंदू राष्ट्रकी स्थापना होनेतक मार्गक्रमण करें !
सनातन प्रभातके माध्यमसे अभी तक मिले दृष्टिकोणोंके आधारपर हिंदू राष्ट्र-स्थापना होनेतक मार्गक्रमण करें !
    कांग्रेस सरकार सनातन संस्था एवं सनातन प्रभात नियतकालिकोंपर प्रतिबंध लगाने हेतु अत्यंत उतावली हो गई है । सनातन प्रभातद्वारा हिंदू बंधुओंके लिए किए गए कार्यके कारण सहस्रों हिंदू बंधुओंकी व्यष्टि ही नहीं; अपितु समष्टि साधनाका प्रारंभ भी सनातन प्रभातके विचारोंसे होता है । प्रतिबंधके पश्चात विचारोंका यह प्रवाह खंडित हो जाएगा तथा सहस्रों हिंदू बंधुओंकी स्थिति भंवरमें फंसनेसमान दिशाहीन हो जाएगी ।

सनातनपर प्रतिबंध साधकोंकी परीक्षा ! ‘इदं न मम ।’ अर्थात ‘यह मेरा नहीं है’, वास्तवमें ऐसी वृत्ति निर्मित हुई है क्या ?

    हमें सदैव सिखाया जाता है, इदं न मम ।, अर्थात यह मेरा नहीं है । प्रत्यक्षमें हमें ऐसा लगता है क्या ?, हम इसका अभ्यास नहीं करते । अब हम प्रतिबंध लगनेके संदर्भमें तथा लगनेके उपरांत वह अभ्यास कर सकते हैं । प्रतिबंध लगनेपर सनातनके आश्रमोंका क्या होगा ? ग्रंथोंका तथा उत्पादोंका क्या होगा ?, ऐसा विचार हमारे मनमें आनेपर यह समझें कि हमें इसका विस्मरण हो गया है कि यह सब माया है । आश्रम तथा ग्रंथके संदर्भमें लगनेवाला ममत्व भले ही सात्त्विक हो, फिर भी वह माया ही है । सनातनपर प्रतिबंध लगनेसे यह  सीख सकते हैं । - प.पू. डॉ. जयंत बाळाजी आठवले  

गोवामें ६ से १० जून २०१३ तक ‘हिंदू राष्ट्रकी स्थापना हेतु द्वितीय ‘अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन’

हिंदुत्वनिष्ठोंके नामांकनका आरंभ !
    फोंडा (गोवा) - गोवामें ६ से १० जून २०१३ तक, हिंदू राष्ट्र एवं धर्मके लिए कार्यरत व्यक्ति (वक्ता, संपादक, लेखक, अधिवक्ता, धर्माचार्य) एवं हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंका द्वितीय ‘अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन होनेवाला है । इस अधिवेशनमें संपूर्ण भारतके २० राज्योंके साथ ही नेपालसे भी हिंदुत्वनिष्ठ सहभागी होनेवाले हैं । ५ दिन चलनेवाले इस अधिवेशनमें भारतभरसे ५०० हिंदुत्वनिष्ठोंकी उपस्थिति होगी । 
अधिवेशनके आयोजन हेतु धर्मदान करें !
    ऐसा अनुमान है कि अधिवेशनके लिए सभागृह, निवास, भोजन, प्रदर्शनी, स्मारिका, स्थानीय परिवहन इत्यादि हेतु लगभग २५ लाख रुपए व्यय होंगे । इस अधिवेशनके उपलक्ष्यमें ‘हिंदू जनजागृति समिति’द्वारा ‘स्मारिका’ प्रकाशित होगी । ‘हिंदू जनजागृति समिति’ने आवाहन किया है कि इस कार्यमें हिंदू शुभचिंतक अर्पणदाता धर्मदान करें । अर्पण देने हेतु ८४५१००६०७४ क्रमांकपर संपर्क  करें । समितिने सूचित किया है कि धनादेश ‘हिंदू जनजागृति समिति’के नाम स्वीकार किए जाएंगे ।

भारतके इस्लामीकरणके लिए मुसलमानोंको भडकाकर लोकतंत्र-व्यवस्थाको चुनौती देनेवाले विधायक अकबरुद्दीन ओवेसीकी विषैली फुफकार !

हिंदुओ, इसे पढकर एक तो हिंदू राष्ट्रकी स्थापना हेतु कटिबद्ध हों अथवा धर्मांधोंके हाथों मरनेकी प्रतीक्षा करें !
    ऑल इंडिया मजलिस इतेहाद-उल-मुसलमीन (एम्आयएम्) इस उग्र विचारधाराके मुस्लिम पक्षके विधायक अकबरुद्दीन ओवेसीने आदिलाबाद (आंध्रप्रदेश)में २४ दिसंबर २०१२ को सार्वजनिकरूपसे राष्ट्र्रद्रोही एवं हिंदूद्रोही फुफकार छोडी । ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यह सभा पाकिस्तानमें हो रही है । वे भारत को पाकिस्तान बनानेका निजामका स्वप्न साकार करनेके लिए देशकी लोकतंत्र व्यवस्थामें प्रवेश करनेके साथ-साथ अलोकतंत्र मार्गसे भी प्रयत्नरत हैं । १०० करोड हिंदुओंको १५ मिनटोंमें समाप्त करनेकी भाषा करनेवाले अकबरुद्दीन एवं उनका संगठन ‘एम्आयएम्’ सिमीके पथपर अग्रसर है । इनपर राजकीय स्वार्थवश कठोर कार्यवाही न होना, यह हिंदुओंके लिए घोर संकटका सूचक है । हिंदू समय रहते ही सजग हो जाएं, इस उद्देश्यसे प्रस्तुत लेखमें अकबरुद्दीनकी विषैली फुफकार संक्षेपमें उन्हीके शब्दोंमें प्रस्तुत कर रहे हैं ।

अकबरुद्दीन ओवैसी या जिन्नाका पुनर्जन्म?

    देश जब स्वतंत्रताकी देहरीपर खडा था, तब बैरिस्टर जिन्नाने हिंदू-मुसलमानोंके मनमें एक-दूसरेके प्रति घृणा फैलानेवाले तथा देशको बांटनेवाले अनेक सार्वजनिक भाषण किए थे । परिणामस्वरूप, देशका विभाजन हुआ । मजलिस इत्तेहाद-उल-मुसलमीन (एमआयएम) नामक हैदराबादस्थित उग्र विचारोंके मुस्लिम दलके विधायक अकबरुद्दीन ओवैसीका बैरिस्टर जिन्नाके पदचिन्होंपर चलनेका उतावलापन स्पष्ट दिखाई दे रहा है । विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी तथा उनके दलके देशद्रोही तथा हिंदूद्वेषी इतिहासके विषयमें भारतीय सेनाके सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर हेमंत महाजनका मराठीसृष्टि डॉट कॉम नामक सूचना जालस्थलपर प्रकाशित लेख हमारे पाठकोंके लिए संकलित कर प्रस्तुत कर रहे हैं ।

भाग्यनगरमें श्रीरामनवमीनिमित्त भव्य शोभायात्रा

३ लाख धर्माभिमानियोंका जनसागर, हिंदू जनजागृति समितिका सहभाग
ढकी हुई मस्जिद 
    भाग्यनगर (आंध्रप्रदेश) - भाग्यनगरमें श्रीरामनवमीके उपलक्ष्यमें प्रखर हिंदुत्वनिष्ठ नेता श्री. राजा सिंह ठाकुरके नेतृत्वमें इस वर्ष भी भव्य शोभायात्रा निकाली गई । हिंदुओंको समाप्त करनेकी भाषा करनेवाले मजलिस-ए-इत्तेहादूल- मुस्लमीन (एम्.आय.एम्.) के अकबरुद्दीन ओवैसीको उत्तर देनेके लिए ३ लाखसे भी अधिक हिंदू इस भव्य शोभायात्रामें सम्मिलित हुए थे । ३ कि.मी. से भी अधिक लंबी इस शोभायात्रामें विविध प्रकारके चित्ररथ, भव्य ध्वनिक्षेपक यंत्रणा, श्रीरामकी मूर्ति, भगवे झंडे, पताकाएं, माथेपर भगवे रूमाल, इन सभीसे  संपूर्ण वातावरण ही हिंदूमय हो गया था ।

दैनिक 'सनातन प्रभात'के गोवा-सिंधुदुर्ग संस्करणकी १४ वीं वर्षगांठ उत्साहपूर्वक संपन्न !

 रामनाथी  (गोवा) - राष्ट्र एवं धर्मके उत्थानके लिए प्रखर एवं निर्भीक लेखन तथा क्षात्रतेज सहित ब्राह्मतेजका जतन कर, गत १४ वर्षोंसे जटिल परिस्थियोंमें मार्गक्रमण कर रहे ‘दैनिक’ सनातन प्रभातके गोवा-सिंधुदुर्ग संस्करणकी १४ वीं वर्षगांठ १४ अप्रैलको मनाई गई । इसके साथ ही समाजको साधक-पुरोहित देनेवाली सनातनकी साधक-पुरोहित पाठशालाकी ५वीं वर्षगांठ थी । शंखनाद एवं श्री गणेशजीकी वंदनाके पश्चात सनातनके संत पू. बाबा (सदानंद) नाईकके करकमलोंसे दीपप्रज्वलन एवं साधक-पुरोहित पाठशालाके विद्यार्थियोंके वेदमंत्रपठनसे कार्यक्रमका आरंभ हुआ । इस अवसरपर महाराष्ट्रवादी गोमंतक पक्षके विधायक श्री. लवू मामलेदाजी, गोवंशरक्षा अभियान समितिके श्री. आनंद मयेकरजी एवं दैनिक तरुण भारतके श्री. सागर जावडेकरजी व्यासपीठपर उपस्थित थे ।

बलात्कारके विरोधमें संतप्त देहलीवासियोंका आंदोलन !

 बलात्कारियोंकी राजधानी बन गई है नई देहली ! : नई देहलीमें १ जनवरीसे ३१ मार्चके अंततक अर्थात तीन महिनोंमें ३९३ बलातकार हुए हैं ।
 लोगो, प्रत्येक समस्याके उपरांत ऐसे आंदोलन करके टहनियोंपर कुल्हाडी मारनेके स्थानपर समस्याओंके लिए उत्तरदायी राज्यकर्ताओंको ही मूलरूपसे उखाड फेंके  !
    नई देहली - ५ वर्षकी लडकीपर हुए अमानवीय बलात्कारके कारण देहलीके नागरिकोंमें रोष फैल गया । उन्होंने  १९ अप्रैलसे ही यहां आंदोलन आरंभ कर दिए ।
अब तो बलात्कारियोंपर कार्यवाही करनी चाहिए ! - सोनिया गांधी

काटजूद्वारा मुसलमान कैदियोंकी मुक्तताके लिए संगठनकी स्थापना !

भूतपूर्व न्यायमूर्ति काटजूकी मुसलमानसमर्थक मानसिकता उजागर !
    नई देहली - कारागृहमें रहनेवाले मुसलमान कैदियोंकी मुक्तिके लिए प्रेस काऊंसिल ऑफ इंडियाके अध्यक्ष भूतपूर्व न्यायमूर्ति मार्कडेय काटजूने संगठन स्थापित किया है । (भूतपूर्व न्या. काटजू अबतक हिंदू एवं उनके संगठनोंके विरोधमें जो वक्तव्य कर रहे थे, इस कृत्यसे उसके पीछेकी उनकी मानसिकता स्पष्ट हो गई है । देशके अल्पसंख्यक मुसलमान भारी संख्यामें अपराधी सिद्ध हुए हैं । जिहादी आतंकवादमें भी उनका ही समावेश है । ऐसी स्थितिमें उनकी मुक्तिके लिए प्रयास करना अर्थात अपराधियोंका समर्थन करना ही है । सर्वोच्च न्यायालयके एक भूतपूर्व न्यायमूर्तिद्वारा इस प्रकारका संगठन स्थापित किया जाना देशके लिए अत्यंत  लज्जाजनक है । इस कृत्यको ध्यानमें लेकर काटजूद्वारा अबतक घोषित परिणामोंका पुनरावलोकन किया जाना चाहिए । मुसलमान समर्थक कांग्रेसी राजनेता इस मांगको स्वीकार नहीं करेंगे । हिंदू राष्ट्रमें इन सभी अभियोगोंपर विचार किया जाएगा ! - संपादक)

वादग्रस्त वक्तव्य करनेवाले निवृत्त न्या. काटजूके विरुद्ध सनातन प्रभातके पत्रकारने प्रविष्ट की मुंबई उच्च न्यायालयमें याचिका !

   मुंबई (महाराष्ट्र) - इंडियन प्रेस काऊंसिल (भारतीय समाचारपत्र परिषद)के विधानमें उसके अध्यक्षको अध्यक्ष पदसे मुक्त करनेका प्रावधान ही नहीं है । इस त्रुटिका अनुचित लाभ उठाते हुए प्रेस काऊंसिलके अध्यक्ष निवृत्त न्यायमूर्ति मार्कडेय काटजू सदैव ही सार्वजनिकरूपसे संविधानबाह्य एवं वादग्रस्त वक्तव्य करते हैं । अतः, दैनिक सनातन प्रभातके मंत्रालयीन प्रतिनिधि एवं देशभक्त पत्रकार मंच, मुंबईके निमंत्रक श्री. अरविंद  पानसरेने १५ अप्रैलको आयोजित हुई पत्रकार परिषदमें मांग की थी कि प्रेस काऊंसिलका यह सदोष विधान निरस्त किया जाए । 

डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामीको हिंदू रत्न पुरस्कार

डॉ. प्रवीण तोगाडियासे  पुरस्कार स्वीकार करते हुए
डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामी (बाइं ओरसे दूसरे) एवं अन्य मान्यवर
नई देहली - हिंदू हेल्पलाईन नामक विश्व हिंदू परिषदकी शाखाद्वारा ३ मार्च २०१३ को हुए एक कार्यक्रममें जनता दलके अध्यक्ष डॉ. सुब्रह्मण्यम् स्वामीको हिंदू रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया । 

म्यानमारमें मुसलमानोंके दंगोंसे पीडित बौद्धपंथियोंने उन्हें जीवित जलाया !

१२ सहस्रसे अधिक मुसलमान लापता १ सहस्र ३०० से अधिक घर जलाए गए
    सिटक्वीन (म्यानमार) - २० मार्चको मेखटिला नामक नगरमें स्वर्णकारकी दुकानमें बौद्ध दुकानदार एवं मुसलमान ग्राहकमें अल्प वादविवाद हुआ । इस वादविवादका रूपांतर प्रचंड हिंसाचारमें हुआ तथा वह नगरमें फैल गया । (मुसलमान विश्वमें कहीं भी जाएं, अपनी जिहादी वृत्ति नहीं छोडते ! - संपादक) म्यानमारमें बौद्ध एवं रोहिंग्यो मुसलमानोंमें पुनः दंगे हो गए । कुछ महीनों पूर्व भी यहां ऐसे ही दंगे हुए थे । वर्तमान दंगेमें बौद्ध पंथियोंने लगभग ४३ मुसलमानोंको जीवित जला दिया । १ सहस्र ३०० से अधिक घर, दुकानें एवं मस्जिदोंमें आग लगा दी । इसलिए १२ सहस्रसे अधिक मुसलमानोंने घर छोडकर पलायन किया है ।

‘जमात-ए-इस्लामी हिंद'की ओरसे मुसलमान लडकियोंको जिहादका प्रशिक्षण !

सनातनपर प्रतिबंधकी मांग करनेवाले हिंदूद्वेषी क्या धर्मांध मुसलमान संगठनोंपर प्रतिबंधकी मांग करेंगे ?
    मुंबई (महाराष्ट्र) - मुंबईके ‘जमात-ए-इस्लामी हिंद’ संगठनकी शिक्षा संस्थादरा मुसलमान लडकियोंको जिहादका प्रशिक्षण दिया जा रहा है । (हिंदुओ, ध्यान दें, आपकी बहू-बेटियां ‘लव जिहाद’ की बलि चढ रही हैं, जबकि मुसलमान लडकियां जिहादी प्रशिक्षण प्राप्त कर, धर्मके लिए संघर्ष कर रही हैं । - संपादक)

मुसलमान युवकोंका स्वयं जिहादी आतंकवादी बननेकी ओर अधिकाधिक झुकाव !

    नई देहली - भारतमें सक्रिय जिहादी आतंकवादी संगठनोंको जिहादी आतंकवादी कृत्योंके लिए मुसलमान युवक ढूंढने हेतु अधिक श्रम नहीं करना पडेगा । वर्तमानमें धर्मांध मुसलमान युवकोंके दल स्वयं आतंकवादियोंकी सहायताके लिए आगे आ रहे हैं ।  इन युवकोंके मनपर मुसलमानोंपर अत्याचार होनेकी भावना अंकित हो रही है । अत: वे स्वयं इन जिहादी संगठनोंकी ओर आ रहे हैं । (इस देशमें मुसलमानोंपर नहीं,  हिंदुओंपर अत्याचार हो रहे हैं । कांग्रेस सहित सर्वपक्षीय शासकोंमें मुसलमानोंके लिए सुख-सुविधाओंकी आपूर्तिके लिए  होड लगी  है ! - संपादक)

संजय दत्त बमविस्फोट प्रकरण !

संजय दत्तके दंडकी कालावधिमें मैं उसके चित्रपट नहीं देखूंगा - अभिनेता नाना पाटेकरकी तत्वनिष्ठ भूमिका !
     मुंबई (महाराष्ट्र) - वर्ष १९९३ के बमविस्फोटोंके समय अवैध शस्त्र अपने घर रखे थे । यदि उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिसको दे दी होती, तो २४८ लोगोंकी बलि न चढती । इस अपराधके लिए संजय दत्तको ५ वर्षका कारावास सुनाया गया था, जिसमेसे डेढ वर्षका दंड उसने भुगत लिया था । शेष दंड निरस्त करने हेतु चित्रपट जगत एवं काटजू जैसे लोगोंने रट लगा रखी है । मात्र अभिनेता नाना पाटेकरने इस विषयमें स्पष्टवादिता अपनाई है ।

कहते हैं, मुंब्रामें ७२ एकड भूमिपर अंतर्राष्ट्रीय स्तरका इस्लामिक रिसर्च सेंटर बने !

मुसलमानोंकी चापलूसी करनेका एक भी अवसर न छोडनेवाले विधायक जितेंद्र आव्हाड
    मुंबई (महाराष्ट्र) -  मुंब्रा-कळवा मतदारसंघमें सरकारकी ७२ एकड भूमि सांस्कृतिक केंद्रके लिए उपलब्ध है । इस भूमिका बाजारमूल्य  ७२० करोड रुपए है । राष्ट्रवादी कांग्रेसके विधायक जितेंद्र आव्हाडने विधानसभामें मांग की थी कि, ‘यहांपर देहलीके समान अंतर्राष्ट्रीय स्तरका इस्लामिक रिसर्च सेंटर बने । उस केंद्रमें उर्दू भाषा, संस्कृतिका संवर्धन एवं विकासको प्रोत्साहन दिया जाए ।’ (सभागृहमें ९० प्रतिशतसे अधिक हिंदू विधायक होते हुए भी किसीको भी यह नहीं लगता कि हिंदुओंके लिए भव्य सांस्कृतिक केंद्र बने । हिंदुओ, आगामी चुनावोंमें मत मांगने आनेवाले प्रत्येक प्रत्याशीसे इस संदर्भमें स्पष्टीकरण मांगें ! - संपादक)  वर्ष २०१३-२०१४ के वार्षिक अर्थसंकल्पपर सर्वसाधारण चर्चामें आव्हाड बोले, ‘इस संदर्भमें बार - बार पूछताछ करनेपर भी सरकार तथा वित्तमंत्रीसे प्रतिसाद नहीं मिल रहा है । इस संदर्भमें यह परियोजना बनेगी अथवा नहीं तथा उसके लिए निधि कितनी मिलेगी, इसका उत्तर वित्तमंत्री दें ।’ (मुसलमानोंके एकत्रित मतोंके लिए उनकी चापलूसी करनेवाले स्वार्थी जितेंद्र आव्हाड ! - संपादक)

होलीपर धर्मांध मुसलमानोंद्वारा हिंदू युवकोंको बेदम मारापीटा !

हिंदुओ, आप भारतमें रहते हैं कि पाकिस्तानमें ?
    मुंबई (महाराष्ट्र) - धूलिवंदनके अवसरपर घाटकोपर (पश्चिम)के धर्मवीर संभाजी चौकमें सलीम शेखको उद्दंड आचरणके कारण श्री. रतन गेंगजे नामक हिंदू युवकने फटकारा था । इस प्रकरणमें गेंगजेसे प्रतिशोध लेनेके लिए शेखने २० से २५ मुसलमान युवकोंको बुलाकर गेंगजेके पारशीवाडी स्थित घरके सामने ही अत्यंत ही अमानवीय ढंगसे उसकी पिटाई की । उसे बचाने आए उसके सहयोगियोंको भी मुसलमानोंने पीटा । इससे पूर्व इस परिसरमें हिंदू युवकोंद्वारा लगाए गए भगवे झंडे मुसलमान युवकोंने बलपूर्वक उतारे एवं उनपर कालिख पोत दी थी । (हिंदुओ, अब तो इन ढीठ एवं क्रूर धर्मांधोंको सबक सिखानेके लिए हिंदू राष्ट्रकी स्थापनाका प्रण करें !  - संपादक) गंभीररूपसे घायल हिंदुओंको राजावाडी चिकित्सालयमें भरती किया गया ।
    तदुपरांत स्थानीय हिंदू चिरागनगर पुलिस थानेमें परिवाद प्रविष्ट करने गए । परंतु, वहां एक मुसलमान मंत्रीके दबावमें आकर  पुलिसने मुसलमानोंके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट करनेमें टालमटोल की ।

हिंदुओंद्वारा विरोधके पश्चात भगवान श्रीराम एवं हनुमानजीका अश्लील छायाचित्र जालस्थलसे हटाया !

    वॉशिंटन (अमेरिका) - यहांके `एटलांटिक वक्र्स गैलरी’ कलादालनके जालस्थल (वेबसाइट)पर प्रभु श्रीराम एवं हनुमानजीका समलिंगी संबंध दर्शानेवाला छायाचित्र प्रदर्शित किया गया था । इस छायाचित्रके माध्यमसे हिंदुओंकी धार्मिक भावनाएं आहत हुइं एवं हिंदुओंद्वारा तीव्र शब्दोंमें निषेध व्यक्त करनेके पश्चात यह अश्लील छायाचित्र जालस्थलसे हटाया गया ।
    शेला होर्विट्ज नामक चित्रकारद्वारा यह अश्लील चित्र रेखांकित किया है । अपने छायाचित्रका वर्णन करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रयोगशालामें दर्शाया गया बंदर हिंदुओंके भगवान हनुमान हैं ।

कर्नाटकमें मद्यालयोंको देवताओंके नाम देनेपर प्रतिबंध !

कर्नाटककी भाजपा सरकारका विलंबसे; किंतु प्रशंसनीय निर्णय !
    बेंगलुरू (कर्नाटक) - राज्यके मद्यालयोंको देवी-देवताओंके नाम देनेपर तथा मद्यालयोंके नामफलकोंपर (बोर्डपर) देवी-देवताओंके चित्र लगानेपर प्रतिबंध लगानेका निर्णय राज्यके आबकारी विभागने लिया है । फलकपर लगे चित्र हटाने हेतु कर्नाटक उच्च न्यायालयमें जनहित याचिका प्रविष्ट की गई थी । इस पाश्र्वभूमिपर जनमानसकी धार्मिक भावनाओंका आदर करने हेतु देवी-देवताओंके चित्र हटानेका निर्णय आबकारी विभागने लिया है । (धर्माभिमानी हिंदुओंकी मांग है कि कर्नाटक सरकारद्वारा लिए गए इस निर्णयसमान देशके अन्य राज्य भी निर्णय लेनेमें विलंब न करें ! - संपादक)

बिजनेस टुडे पाक्षिकाद्वारा श्री विष्णुका अनादर !

    मुंबई - ‘बिजनेस टुडे’, इस अर्थविषयक अंग्रेजी पाक्षिककी वर्तमान प्रतिमें क्रिकेट खिलाडी महेंद्र सिंह धोनीपर विशेष लेख प्रकाशित किया गया है । लेखका शीर्षक है ‘गॉड ऑफ बिग डील्स’ । उसके अनुरूप मुखचित्र बनाया है । मुखचित्रमें धोनीको श्रीविष्णुके रूपमें दिखाया गया है । उनके प्रत्येक हाथमें उस आस्थापनके उत्पादोंके विज्ञापन दिखाए गए हैं, जिनके लिए धोनी विज्ञापन कर रहा है ।

फेसबुकपर देवताओंके अश्लील चित्र !

मेरठमें हिंदुओंकी ओरसे आरोपपत्र प्रविष्ट; कार्यवाहीमें पुलिसद्वारा किए गए विलंबके कारण हिंदुओंका आंदोलन !    
 लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) - उत्तरप्रदेशके मेरठमें ‘ फेसबुक’ पर हिंदुओंके देवी-देवताओंके अश्लील चित्र रखनेसे ४ अप्रैलको तनाव उत्पन्न हुआ । हिंदुओंने आरोप  लगाया कि संबंधित व्यक्तियोंपर कार्यवाही करनेमें पुलिस आनाकानी कर रही है ।  (मुसलमानोंके श्रद्धास्थानोंका अवमान होनेपर आरोपपत्र प्रविष्ट होनेकी प्रतीक्षा करनेसे पूर्व ही पुलिस तत्परतासे उसके विरोधमें कार्यवाही करती है ! - संपादक)

पुलिस थानोंमें देवताओंके चित्र, मूर्ति आदि रखकर पूजा करनेपर प्रतिबंध

पुलिस थानोंमें देवताओंके चित्र एवं मूर्ति रखकर पूजा करनेपर प्रतिबंध लगाया है । यह योग्य ही हुआ, वैसे भी भ्रष्ट पुलिस- कर्मियोंके पास रहना ईश्वरको भाएगा क्या ?
    पुलिस आयुक्त डॉ. सत्यपाल सिंहने एक परिपत्रकद्वारा मुंबईके ९२ पुलिस थानोंमें हिंदू देवताओंके चित्र तथा मूर्ति रखकर पूजा करने हेतु प्रतिबंधित किया है । परिपत्रकमें कहा गया है कि इन नियमोंका उल्लंघन करनेवालोंपर कार्यवाही की जाएगी । मुसलमानोंके लिए एक नियम, तो हिंदुओंके लिए दूसरा नियम लागू करनेवाले अधिकारी ! : कुछ वर्षपूर्व मुंबईमें स्थित महाराष्ट्र राज्यके मंत्रालयमें ७ वें मालेपर मुसलमानोंको नमाजपठनके लिए विशेष मंडप लगाया गया था । उसपर किसी भी प्रकारकी कार्यवाही करनेका आदेश राजनेताओं तथा प्रशासनद्वारा नहीं दिया गया था । विधानसभामें शिवसेनाके विधायकोंने यह प्रसंग उजागर किया था तथा मुसलमानप्रेमी कांग्रेसी राजनेताओंको उसपर कार्यवाही करने हेतु बाध्य किया था; परंतु हिंदुओंके विषयमें वरिष्ठ अधिकारी स्वयं ही चित्र एवं मूर्ति न रखनेका आदेश देते हैं !

प.पू. आसारामजीबापूका केंद्र बंद करने हेतु कांग्रेसके विद्यार्थी संगठनके मुसलमान सचिव-सहित कार्यकर्ताओंद्वारा धमकी !

पुणे (महाराष्ट्र) - यहां पानीका प्रयोग कर होली खेलनेका कारण बताते हुए कांग्रेस प्रणीत नेशनल स्टूडेंन्ट्स यूनियन आफ इंडियाके महाराष्ट्र प्रदेश सचिव अमीर शेखके नेत्तृत्वमें रास्ता पेठ स्थित प.पू. आसाराम बापूजीके केंद्रमें जाकर साधकोंको धमकी दी तथा अत्यंत असभ्य भाषामें साधकोंको अपशब्द कहे । उन्होंने प.पू. बापूजीके विरोधमें नारे लगाए । (हिंदुओ, कोल्हापुरमें इज्तेमा कार्यक्रममें मुसलमानोंने १० लाख लीटर पानीका अपव्यय किया ।  हिंदू पदाधिकारी कभी मुसलमानोंके मौलवियोंके विरोधमें आंदोलन करते हैं क्या ? - संपादक)

प्राणार्पण कर ग्रंथरूपी राष्ट्र्रीय अस्मिताकी रक्षा करनेवाले भारतीयोंके प्रति हिंदुओंमें अभिमान जागृत होगा क्या?

    ‘छठी शताब्दीमें चीनी यात्री हुसेन त्संग धर्मभूमि भारतका दर्शन करने हेतु गैबी मरुस्थल पार कर, भारत आए थे । बौद्ध तीर्थक्षेत्रोंमें भ्रमण करते-करते बिहारके नालंदा विश्वविद्यालयमें आकर उन्होंने भारतीय परंपरा, समाज एवं कला इत्यादिका कुछ वर्ष अध्ययन किया ।  नालंदा विश्वविद्यालयसे बिदा होते समय उन्हें ४०० दुर्लभ ग्रंथ एवं १५० नयन मनोहर बुद्ध प्रतिमाएं भेंटस्वरूप प्राप्त हुइं । 
    स्वदेश लौटते समय उनके साथ कुछ भारतीय विद्यार्थी थे । सिंधु नदी पार करते समय उन्होंने भारतमाताको प्रणाम किया । जिस नावमें वे तथा भारतीय विद्यार्थी बैठे थे । वह नाव महासागरमें आनेपर दोलायमान होने लगी । उसी समय भयंकर तूफान प्रारंभ हो गया । नाव किस समय डूब जाएगी यह बताया नहीं जा सकता था । ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगीं । नाविक चिल्लाकर कहने लगा ‘‘नाव हलकी करनी पडेगी । ग्रंथ तथा मूर्तियां पानीमें फेंक दें ।’’ नाविक ये अनमोल ग्रंथ एवं मूर्तियां सागरकी लहरोंमें फेंक देगा, यह आभास होते ही भारतीय संस्कृतिके उपासक सभी विद्यार्थी उसी क्षण बोले, ‘भारतभूमिकी यह दुर्लभ ज्ञान संपत्तिको समुद्रमें फेंकना हम कदापि सहन नहीं करेंगे ।’

हिंदूबहुल हिंदुस्थानमें ही हिंदुओंकी संतान मदरसोंमें शिक्षा ग्रहण कर रही है !

हिंदुओ, जागृत हों !
      हिंदूद्रोही कांग्रेस आर्थिकदृष्टिसे पिछडे हिंदुओंको  बाध्य कर रही है कि वे अपनी संतानको मदरसोंमें पढाएं । ये मदरसे इन निर्धन हिंदुओंकी संतानको शिक्षाके साथ ही दो समयका भोजन तथा निवासकी सुविधाएं देते हैं । यदि यह सब ऐसे ही चलता रहा, तो कल इन्हीं मदरसोंसे ‘धर्मांतरित मुसलमान’ बाहर निकलेंगे, जो अफजलखानके वंशजोंसे भी कट्टर होंगे ।अपने ही निर्धन हिंदू बंधुओंपर इस प्रकारके दिन आने देना, शेष हिंदुओंके लिए लज्जाजनक बात है ।

ब्रिटिशोंद्वारा मेकालेसे पूर्व भारतीय शिक्षाप्रणाली ब्रिटेनमें क्रियान्वित करनेका प्रयास

  ‘हम देखते हैं कि कक्षाप्रमुख, तख्ती (ब्लैक बोर्ड) तथा गुटचर्चा इन संकल्पनाओंको आधुनिक शिक्षापद्धतिमें अत्यधिक महत्त्व है; परंतु ये संकल्पनाएं मूलतः कहांसे आई हैं ? ये संकल्पनाएं भारतीयोंकी हैं । वर्ष १६२३ में ‘पेट्रो डेला वाले’ नामक एक यात्री भारतमें आया था । उसने यहांकी शिक्षाप्रणाली देखी । उसने इन सर्व व्यवस्थाओंका वर्णन लिखा है ।  वर्ष १८०० के लगभग ईस्ट इंडिया कंपनीके डॉ. बेल एवं  लॅकेस्टरने ब्रिटेनमें कक्षाप्रमुख तख्ती एवं गुटचर्चा जैसी शिक्षा संकल्पनाएं क्रियान्वित करनेका प्रयास किया । उनमें झगडा हुआ कि यह श्रेय किसका है ? तत्पश्चात इस झगडेकी पूछताछसे निष्पन्न हुआ कि मूलतः यह सर्व श्रेय भारतीयोंका है । उस समय ईस्ट इंडिया कंपनीके एक अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल एलेक्जेंडर वॉकरने लिखकर रखा  है, `मलबारके भारतीय ब्राह्मणोंकी पद्धतियां अवर्णनीय हैं ।

भारतमें आए पाकके ४८० हिंदू भारतमें ही रहनेके इच्छुक !

    नई देहली - कुंभमेलेके लिए पाकसे आए ४८० हिंदू एक माहके वीसापर आए हैं, जिसकी अवधि ८ अप्रैलको समाप्त हो चुकी है । इनमें ५ माहकी बालिकासे लेकर ११० वर्षकी वृद्धाका समावेश है । उनका कहना है कि पाकमें अपमानजनक जीवन जीनेसे यहांकी अडचनें अच्छी हैं । भारतके क्रिकेट जीतनेपर हमपर क्रोध निकाला जाता है । हमारी बेटियोंको अपहरण कर लिया जाता है । बेटियोंका अपहरण टालनेके छोटेपर ही इनका विवाह करना पडता है । पाकमें हमें शिक्षाका अधिकार नहीं है । (कहां पाकमें हिंदुओंकी यह दयनीय अवस्था, तो कहां भारतके मुसलमानोंपर होनेवाली सुख-सुविधाओंकी बौछार ! हिंदुओ, यह यह स्थिति कब परिवर्तित करेंगे ? - संपादक)
हिंदुओ, बलशाली हिंदुत्ववादी संगठन इस विषयमें कुछ नहीं करेंगे; अत: आप ही अपने हिंदू बंधुओंकी सहायता करें !

प.पू. आसारामजी बापूकी होलीके कारण करोडों रुपयोंकी बचत

प.पू. आसारामजी बापू
    नई मुंबई - योग वेदांत समितिने जानकारी दी है कि रंगपंचमीको रासायनिक रंगोंसे होली खेलनेपर, इन रंगोंको धोनेके लिए प्रत्येक व्यक्तिको ३५ से २०० लीटर जलकी आवश्यकता पडती है । जबकि  प.पू. आसारामजी बापूकी होली आयुर्वेदिक रंगोंकी होती है । विदेशी रासायनिक प्रतिष्ठानोंके माध्यमसे विदेशमें जानेवाले करोडों रुपए प.पू. बापूजीकी होलीके कारण बचते हैं । समितिने यह भी कहा है कि प.पू. बापूजीने आयुर्वेदिक औषधियोंसे युक्त केवल एक टैंकर पलाशके फूलोंसे युक्त जलका उपयोग किया था, जिसमें विद्यमान औषधि तत्त्व त्वचाके लिए लाभदायी हैं ।

ज्ञानका अर्थ क्या है ?

    ‘भारतीयोंने ज्ञानकी व्याख्या इस प्रकारसे की है, ‘ ज्ञान, वह है जो भ्रम, अर्थात आवरण हटाता है ।’ खरे ज्ञानका अर्थ है, आत्मज्ञान । एक बार वह हो जाए, तो हमें विश्वके सभी विषय समझ आते हैं; इसलिए विश्वके अनुभवी ज्ञानसे अपने आत्मज्ञानको प्रकट करनेके लिए उस ज्ञानका उपयोग करते हैं ।’ - प.पू. परशराम माधव पांडे, सनातन आश्रम, देवद, पनवेल.
विद्यादेवी श्री सरस्वती    
बुद्धिद्वारा जो ग्रहण किया उसे शब्दबद्ध करनेका कार्य श्री सरस्वती देवीका है । श्री सरस्वती देवीको संत ज्ञानेश्वरने ‘अभिनव वाग्विलासिनी’ तथा श्री समर्थ रामदासस्वामीने ‘शब्द मूल वाग्देवी’ कहा है ।वह विद्याकी देवी हैं । श्री सरस्वती देवीको शारदा देवी भी कहते हैं । शारदा अर्थात ज्ञानको आधार देनेवाली । इस देवीकी साडीका रंग लालिमा लिए हुए गुलाबी होता है । विद्या प्राप्ति हेतु श्री सरस्वतीदेवीकी उपासना, प्रार्थना आवश्यक होती है ।

शिक्षा

 शिक्षाका अर्थ क्या है ? 
१. ‘अच्छा तथा बुरा जाननेकी बुद्धि जिस ज्ञानसे होती है, वह शिक्षा है । केवल पदवी  प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है ! जिस शिक्षासे हमारे स्वभावदोष जाते हैं, उसे ‘शिक्षा’ कहते हैं । इस ‘शिक्षा’को अपने आचरणमें लाना, अर्थात साधना करना ! अत: साधना ही खरी शिक्षा है ।’  - प.पू. पांडे महाराज
२. ‘ऊर्जा देकर प्रगल्भ शक्ति जागृत करना तथा उसे प्रेरणा देना ही शिक्षा है ।’ - प.पू. पांडे महाराज (मार्च २०१०) 
३. ‘जो शिक्षा मनुष्यको ईश्वरप्राप्ति करना सिखाती है तथा जन्म-मृत्युके फेरेसे सदाके लिए छुटकारा दिलाती है’, वही खरी शिक्षा है । वर्तमानमें सनातन संस्था यह शिक्षा अखिल मानवजातिको प्रदान कर रही है ।’ - श्रीमती राजश्री खोल्लम (निज वैशाख शु. त्रयोदशी/चतुर्दशी, कलियुग वर्ष ५११२ (२६.५.२०१०))

हिंदुओ, यह अभिमानास्पद वास्तविकता जानिए !

ब्रिटिशपूर्व कालमें भारत ज्ञानार्जनके अर्थात शिक्षाके शिखरपर होना 

    हिदुओं जितना शिक्षाका तीव्र भान विश्वके किसी भी लोकमें नहीं, अठारहवीं शाताब्दीके ब्रिटिशोंका ब्यौरा : ‘भारतकी ब्रिटिशपूर्व कालकी शिक्षा उत्कर्ष करनेवाली थी । इस विषयमें यूरोपियन यात्री तथा राज्यकर्ताओंकी निःसंदिग्ध साक्ष्य है । रामस्वरूपजीने अपने Education System during Pre-British Period नामक शोध-निबंधमें भी चर्चा की है ।’
अ. ‘बिटिशपूर्व कालमें भारत ज्ञानार्जनके अर्थात शिक्षाके शिखरपर था । एशिया तथा यूरोपमें अग्रणी था । उस कालमें भारतमें कोई भी निरक्षर नहीं था । इसका प्रमाण है मेगोस्थेनिस (ईसा पूर्व ३०२), भारतका यात्री, जो यहांकी शिक्षासे बहुत प्रभावित हुआ था । मेगोस्थेनिस चंद्रगुप्तका दरबारी था, वह भारतके ज्ञान एवं शिक्षाकी बहुत प्रशंसा करता था ।

हिंदुओंकी गुरुकुल शिक्षापद्धति नष्ट कर अंग्रेजोंकी प्रशंसा करनेवाले कांग्रेसके अतिनीच ऊर्जामंत्री !

‘प्राचीन भारतमें  हिंदू विद्या एवं विद्यादानका अत्यंत आदर करते थे, इसके साक्षी यूरोपीय राज्यकर्ता तथा व्यापारी साक्षी हैं । फ्रा पावलिनो द बार्तोलोमिओने बहुत समय पूर्व भारतकी तत्कालीन शिक्षापद्धतिपर अपना मत व्यक्त किया था ।  ऑस्ट्रियामें जन्मे बार्तोलोमिओने १४ वर्ष (१७७६-१७८९) भारतमें व्यतीत किए थे । बार्तोलोमिओने कहा है, ‘मुझे ऐसा दिखाई दे रहा है  कि ईसाका जन्म होनेसे २०० वर्ष पूर्व भारतमें लेखन एवं सिखानेकी पद्धति विकसित हो चुकी थी तथा वह अभीतक उपयोगमें लाई जा रही है ।’ (संदर्भ : ‘हिंदुइजम’, पू. रामस्वरूप गर्ग) फिर भी कांग्रेसके केंद्रीय ऊर्जामंत्री श्री. सुशीलकुमार शिंदेने व्यक्तव्य किया था कि, ‘१८५७ में एक ओर भारतभरमें ब्रिटिशोंके विरोधमें विद्रोह चल रहा था; परंतु दूसरी ओर ब्रिटिशोंद्वारा भारतमें शिक्षाका पौधा लगाया गया । स्वतंत्रता आंदोलनके नेताओंने उस पौधेका रूपांतरण वटवृक्षमें किया । आज वह वटवृक्ष आधुनिक भारतको छाया दे रहा है ।’ 

हिंदू विद्यार्थियोंकी वैचारिक सोच दूषित करनेवाली एन्सीईआर्टी

 केंद्र शासनके अंतर्गत आनेवाला राष्ट्रीय शैक्षणिक संशोधन एवं प्रशिक्षण परिषद (एन्सीईआर्टी) इस मान्यताप्राप्त एवं प्रतिष्ठित संस्थाकी ओरसे माध्यमिक शिक्षाके लिए अभ्यासक्रम निर्धारित किया जाता है; परंतु एन्सीईआर्टीकी पुस्तकोंमें आगे दिए अनुसार हिंदुओंकी धर्मभावनाएं  आहत करनेका प्रयत्न किया गया है !
    भारतीय असंतोषके जनक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, योगी अरविंद घोष, सरदार भगतसिंह, रासबिहारी बोस, सुभाषचंद्र बोस तथा खुदीराम बोसका उल्लेख ‘आतंकवादी’के रूपमें करना 

मेकालेकी प्रतिज्ञा एवं अध्ययनपद्धतिका परिणाम

१.  भारतपर अपना प्रभुत्व बनानेके लिए वहांकी पारंपरिक शिक्षाप्रणाली तथा संस्कृतिमें परिवर्तन कर भारतीयोंको अंग्रेजीका दास बनाने हेतु मेकालेद्वारा प्रस्तुत सूचना : ‘मैंने संपूर्ण भारत देशमें भ्रमण किया है; परंतु मुझे इस देशमें एक भी भिखारी अथवा चोर दिखाई नहीं दिया । मैंने इस देशमें इतनी संपत्ति, इतने उच्च तात्त्विक विचार, इतनी अच्छी मनोभूमिकाके लोग देखे हैं कि मुझे लगता है कि ‘जब तक हम इस देशकी रीढ अर्थात आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संपत्ति नष्ट नहीं करते, तबतक हम इस देशपर विजय प्राप्त नहीं कर सकते ।’ इसलिए मेरी यह सूचना है कि हमें भारतीयोंकी पारंपरिक शिक्षाप्रणाली एवं उनकी संस्कृतिमें परिवर्तन करना चाहिए, जिससे वे यह समझने लगें कि जो अंग्रेजी एवं विदेशी है, वह अच्छा है तथा हमारी अपेक्षा अधिक महत्त्वपूर्ण है तथा उन्हें आत्मसम्मान, स्वयंकी संस्कृतिका विस्मरण हो जाएगा । वे हमारे रंगमें रंग जाएंगे अर्थात हमारी संस्कृतिसे अंकित एक राष्ट्र !’ - लॉर्ड मेकाले (ब्रिटिश लोकसभामें दिया गया भाषण, २.२.१८३५)

मेकालेकी शिक्षाप्रणाली क्रियान्वित करनेवाले राजनेताओंके कारण हुआ भयावह अधःपतन !

    ‘देशकी सभी नौकरियां अंग्रेजी विद्यालयमें पढे हुए ५ प्रतिशत चरित्रहीन लोगोंके लिए हैं । इसी शिक्षाप्रणालीके कारण संपूर्ण देश चरित्रहीन बन गया है । मेकालेकी शिक्षाप्रणाली देशकी नई पीढीको चरित्रहीन बना रही है । आपने समाचारपत्रोंमें पढा ही होगा कि महानगरके ‘फैशन शो’में अभिनेता अक्षयकुमारने मंचपर (रैंपपर) पदन्यास करते हुए चलनेपर प्रकाशपुंजके गोलमें खडे होकर एक सभ्य एवं शिक्षित महिलासे जीन्सका बटन खुलवाया था । इस प्रकार सबके सामने स्वयंकी जीन्सका बटन खुलवानेके लिए इस खिलाडी कुमारने सवा करोड रुपये वसूल किए थे । ऐसे चरित्रहीन राष्ट्रमें आज हम जीवन यापन कर रहे हैं । ऐसी परिस्थितिमें निष्क्रिय य आर्य समाजकी घोषणा ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम् ।’ हास्यास्पद लगती है !’ - (आर्य नीति, १०.४.२००९)

आधुनिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक उन्नति

विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयसे जो शिक्षा प्रदान की जाती है, उससे बाह्य विश्वका ज्ञान प्राप्त होता है । इस ज्ञानके कारण मन अधिक परिपक्व बनता है, उदा. जब हमें ज्ञात होता है कि पृथ्वी सूर्यसे उत्पन्न एक छोटासा ग्रह है । वह विश्वके अनगिनत ग्रह-तारोंमें से एक छोटासा ग्रह है, तब हम समझ जाते हैं कि विश्वमें हमारा अस्तित्व तथा महत्त्व नगण्य है । नोबल पारितोषिक विजेता आईन्स्टाईनको जीवनके अंतमें ज्ञात हुआ कि एक, दो वैज्ञानिक आविष्कारोंमें उनका जीवन व्यर्थ हो गया । यह भान होना आध्यात्मिक उन्नतिकी दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण स्तर है; क्योंकि इस कारण व्यक्तिका अहंकार नष्ट हो जाता है ।

हिंदू राष्ट्रकी स्थापना हेतु गोवामें द्वितीय अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशनका आयोजन

आदरणीय हिंदू-राष्ट्रप्रेमियो,
सविनय प्रणाम ।
    मैं आशा करता हूं कि ६ से १० जून २०१३, इस अवधिमें गोवामें होनेवाले द्वितीय ‘अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन’का निमंत्रण आपको प्राप्त हो ही गया होगा । आपमें से कुछ लोगोंने इस निमंत्रण-पत्रको तत्काल स्वीकार कर अधिवेशनमें आनेके लिए अपने नाम हमें भेज दिए हैं । आपमेंसे जो अपना नाम प्रविष्ट नहीं करवा पाए हैं, उनके लिए इस पत्रके साथ ‘संगणकीय प्रपत्र (फॉर्म)’ (गुगल फॉर्म) भेज रहे हैं । यह संगणकीय प्रपत्र १ जून २०१३ तक www.HinduJagruti.org इस सूचना जालस्थलपर (वेबसाइटपर) भी उपलब्ध रहेगा ।

अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशनकी संभाव्य रूपरेखा

प्रथम दिवस - ६.६.२०१३
१. अधिवेशनका उद्देश्य : पू. (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक हिंदू जनजागृति समिति
२. हिंदू राष्ट्रकी स्थापना एवं हिंदू संगठन
३. गत वर्षके कार्यका प्रांतीय एवं संगठनात्मक स्तरपर विवरण
४. भोजशाला मुक्ति आंदोलन - अनुभव-कथन सत्र
५. चर्चासत्र : ‘लोकसभा चुनाव - २०१४ में हिंदुत्वनिष्ठोंकी रणनीति कैसी हो ?

हिंदू जनजागृति समिति समर्थित आगामी ग्रंथ

अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन २०१२ में उपस्थित हिंदुत्वनिष्ठ मान्यवरोंके राष्ट्र एवं धर्मजागृतिपर प्रेरणादायी मार्गदर्शन !
 भाग १ : हिंदू राष्ट्र-स्थापना
भाग २ : राष्ट्रीय समस्याएं एवं उपाय
भाग ३ : हिंदू धर्मपर आघात एवं उपाय

अपनी मांग आज ही कीजिए !
इस ग्रंथमें प्रस्तुत हिंदुत्वनिष्ठ मान्यवरोंके भाषण पढकर राष्ट्र एवं धर्मकी रक्षा हेतु हिंदू क्रियाशील बनें तथा ‘हिंदू राष्ट्र’की स्थापनाके ऐतिहासिक कार्यमें योगदान दें !
    उपरोक्त ग्रंथोंकी मांग स्थानीय वितरकोंसे करिए । पाठक इस ग्रंथकी मांग हेतु पृष्ठ २ पर दिए अपने निकटवर्ती केंद्रसे संपर्क  करें । इन ग्रंथोंके लिए आप विज्ञापन दे सकते हैं अथवा इन्हें प्रायोजित भी कर सकते हैं ।

भगवान परशुराम जयंती


    वैशाख शुक्ल तृतीयाकी परशुराम जयंती एक व्रत एवं उत्सवके रूपमें मनाई जाती है ।
    ‘भृगुवंशके परशुराम वेदर्षि जमदग्नि एवं इक्ष्वाकू वंशकी राजकन्या रेणुकाके पुत्र थे । अतः ब्रह्मवर्चस एवं क्षात्रतेजसे उद्दीप्त वंशमें परशुरामका जन्म हुआ । परशुराम शंकरको प्रसन्न करनेके लिए तपश्चर्या करने गए । उन्होंने अपनी असीम भक्तिसे शिवजीको प्रसन्न कर लिया । इसीलिए शिवजीने उन्हें दिव्य अस्त्रोंके साथ-साथ अपना अजेय एवं अभेद्य परशु त्र्यंबकदंड देते हुए आदेश दिया, `जाओ आततायी, अनन्य अनाचारी, अत्याचारी, आतंकवादी, आसुरी एवं मदांधोंसे पृथ्वीको मुक्त करो ।’ अतः वाल्मीकिने इसे ‘क्षत्रविमर्दन’ न कहकर ‘राजविमर्दन’ कहा है ।

साढे तीन मुहूर्तोंमेंसे एक अक्षय तृतीया

वैशाख शुक्ल पक्षकी तृतीयाको अक्षय तृतीया कहते हैं । साढे तीन मुहूर्तोंके अंतर्गत अक्षय तृतीया, संवत्सरारंभ (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) एवं दशहरा, प्रत्येकका एक दिन एवं बलिप्रतिपदाका आधा दिन, इस प्रकार वर्षभरमें साढे तीन दिनोंके मुहूर्त होते हैं । इन दिनोंपर शुभकार्यके लिए मुहूर्त देखनेकी आवश्यकता नहीं होती; क्योंकि इन विशिष्ट दिनोंका प्रत्येक क्षण ही मुहूर्त होता है ।

‘राष्ट्रवादके महानतम पुरोधाओंमें एक' - बिपिनचंद्र पाल

   बिपिनचंद्र पाल एक राष्ट्रभक्त होनेके साथ-साथ एक उत्कृष्ट वक्ता, लेखक एवं आलोचक थे । ‘राष्ट्रवादके महानतम पुरोधाओंमें एक' इस प्रकारसे वर्णित बिपिनचंद्र पाल, भारतके राजनैतिक इतिहासमें लोकमान्य तिलक तथा लाल लाजपत रायके कारण स्वतंत्रता संग्रामसे जुड गए थे । उन्होंने साहस, सहयोग एवं त्यागद्वारा संपूर्ण राजनैतिक स्वतंत्रताकी मांग की । गांधीके राजनीतिमें आनेसे पूर्व वर्ष १९०५ में ‘लाल बाल पाल’ यह पहला ऐसा क्रांतिकारी गुट था, जिसने बंगाल विभाजनके समय अंग्रेजी शासनके विरुद्ध आंदोलन छेडा । ‘लाल बाल पाल’की तिकडीने अंग्रेजी शासनके विरुद्ध मौलिक विरोध प्रदर्शन किया । अंग्रेजी वस्त्र एवं उनके द्वारा बनाई गई वस्तुओंका दहन एवं बहिष्कार करना, उनकी मुख्य गतिविधियां थीं । २० मईको इस महान क्रांतिकारीका स्मृतिदिवस है, इसके उपलक्ष्यमें उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम !

वटसावित्री

वटसावित्रीका यह व्रत निर्णयामतादि के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष त्रयोदशीसे ज्येष्ठ अमावस्यातक किया जाता है । महाराष्ट्रमें यह व्रत पूर्णिमापर किया जाता है । इसे ‘वटपूर्णिमा’ कहते हैं ।   
१. उद्देश्य : अपने पतिकी आयु बढे, अतः स्त्रियोंने यह व्रत आरंभ किया ।
२. सावित्रीका महत्त्व : भरतखंड की प्रचलित पतिव्रताओंमें सावित्री को आदर्श माना गया है । उसी प्रकार उन्हें अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी मानते हैं । प्रत्येक हिंदू पतिव्रताके हृदयमें अपना स्थान बनानेवाली सती सावित्रीको शतशः प्रणाम है ।

अखंड हिंदूराष्ट्रके प्रणेता : वीर सावरकर

 बाल्यवस्था एवं शिक्षा
    विनायक दा. सावरकरका जन्म नाशिक जनपदमें भगूर नामक एक छोटेसे गांवमें हुआ । सावरकरके घरका वातावरण धार्मिक था । उनके घरमें अष्टभूजाकी मूर्ति थी । बचपनसे ही वे उसका ध्यान करते थे । जन्मग्राममें प्राथमिक शिक्षा पूर्ण कर, माध्यमिक शिक्षाके लिए वे नाशिक आए ।

‘पुण्यश्लोक' अहिल्याबाई होलकर

    ३१ मईको अहिल्याबाई जयंती है । इस निमित्त प्रस्तुत है...
    मराठोंके इतिहासमें अनेक पराक्रमी सरदार हुए हैं । उनमेंसे होलकर घरानेकी अहिल्याबाई का नाम आज भी अनेकोंके मुखपर हैं । अहिल्याबाईको ‘पुण्यश्लोक' भी कहा जाता है; क्योंकि उन्होंने जो भी सामाजिक कार्य किए वे आज भी अनेकोंके लिए आदर्श हैं । भगवान शिवकी अखंड भक्ति, इंदौर राज्यका धर्मनिष्ठ शासन, प्रजापर मातृवत् प्रेम, दानवीरता एवं न्यायवृत्ति, इन गुणोंके कारण उनका संपूर्ण जीवन ही आदर्श है । उन्होंने मुगलोंद्वारा उद्ध्वस्त काशी, गया एवं गुजरातके सोमनाथ मंदिरका जीर्णोद्धार करनेके साथ ही अनेक तीर्थक्षेत्रोंमें मंदिर, धर्मशाला, घाट, अन्नछत्र एवं कुएं बनवाए ।

हिंदू जनजागृति समितिद्वारा प्रदर्शित विरोधके उपरांत दुर्गादेवीका नग्न चित्र कलादालनसे हटाया !

    मुंबई (महाराष्ट्र) - यहांके जहांगीर कलादालनमें आयोजित चित्रप्रदर्शनीमें श्री दुर्गादेवीके नग्न चित्र लगाए गए थे । हिंदू जनजागृति समितिकी श्रीमती वर्षा ठकार द्वारा उनका विरोध करनेपर ये चित्र प्रदर्शनीसे हटाए गए । (जो कार्य एक छोटी हिंदू जनजागृति समिति कर सकती है, वह कार्य बलाढ्य हिंदुनिष्ठ संगठन क्यों नहीं कर सकते ? समितिके कार्यको अध्यात्मिक अधिष्ठान होनेसे उसे निरंतर सफलता प्राप्त होती है । अन्य हिंदुनिष्ठ संगठनोंको भी अध्यात्मिक अधिष्ठान रखकर कार्य करना आवश्यक है ! - संपादक, दैनिक सनातन प्रभात)

‘खडकवासला जलाशय रक्षा अभियान'का सफल समापन !

हिंदुओ, इस सफलताके लिए भगवान श्रीकृष्णजीके चरणोंमें कृतज्ञता व्यक्त करें !
    खडकवासला (पुणे, महाराष्ट्र) - हिंदू जनजागृति समितिकी ओरसे प्रतिवर्ष चलाया जानेवाला खडकवासला जलाशय रक्षा अभियानको इस वर्ष भी १०० प्रतिशत सफलता मिली है ।  धूलिवंदन तथा रंगपंचमी, इन दो दिनोंमें रंगसे सने हुए अनेक युवक जलाशयमें स्नान करने हेतु आए; परंतु समितिके कार्यकर्ता तथा इस वर्ष अभियानमें सम्मिलित हुए कमिन्स इंडिया प्रायवेट लिमिटेडके अधिकारी तथा कर्मचारियोंद्वारा किए गए प्रबोधनके कारण एक भी व्यक्ति जलाशयमें नहीं उतर सका । इसके परिणामस्वरूप महाराष्ट्रमें पडे भीषण अकालकी पाश्र्वभूमिपर खडकवासला जलाशयका होनेवाला संभावित प्रदूषण रोककर धूलिवंदन तथा रंगपंचमी, इन दोनों दिनोंके अभियानका ३१ मार्चको सफल समापन हुआ । (इतनी छोटीसी हिंदू जनजागृति समिति एक दशकतक किसी अभियानको सफलतापूर्वक चलाती है; परंतु बलवान हिंदुत्ववनिष्ठ संगठन निष्क्रिय रहते हैं ! समितिको प्राप्त ईश्वरीय  अधिष्ठानके कारण ही यह संभव है ! यह ध्यानमें रखकर हिंदुत्वनिष्ठ संगठनोंके कार्यकर्ता साधना करेंगे क्या ? - संपादक)

सनातनके आश्रममें आकर मेरा जीवन सार्थक हुआ ! - महंत श्री सुखरामदासजी महाराज

महंत श्री सुखरामदासजी महाराज
 राजस्थानके महंत श्री सुखरामदासजी महाराजके हिंदू जनजागृति समिति तथा सनातनके कार्यको आशीर्वाद !
    मडगांव (गोवा) - यहांके नवयुवक मंडल, मारु देवाशी समाजद्वारा महाशिवरात्रके उपलक्ष्यमें महंत श्री सुखरामदासजी महाराजजीके प्रवचन एवं भजनका कार्यक्रम आयोजित किया था । इस अवसरपर हिंदू जनजागृति समितिके गोवा राज्य समन्वयक डॉ. मनोज सोलंकीने उनके दर्शन लेकर समितिद्वारा किए जा रहे राष्ट्र एवं धर्म के कार्यकी जानकारी देकर उनसे आशीर्वाद लिए ।

अपने अस्तित्वको बनाए रखने हेतु ब्राह्मतेज एवं क्षात्रतेज आवश्यक है ।’’ - पू. पाण्डेयजी

    नवाबगंज, गोंडा (उ.प्र.) - यहांके नंदिनी नगर स्थित दयानंद विद्यालयमें स्थानीय संत पू. राम बहादुर पाण्डेयजीके सदप्रयत्नोंसे यह बैठक आयोजित हुई थी । इस बैठकमें पू. पाण्डेयजीने कहा, ‘‘आगामी काल अत्यंत कठिन है । अपने अस्तित्वको बनाए रखने हेतु ब्राह्मतेजके साथ ही क्षात्रतेज भी आवश्यक है ।’’
    इस अवसरपर हिंदू जनजागृति समितिके राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. चारुदत्त पिंगळेजीने हिंदू धर्माभिमानियोंको संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुत्वके लिए प्रतिदिन एक घंटा देना, यह हमारी साधनाका ही भाग होनेके साथ-साथ प्रत्येक हिंदूका कर्तव्य है । प्रत्येक हिंदूको प्रतिदिन ५ धार्मिक कृत्य करने अनिवार्य ही है, जैसे कुमकुमका तिलक लगाना, प्रतिदिन हिंदूराष्ट्रकी स्थापनाके लिए प्रार्थना करना, प्रतिदिन पांच व्यक्तियोंको साधना एवं धर्मशिक्षा संबंधी जानकारी देना, देवी-देवताओंके अनादरका निषेध व्यक्त करना/पत्र लिखना इत्यादि ।’’ यह विचार उत्तर प्रदेशके गोंडा जनपदमें नवाबगंज गांवमें दयानंद विद्यालयमें हिंदुत्ववादी व्यक्तियोंकी बैठकमें प्रस्तुत किए गए !

लव जिहादके रक्षणार्थ ‘बेटियों जागो’ इस कार्यक्रममें १०,००० ग्रंथोंका वितरण

    इंदौर (म.प्र.) - नववत्सरारंभके अवसरपर दस सहस्र कन्याओंका पाद पूजन हिंदू संवत्सरारंभ एवं चैत्र नवरात्रिके अवसरपर स्वदेशी जागरण मंच एवं हिंदू नववर्ष आयोजन समितिद्वारा ११ अप्रैलको चाणक्यपुरी चौराहेपर सूर्योदयके समय सूर्यको अघ्र्य देकर कन्या पाद-पूजन किया गया । कार्यक्रममें कन्याओंका पाद-पूजन कर, दस सहस्र बालिकाओंको ‘बेटियों जागो’ ग्रंथका ‘लव-जिहाद’के संकटसे रक्षा हेतु नि:शुल्क वितरण किया गया ।

हिंदू जनजागृति समितिपर विश्वास दिखाकर समाजमें उसका मान बढानेमें सहायता करनेवाले श्री. उपानंद ब्रह्मचारी !

श्री. उपानंद ब्रह्मचारी
    १. समितिका कार्य आदर्श होनेका मत व्यक्त करना : श्री. उपानंद ब्रह्मचारी हिंदू एक्जिस्टेंस नामक जालस्थलके माध्यमसे हिंदू जागृतिका कार्य करते हैं । इसलिए देशके अनेक हिंदू उन्हें जानते हैं । जून २०१२ में गोवामें संपन्न अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशनमें उपानंद ब्रह्मचारीजी उपस्थित थे । तत्पश्चात वे नियमित समितिके संपर्कमें रहने लगे । उनके मतानुसार समितिका कार्य आदर्श है ।

कर्मयोगी स्वामी रामबालक दासजी महाराज

स्वामी रामबालक दासजी महाराज
  जीवन एवं कार्य :
स्वामी रामबालक दासजी महाराजजी की आयु ३५ वर्ष है । स्वामी राम बालकदासजी ८ वर्षकी आयुमें वे अपने गुरुके संपर्कमें आए । वर्तमानमें महाराजजी गोरक्षा एवं गोसेवाके कार्यमें सर्मिपत हैं । कई संतोंसे संपर्क  कर, स्वयं दायित्व लेकर महाराजजीने राजीम कुंभका आरंभ करवाया है । उनके प्रयासोंसे इस कुंभ हेतु जो भी खर्च होता है, उसे छत्तीसगढकी सरकार वहन करती है ।

योगीराज स्वामी प्रेमसंजयजी महाराजके आश्रममें हिंदू जनजागृति समितिके धर्मशिक्षा फलक एवं सनातनके ग्रंथ तथा सात्त्विक वस्तुओंकी प्रदर्शनी संपन्न !

   आगरा (उत्तरप्रदेश) - यहांके क्वारी-चांगोली नामक गांवमें योगीराज स्वामी प्रेमसंजयजी महाराजजीके आश्रममें ११ अप्रैल (चैत्र शु. प्रतिपदा )से १९ अप्रैल ( चैत्र शु. नवमी ) तक यज्ञका आयोजन किया गया था । इसके साथ-साथ राष्ट्र एवं धर्मकी रक्षा हेतु संतोंके प्रवचन तथा भागवत कथाका आयोजन किया था । इस संतसमागममें आए हुए संतोंने गोरक्षा, गंगारक्षा एवं संस्कृति रक्षासे ही राष्ट्ररक्षा कैसे हो सकती है, यह विषय विषद किया । इस शुभअवसरपर प्रमुख अतिथिके रूपमें काशी सुमेरुपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वतीजी की वंदनीय उपस्थिति थी ।

पंचांग २०१४ की मांग करें !

प्रति वर्षके समान, १२ पृष्ठोंमें रंगीन एवं आकर्षक स्तंभोंसहित आनेवाला ‘पंचांग २०१४’ की मांग करें ।
पंचांगके विशेष आकर्षण :-
  •  देवी-देवताओंके सात्त्विक चित्र एवं तीर्थक्षेत्रोंका महात्मय, त्यौहार, उत्सव, व्रत एवं धार्मिक कृत्योंका आधारभूत शास्त्र ! 
  •  भाषिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय अस्मिता बढानेवाले विचारोंसे उपयुक्त आकर्षक स्तंभ !
  •  मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड, तामिल, तेलगु, मल्यालम एवं ओडिया, इन ९ भाषाओंमें उपलब्ध !
अर्पण मूल्य : केवल ३० रुपए
संपर्क  पता : अपने निकटके वितरकों एवं सनातन प्रभातका वितरण करनेवालोंको अपनी मांग दें ।

सनातनके पाठक एवं शुभचिंतकोंसे विनती !

सनातनपर बंदी आनेके उपरांत निराधार होनेवाले आश्रमके निष्पाप बालसाधक, विद्यार्थी साधक तथा वृद्ध साधकोंकी सहायता करें !
    हिंदुओंको आतंकवादी सिद्ध करनेके लिए कांग्रेसी राज्यकर्ताओंद्वारा सनातनपर बंदी लगानेका षड्यंत्र रचा है । बंदी आनेके उपरांत संस्थाका कार्य रुक जाएगा । इसके लिए सनातनके आश्रमोंपर ताले लगा दिए जाएंगे तथा कुछ महत्त्वपूर्ण साधककोंको प्रतिबंधात्मक बंदी बनाए जानेकी संभावना है । कुछ साधकोंको अधिक समयतक कारावासमें  रख सकें , इसलिए पुलिस उनपर झूठे अपराध प्रविष्ट कर सकती है । ऐसा होनेपर भी ‘अंतमें सत्यकी ही विजय होती है’, इस सिद्धांतके अनुसार यह सिद्ध हो जाएगा कि साधक निर्दोष हैं ।  इस बंदीकालमें आश्रममें रहनेवाले निवासी साधक जो सर्वस्वका त्याग करके आश्रममें आए थे, उन साधकोंके भविष्यपर प्रश्न उठनेवाला है ।

धर्मसत्संगकी दृश्यश्रव्य-चक्रिकाओंका (सीडीका) विविध राज्योंमें प्रसारण

    निम्नांकित विविध राज्योंमें स्थानीय केबल नेटवर्क द्वारा ‘सनातन संस्था चेन्नई’ तथा ‘हिंदू जनजागृति समिति’द्वारा निर्मित हिंदी भाषाके ‘धर्मसत्संग’ की दृश्यश्रव्य-चक्रिकाओंका (VCD का) प्रसारण आरंभ हुआ है । अन्यत्र भी हिंदू अपने क्षेत्रके केबल टीवी-संचालकोंसे संपर्क  कर, इन धर्मसत्संगोंका प्रसारण आरंभ करने हेतु प्रयत्न करें ।

५७,२७,८६५ से भी अधिक दर्शक धर्मसत्संगोंका लाभ उठा रहे हैं ।

अप्रैल २०१३ में ६० प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर साध्य करनेवाले साधक

१. ६० प्रतिशत स्तर प्राप्त करनेका महत्त्व
अ. चौथे पातालके मांत्रिकोंसे लगभग ४ माह युद्ध कर सकते हैं ।
आ. इन साधकोंने साधनामें निरंतरता बनाई रखी तथा अहं बढने नहीं दिया, तो ये साधक ४ से ५ वर्षोंमें संत (७० प्रतिशत स्तर) बन सकते हैं ।
२. ६० प्रतिशत एवं उससे अधिक स्तर प्राप्त करनेवालोंकी विशेषताएं
अ. मायासे अलिप्त हो पाते हैं ! 
आ. उनके शरीर तथा वस्तुओंसे सुगंध आती है !
इ. मनोलय होना आरंभ होता है । विश्वमनके विचार ग्रहण कर पाते हैं !
ई. अनिष्ट शक्तियोंसे पीडित साधकोंपर उपाय कर पाते हैं !
उ. जन्म-मृत्युके चक्रसे मुक्त होकर महर्लोकमें स्थान प्राप्त होता है !

साधको, जिज्ञासु अथवा साधकके रूपमें संपर्क में आनेवाले गुप्तचर विभागके अधिकारियोंसे सावधान !

    गत कुछ माससे ध्यानमें आ रहा है कि कुंभमेलामें तथा कुछ केंद्रोंमें भी, गुप्तचर विभागके अधिकारियोंद्वारा जिज्ञासा प्रदर्शित करनेकी अथवा साधना समझनेके लिए संस्थाके साधकोंसे संपर्क करनेकी घटनाएं बढी हैं । साधको, आपको लगता होगा कि कोई गुप्तचर अधिकारी संस्थाका कार्य अथवा साधना समझ लेगा, तो संस्थापर प्रतिबंधका संकट दूर हो जाएगा अथवा वह एक अच्छा साधक बन जाएगा; किंतु इस विषयमें ध्यानमें आई वास्तविकता निम्नानुसार है -

साधकोंको सूचना एवं पाठकोंसे विनती

 ग्रीष्मकालीन अवकाशमें अपने साधक-बच्चोंको आश्रममें भेजें !
     कुछ ही दिनोंमें परीक्षा समाप्त होकर पाठशाला तथा महाविद्यालयमें विद्यार्थियोंकी गर्मीकी छुट्टियां प्रारंभ होंगी । इस अवधिमें १३ वर्षसे अधिक आयुके साधक-बच्चोंको सेवामें सहभागी होनेके लिए सनातनके रामनाथी (गोवा) अथवा देवद (पनवेल)के आश्रममें भेज सकते हैं । आश्रममें इन साधक-बच्चोंके लिए उनकी रुचि तथा कुशलताके अनुसार रसोई, लेखा, निर्माणकार्य, जतन, संगणक सुधारकार्य, ध्वनिचित्रीकरण, ग्रंथ, दैनिक, कला एवं व्यवस्थापन इत्यादि विभागोंमें सेवा उपलब्ध होगी । साधक-बच्चोंमें सेवा सीखनेकी क्षमता तथा घर जानेके उपरांत सेवाके लिए दिया जानेवाला  समय, इत्यादि सभी बातोंका विचार कर उन्हें यह सेवाएं सिखाई जाएंगी - ध्वनिचित्रीकरण विभागका ध्वनिमुद्रण सुनकर टंकण करना, जालस्थल विभागमें समाचार अपलोड करना, जालस्थलके लिए चित्र बनाना, फेसबुकद्वारा अध्यात्मप्रसार करना, विज्ञापनोंकी संरचना करना इत्यादि ।

सनातनपर प्रतिबंध लगनेके उपरांत साधकोंको बंदी बनाए जानेकी पूर्वसिद्धता स्थानीय पुलिसकर्मियोंद्वारा पूर्ण !

    मुंबई (महाराष्ट्र) - यहांकी प्रत्येक जनपदकी पुलिसने अपनी सूची बना ली है कि सनातनपर प्रतिबंध लगानेके पश्चात जनपदके सनातनके किन साधकोंको बंदी बनाना है । अन्य राज्योंमें भी इस प्रकारकी सूची बनाए जानेकी संभावना है । 
     एक जनपदकी पुलिसद्वारा जनपदके अंतर्गत बंदी बनाए जानेवाले साधकोंकी सूचीमें त्रुटियां !
. प.पू. डॉ. आठवलेजी सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवामें निवास करते हैं तथा गत ६ वर्षोंसे अस्वस्थ होनेके कारण अपने कक्षसे बाहर भी नहीं आए हैं । इसके साथ ही प.पू. डॉ. आठवलेजी महाराष्ट्रके उस जनपदसे संबंधित नहीं हैं । फिर भी उनका नाम जनपदके अंतर्गत बंदी बनाए जानेवाले साधकोंकी सूचीमें प्रथम क्रमांकपर है ।
२. गत १२ वर्षोंसे जो साधक संस्थामें नहीं है, उसका नाम भी सूचीमें है तथा यह साधक उस जनपदका भी नहीं है ।

सनातन संस्थाके साधक एवं हिंदू जनजागृति समितिके कार्यकर्ताओंको हेतु महत्त्वपूर्ण सूचना !

प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारीद्वारा हमें प्रतिभूति देनेका अधिकार नहीं है, यह कहकर  प्रतिभूति देना अस्वीकार करनेपर उन्हें मुंबई उच्च न्यायालयका निर्णय दिखाइए !
    सरकार सनातन संस्थापर प्रतिबंध लगाने हेतु सर्व प्रयास कर रही है । प्रतिबंध लगनेपर संस्थाके कुछ साधकोंको बंदी बनाया जाना निश्चित है । बंदी बनाए गए साधकोंको न्यायालयसे प्रतिभूति प्राप्त कर मुक्त करवाना पडेगा । उस समय आरोपीका आवेदन न्यायालयमें प्रस्तुत करनेपर प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारी कहते हैं कि ऐसे प्रकरणोंमें हस्तक्षेप कर हमें प्रतिभूति देनेका अधिकार नहीं है तथा प्रतिभूति देना अस्वीकार करते हैं । ऐसे समय मुंबई उच्च न्यायालयके नागपुर खंडपीठके न्यायमूर्तिद्वारा दिया गया निर्णय प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारीके ध्यानमें लाना आवश्यक है । मुंबई उच्च न्यायालयद्वारा किया गया यह निर्णय प्रथमवर्ग न्यायदंडाधिकारीके लिए बंधनकारक है; इसलिए यह निर्णय अपने अधिवक्ताओंको पूर्वसे ही अभ्यास करने हेतु कहें, जिससे प्रतिभूति प्राप्त करनेमें बाधा नहीं आएगी ।