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धर्मजागृति, हिंदू-संगठन एवं राष्ट्ररक्षा हेतु साधकोंद्वारा साधनास्वरूप आर्थिक हानि सहते हुए भी चलाया जानेवाला एकमात्र मासिक !
जुलाई २०१४

गोवामें तृतीय अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशन सम्पन्न !

गोहत्याबन्दी, बांग्लादेशी घुसपैठ रोकना एवं हिन्दुआेंकी सुरक्षाके साथ
भारत एवं नेपाल में हिन्दू राष्ट्रकी पुनर्स्थापनाके लिए प्रस्ताव पारित !
पू. डॉ. चारुदत्त पिंगळे, प.पू. ईश्‍वरबुवा रामदासी (दीप-
प्रज्वलन करते हुए), स्वामी प्रदीप्तानंद एवं पू. नंदकुमार जाधव
     रामनाथी (गोवा) - यहां २० से २६ जूनकी कालावधिमें तृतीय अखिल भारतीय अधिवेशन सम्पन्न हुआ । इसमें भारतके २० राज्योंसहित नेपाल, बांग्लादेश एवं श्रीलंका से १२५ से अधिक हिन्दू संगठनोंके ४०० से अधिक प्रतिनिधि सहभागी हुए । इस अवसरपर सन्तोंकी उपस्थितिमें सनातन-निर्मित गीताज्ञानदर्शन एवं बोधकथा नामक नूतन मराठी ग्रन्थों तथा ३ अंग्रेजी ग्रन्थोंका लोकार्पण हुआ । साथ ही, स्वामी प्रदीप्तानंदजी महाराजके शुभहस्तों अध्यात्म विश्‍वविद्यालय नामक भावी परियोजनाका परिचय करानेवाली वेबसाइट
www.spiritual-university.org का उद्घाटन हुआ ।

गुरुपूर्णिमाके पावन पर्वपर प.पू. डॉ. आठवलेजीका संदेश

हिन्दुओ, कालानुसार गुरुतत्त्वको अपेक्षित क्षात्रधर्म साधना करें !
 प.पू. डॉ. आठवले
गुरु एक तत्त्व है, जो विविध सन्त-पुरुषों तथा आध्यात्मिक दृष्टिसे उन्नत व्यक्तियोंके माध्यमसे कार्यरत रहता है । शिष्यका परमकल्याण (मोक्षप्राप्ति) और विश्‍वकल्याण (अखिल मानवजातिका हित), यही गुरुतत्त्वका खरा कार्य है । साधनाद्वारा मोक्षप्राप्ति करना, यही मनुष्यजन्मकी खरी सार्थकता है और यह केवल गुरुकृपासे ही हो सकता है । जन्म-मृत्युके चक्रसे मुक्ति देनेवाले गुरुके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनेके लिए गुरुपूर्णिमा मनाई जाती है । गुरुपूर्णिमा, गुरुको अथवा गुरुतत्त्वको अपेक्षित कार्य करनेका संकल्प दिवस    भी  है ।

एस.एस.आर.एफ. जालस्थल (वेबसाइट) अब हिन्दीमें भी !

    ssrf.org जालस्थलका हिन्दी पेज http://www.spiritualresearchfoundation.org/hi/ आरम्भ हो गया है । प्रतिमाह ssrf.org जालस्थलके ४ लाख पाठक हैं । उत्तरोत्तर बढते प्रतिसादके कारण अब यह ज्ञान हिन्दी भाषामें सम्पूर्ण विश्‍वमें पहुंचानेकी सेवा जारी है । ७०० लेखोंका भाषान्तर करने हेतु निम्नलिखित स्वरूपमें सेवाआेंका स्वर्ण अवसर है -
१. अंग्रेजीसे हिन्दी भाषामें लेखोंका अनुवाद
 २. भाषान्तरित लेखोंका सन्शोधन
    जिलासेवकोंसे अनुरोध है कि संगणकीय तथा इण्टरनेटका प्रयोग करनेवाले साधक, शुभचिन्तक यदि यह सेवा करनेके इच्छुक हैं, उनके नाम आगे दिए प्रारूपमें भरकर ssrfhindi@gmail.com इस पतेपर श्रीमती क्षिप्रा जुवेकरके नाम भेंजें ।
१. नाम और कुशलता (अंग्रेजीसे हिन्दी अनुवाद, शुद्धलेखन)
२. दिनमें कितने घण्टे सेवा कर पाएंगे  ?
३. संगणकका ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)
४. उनका ई-मेल आई.डी.

आषाढ पूर्णिमा, १२ जुलाई २०१४ को उत्तरभारतमें मनाए जानेवाले गुरुपूर्णिमा महोत्सव स्थलोंकी जानकारी

हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु अखिल भारतीय अधिवेशनको सन्तोंके शुभाशीष

प. पू. डॉ. आठवले
सनातन संस्थाके संस्थापक प.पू. डॉ. जयंत आठवलेजीका सन्देश
हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु समर्पित हों ! 
सनातन वैदिक धर्ममें यज्ञका अनन्य महत्त्व है । अग्निमुखा वै देवाः । अर्थात यज्ञ देवताआेंका मुख है । यज्ञका अर्थ है, देवताआेंके मुखमें समिधारूपी अन्न समर्पित करना । अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनके माध्यमसे हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु आवश्यक धर्मयज्ञ प्रज्वलित हुआ है । इस यज्ञ हेतु आवश्यकता है धर्मके लिए समर्पित होनेवाली समिधाआेंकी । जिस प्रकार यज्ञमें सम्पूर्ण समर्पण, समिधाआेंका जीवन-कार्य होता है, उसी प्रकार हिन्दू राष्ट्रप्रेमियोंका भी जीवन-कार्य हिन्दू राष्ट्र-स्थापनाके लिए सम्पूर्ण समर्पण होना चाहिए ।

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका प्रथम दिवस

 हिन्दू-संगठन सम्बन्धी उपक्रमोंके विषयमें उद्बोधन सत्र
१. वर्ष २०१३ में हिन्दू अधिवेशनमें सहभागी हुआ था । यहांसे गया और तत्काल हुए महाप्रलयके उपरान्त ऐसा लगने लगा कि राष्ट्रके लिए कुछ करना चाहिए । इसलिए उत्तराखंडमें सहायताकार्यके लिए गया । वहां पहुंचनेपर ऐसा लगा कि उत्तराखंडके हिन्दुआेंके पाप धोनेके लिए ही भगवान शंकरने महाप्रलय की है । वहांके हिन्दुआेंमें थोडा भी राष्ट्राभिमान अथवा धर्माभिमान नहीं बचा । उनमें जागृति करने हेतु आप सभीके सहयोगकी आवश्यकता है ।  - श्रीकांत पांगारकर, अध्यक्ष, प्रतिष्ठा युवा मण्डल, जालना, महाराष्ट्र.
२. राष्ट्र एवं धर्मपर हो रहे आघातोंके विरोधमें जागृति और हिन्दुआेंका संगठन करनेवाला उपक्रम अर्थात राष्ट्रीय हिन्दू आन्दोलन धर्मक्रान्तिका बीज है ! - श्री. सुरेश मुंजाल, हरियाणा एवं पंजाब राज्य समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति.

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका द्वितीय दिवस

हिन्दू राष्ट्र स्थापनाकी लगनके कारण पारिवारिक
समस्याआेंपर भी मात कर अधिवेशनमें उपस्थित रहनेवाले
ऐसे हिन्दुत्व-निष्ठोंपर हमें गर्व है !
१. देहलीके समर्थ संगठनके महामन्त्री श्री. मनीष मंजुलके सगे भाई डायलिसिसपर हैं । दो ही दिनोंके उपरान्त उनकी किडनी ट्रान्सप्लान्टेशनकी शस्त्रक्रिया थी । तब भी हिन्दू राष्ट्र स्थापनाकी लगनके कारण सभीको मिलनेके लिए वे देहलीसे गोवातककी यात्रा कर, एक दिनके लिए अधिवेशनमें आए थे ।
२. झारखंडके तरुण हिन्दू संगठनके डॉ. नील माधब दासके पुत्रके मस्तिष्ककी शस्त्रक्रिया कुछ दिनों पूर्व ही हुई है । तब भी वे अधिवेशनमें आए थे ।
३. ओडिशाके श्री. जयराज ठाकुरके भांजेकी तीन दिन पूर्व ही मृत्यु हुई थी । इन सभी हिन्दुत्वनिष्ठोंपर हमें गर्व है !
हिन्दुत्वनिष्ठोंमें निर्माण हुई यह कुटुम्बभावना और अपनापन, हिन्दू जनजागृति समितिके अधिवेशनोंकी बहुत बडी उपलब्धि है ।

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका तृतीय दिवस

पूरे वर्षमें जनहित याचिकाआेंद्वारा हिन्दू विधिज्ञ परिषदका लक्षणीय कार्य !
- अधिवक्ता संजीव पुनाळेकर, सचिव, हिन्दू विधिज्ञ परिषद, मुंबई.
      हिन्दू विधिज्ञ परिषद अधिवक्ताआेंका व्यासपीठ है । गत वर्ष इसकी ओरसे हिन्दू धर्मियोंपर होनेवाले अत्याचारोंके विरोधमें जनहित याचिकाएं प्रविष्ट की गईं । सन्तोंका अनादर, सच्चर आयोगकी मुसलमानप्रेमी अनुशंसा (सिफारिश) आदिके विरोधमें न्यायालयने कांग्रेस शासनको १० सहस्र रुपयोंका दण्ड भी दिया है । आजाद मैदानमें इ.स.२०१२ में हुए दंगेमें १४ महिला पुलिसकर्मियोंका शीलभंग किया जाना, अमर जवान स्मारकको हानि पहुंचाना, प्रसारमाध्यमोंकी ओबी वैन जलाना आदि कृत्य किए गए । तब सहस्रों मुसलमानोंके उपस्थित रहनेपर भी मात्र ५७ के विरुद्ध अभियोग चल रहा है । हमने इसके विरोधमें याचिकाके माध्यमसे पुलिसको क्षतिपूर्ति दिलवाई । समाचारवाहिनियोंपर नियन्त्रण रखनेकी कोई व्यवस्था न होनेसे उनपर दिनरात होनेवाले हिन्दू सन्तोंकी अपकीर्तिके विरोधमें हिन्दू जनजागृति समितिकी ओरसे सर्वोच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट की गई है ।

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका चौथा दिवस

हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनके व्यासपीठ
पर भावपूर्ण वातावरणमें हुआ हिन्दू राष्ट्रकी भावी पीढीका परिचय ! 

(बाएंसे खडे) कु. वैदेही पिंगळे, कु. वैष्णवी वेसणेकर,
श्रीमती पार्वती जनार्दन, कु. यश वेसणेकर, कु. वैभवी भोवर,
कु. प्रियांका स्वामी, (बाएंसे बैठे) कु. आफोलाबी मिस्सा, कु. ईशान जोशी एवं कु. शुभम वाघ    

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका पांचवां दिवस

एन्सीईआर्टी, हिन्दू धर्मके विरोधमें विष उगल रहा है !
- प्रा. नीरज अत्री, विवेकानन्द कार्य समिति, चण्डीगढ 
प्रा. नीरज अत्री
एन्सीईआर्टीके (राष्ट्रीय शिक्षा और अनुसन्धान केन्द्र) इतिहासके पाठ्यपुस्तकोंमें पूर्ण असत्य, तो कहींपर अर्धसत्य जानकारी छापकर एन्सीईआर्टी गत ९ वर्षोंसे हमारे बच्चोंमें बचपनसे ही हिन्दू धर्मके विरोधमें विष उगलनेका काम कर रहा है ।
    जितने भी तथाकथित समाजसुधारक हैं, उनके मुखौटेके पीछे ईसाई संस्थाएं हैं । इसलिए इन पाठ्यपुस्तकोंमें पंडिता रमाबाई, जिन्होंने स्वामी विवेकानन्दके धर्मप्रसारमें बाधा लाई, उस केशवचंद्र सेन आदिकी प्रशंसा की गई है । इन पाठ्यपुस्तकोंमें उत्तर आणि दक्षिण भारतमें भेद कर विभाजनका बीज बोया गया है । ब्राह्मणोंको लक्ष्य कर उनके सम्बन्धमें नकारात्मक दृष्टिकोण रखकर जानकारी दी गई है । अब लडाई बौद्धिक स्तरपर आ पहुंची है । इस लडाईमें जबतक हम नहीं जीतेंगे, तबतक हम धर्मसम्बन्धी अन्य समस्याआेंपर विजय प्राप्त नहीं कर सकेंगे । 

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका छठा दिवस

तृतीय अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनके छठे दिनके प्रबोधनसत्रमें मान्यवरोंके विचार
आदि शंकराचार्यके सन्दर्भमें हिन्दुआेंका अज्ञान क्लेशदायी !
- कर्नल अशोक किणी, अध्यक्ष, फेथ फाऊंडेशन, नई देहली. 
कर्नल अशोक किणी
    गत वर्ष उत्तराखण्डमें हुए महाप्रलयमें ध्वस्त हुआ आदि शंकराचार्यका समाधिस्थल पुनर्प्रस्थापित करनेके लिए हमने उनके जन्मस्थल कलाडीसे समाधिस्थल केदारनाथतक यात्रा की । यात्राके समय आदि शंकराचार्यके सन्दर्भमें जानकारी देनेके लिए विद्यालयों और महाविद्यालयोंमें गए । तब २०० विद्यार्थियोंमेंसे केवल २-३ विद्यार्थियोंको ज्ञात था कि आदि शंकराचार्य कौन थे ? भ्रमणके समय अनेक स्थलोंकी मिट्टीको समेटकर मैं उसे केदारनाथ ले गया । इस यात्राके समय सनातन संस्थाने बहुत सहायता की । शासन अथवा अन्य किसी भी संगठनने हमारी सहायता नहीं की । यात्राके समय जब केदारनाथ गया, तब ध्यानमें आया कि शासनने वहांकी परिस्थिति सुधारनेके लिए कुछ भी नहीं किया है ।

अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनका सातवां दिवस

गांधीजीके विचार त्यागकर शिवाजी महाराजके विचारोंका अंगीकार करें !
- श्री. प्रमोद मुतालिक, संस्थापक, श्रीराम सेना.
श्री. प्रमोद मुतालिक
    तृतीय हिन्दू अधिवेशनसे पूरे देशके हिन्दुआेंमें उत्साहका वातावरण निर्माण हुआ देखनेको मिल रहा है । यह एक श्रेष्ठ कार्य है । भगवान श्रीकृष्णके धर्मयुद्धका सन्देश पूरे देशमें जा रहा है । पूरे देशमें चर्चा हो रही है कि हिन्दू एकत्र हुए हैं । धर्मयुद्धका अर्थ केवल तलवार, बम ऐसा ही नहीं है; परन्तु समाजकी मानसिकता बनानी है । एक दिन सडकपर ही युद्ध होनेवाला है । इसकी सिद्धता करना हिन्दू समाजके लिए आवश्यक है । देशहितके लिए युवकोंको प्रशिक्षण देना होगा । अबतक ३ सहस्र युवक सिद्ध हुए हैं । अब गांधीजीके विचारोंको त्यागकर छत्रपती शिवाजी महाराज, स्वतन्त्रतावीर सावरकर, भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद जैसे क्रान्तिकारी विचारोंसे जाना होगा ।

जैव-वास्तुविद मयांक बडजात्याकी रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रमको सदिच्छा भेंट

श्री. प्रकाश मराठेका उपकरणद्वारा परीक्षण करते हुए श्री. मयंक बडजात्या
    रामनाथी (गोवा) - विख्यात जैव-वास्तुविद श्री. मयांक बडजात्याने रामनाथीके सनातन आश्रमको १३ जूनको सदिच्छा भेंट दी । इस समय उन्होंने आश्रममें शोधकार्य किया, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि सनातन आश्रमका यह वास्तु ऊर्जासे अत्यंत प्रभारित है और अन्य वास्तुआेंसे भिन्न है । श्री. मयांक बडजात्या व्यवसायसे जैव-वास्तुविद हैं, तब भी उन्होंने वास्तुशिल्प, मानवीय ऊर्जा, वास्तुविद्या और वातावरणके क्षेत्रोंमें शोध किए हैं । साथ ही उन्हें अतिभौतिक विज्ञानमें भी रुचि है।

हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु कटिबद्ध हिन्दू जनजागृति समिति

    हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए कटिबद्ध हिन्दू जनजागृति समिति धर्मशिक्षा,
धर्मजागृति, धर्मरक्षा, हिन्दू संगठन, हिन्दू समाजके लिए सहायताकार्य एवं राष्ट्ररक्षा जैसे विविध उपक्रम कार्यान्वित करती है । प्रस्तुत है समितिके कार्यका संक्षिप्त ब्यौरा !
जंतरमंतर, देहलीमें आन्दोलन करते हुए हिन्दू धर्माभिमानी
१. धर्मशिक्षा उपक्रम
१ अ. धर्मशिक्षा : वर्तमानमें १८ राज्योंमें २०२ स्थानोंपर हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा  नि:शुल्क साप्ताहिक धर्मशिक्षा वर्ग लिए जा रहे हैं ।
१ आ. स्थानीय दूरचित्रवाहिनियोंद्वारा धर्मसत्संग : समितिद्वारा धार्मिक कृत्योंका शास्त्र शीर्षकसे २०६ भागोंकी धर्मसत्संग श्रृंखला बनाई है । अबतक इन धर्मसत्संगोंको श्री शंकरा, सुदर्शन तथा मैजिक जैसे राष्ट्रीय स्तरके दूरदर्शनवाहिनियोंपर प्रसारित किया गया है । अब तेलगू एवं कन्नडमें भी धर्मसत्संग बनाए जाते हैं ।

हिन्दू राष्ट्र-स्थापनाकी सूक्ष्म और स्थूल-स्तरीय प्रक्रिया

प.पू.डॉ.आठवले
१.लेख लिखनेका उद्देश्य
     लोकसभा चुनावोंमें भाजपाकी विजय होनेके उपरान्त अनेक धर्मप्रेमियोंको लग रहा है कि हिन्दुओंके लिए अब अच्छे दिन आएंगे । यह मनोवैज्ञानिक स्तरका विश्‍लेषण है । राष्ट्र और धर्मकी रक्षाके लिए आध्यात्मिक स्तरपर कार्य करनेवालोंको ज्ञात है कि इ.स.२०२३ में भारत धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र होगा,इसलिए वे इस तात्कालिक राजनीतिक परिवर्तनसे हर्षित नहीं होते और उनका अध्यात्मस्तरीय कार्य निरन्तर चलता रहता है । वर्तमानमें सनातन संस्था इसी प्रकारका अध्यात्मस्तरीय कार्य कर रही है । लगभग २० वर्ष पूर्व सनातन संस्थाद्वारा सर्वत्र होनेवाले सनातनके सार्वजनिक कार्यक्रमोंकी सामग्रीकी यातायात करनेवाले ट्रकपर लिखा गया था -हिन्दू राष्ट्र-स्थापनाकी समय-सारणी ।

पंचमुखी हनुमान उपासक विनायक फडकेदादाजी (आयु ८० वर्ष) सन्तपदपर विराजमान !

पू.  विनायक फडके
चिंचवड (पुणे, महाराष्ट्र) - पंचमुखी हनुमानके उपासक, निश्छल प्रेमभावसे ओतप्रोत और सहजस्थितिमें रहनेवाले यहांके श्री. विनायक फडकेदादाजी (आयु ८० वर्ष), १० जूनको ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर सन्तपदपर विराजमान हुए । पू. फडके दादाजीमें धर्मकार्यकी विशेष लगन है ।

भोले भावसे श्री कानिफनाथकी भक्ति कर श्रीमती ससाणेदादी (आयु ८१ वर्ष) ने प्राप्त किया सन्तपद !

भगवान जिस स्थितिमें रखे, उसीमें
संतोष होना चाहिए ! - पू. ससाणे दादी
पू. ससाणे दादी
चिंचवड (पुणे, महाराष्ट्र) - पू. दादीका मनोगत - मेरा अपना ऐसा अब कुछ शेष नहीं रहा । इसलिए मैं, मेरे बच्चे आदिमें नहीं फंसती हूं । पैरोंमें वेदना होनेसे मैं अब बैठ नहीं पाती, इसलिए कभी-कभी तो ५-६ दिन स्नान नहीं होता; परन्तु ऐसा होनेपर भी मैंने अपने बच्चोंके घर न जाकर, यहींपर श्रीनाथकी सेवा करना योग्य समझा ।

हिन्दुत्वके लिए आदर्श एवं प्रेरणादायी पुणेके सुप्रसिद्ध प्रा. गेलाराम चेतनदास असनानीजी (आयु ९३ वर्ष) ने नम्रता, कृतज्ञताभाव एवं क्षात्रतेजके अपूर्व संगमसे प्राप्त किया सन्तपद !

पू.  गेलाराम असनानी
आैंध (पुणे, महाराष्ट्र) - यहांके निवासी श्री. असनानीजी १६ जूनको सन्तपदपर विराजमान हुए । वे गणितमें एमएससी तथा पीएचडी हैं । तदुपरान्त ट्रॉपिकल मेट्रॉलॉजीमें विशेषज्ञके रूपमें वर्ष १९४५ से कार्यरत हैं । वे प्रतिदिन हनुमान चालिसा पढते हैं और श्रीरामका जप करते हैं । वे सदा सकारात्मक रहते हैं और उनका कहना है कि मनमें आया हुआ विचार भगवानका होता है । हिन्दू धर्मके प्रति अटूट निष्ठा है । कहते हैं, हिन्दू धर्मके प्रसारके लिए मैं अब भी १०-११ वर्ष जीवित रहूंगा । मुझे मोक्ष नहीं, अपितु इसकी सेवाके लिए हिन्दू बनकर ही बार-बार जन्म लेना है । इस आयुमें भी सवेरे ११.३० से दोपहर १.३० बजेतक वे अभ्यासिकामें हिन्दू धर्मविषयी लेखन-अभ्यास करते हैं तथा ४ पन्नोंका डॉक्यूमेंट सिद्ध कर ५० सहस्र जिज्ञासुआेंको संगणकीय पत्रद्वारा भेजते हैं ।

गुरुके प्रति भक्तिभावसे ओतप्रोत प्रा. अशोक नेवासकर (आयु ७२ वर्ष) सन्तपदपर विराजमान !

पू.  प्रा. अशोक नेवासकर
नगर (महाराष्ट्र) - यहांके नाथ सम्प्रदायके  महान अभ्यासक और जीवनगौरव  पुरस्कारसे सम्मानित प्रा. अशोक गुलाबराव नेवासकरने ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर, सन्तपदपर विराजमान हुए । सनातन निर्मित शिवजीका चित्र उन्हें भेंटमें दिया गया ।
सम्मान समारोहके समय
पू. प्रा. नेवासकरद्वारा उपस्थितोंको किया गया मार्गदर्शन
१. जिस समय हमें गुरुमन्त्र मिलता है, उस समयसे उसे सतत जपना चाहिए । नामजपसे हमारे जीवनमें आनेवाले संकटोंकी आहट मिल जाती है । इससे उनकी तीव्रता अल्प होती है और सुरक्षाकवच भी मिलता है ।

सभीसे निरपेक्ष प्रीति करनेवाली और पारिवारिक कर्तव्य साधना समझकर निभानेवाली श्रीमती विजया कुलकर्णीदादी (आयु ८१ वर्ष) सन्तपदपर विराजमान !

पू. श्रीमती विजया कुलकर्णी
रामनाथी (गोवा) - सनातन संस्थाके संस्थापक प.पू. डॉ. जयंत आठवलेजीने २५ मईको घोषित किया कि जन्मजात प्रीतिके कारण परिवारके सभी सदस्योंकी आधार बनी और कठिन प्रसंगोंमें भी बिना निराश हुए, आनन्दपूर्वक गृहस्थी निभानेवाली महाराष्ट्रके सांगली जनपदके ग्राम ईश्‍वरपुर (इस्लामपुर) की श्रीमती विजया कुलकर्णीदादीने सन्तपद प्राप्त किया है । वे व्यष्टि सन्त हैं तथा सनातन संस्थाके आस्थास्थान प.पू. भक्तराज महाराजजी भक्त हैं ।

हिन्दुत्वके कार्यसे एकरूपता एवं अनोखे समर्पणभावके कारण, कर्मयोगानुसार साधना कर ७ हिन्दुत्वनिष्ठ हुए जीवनमुक्त !

    रामनाथी (गोवा) - तृतीय अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनके समय हिन्दू जनजागृति समितिके राष्ट्रीय मार्गदर्शक पू. डॉ. पिंगळेजीने घोषित किया कि मुंबईके हिन्दू वॉईस मासिकके सम्पादक श्री. पी. दैवमुथ्थु (आयु ६४ वर्ष), रामजन्मभूमि हेतु ३० वर्षसे अधिक न्यायालयीन लडाई लडनेवाले लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) उत्तरप्रदेशके हिन्दू फ्रन्ट फॉर जस्टिसके अध्यक्ष अधिवक्ता हरिशंकर जैन (आयु ६० वर्ष), बेंगलुरू, कर्नाटकके अधिवक्ता संगठनके उपाध्यक्ष अधिवक्ता अमृतेश एन्.पी. (आयु ५४ वर्ष), बांग्लादेशके हिन्दुआेंके लिए लगनसे कार्य करनेवाले बांग्लादेश मायनॉरिटी वॉचके अध्यक्ष अधिवक्ता रवींद्र घोष (आयु ५४ वर्ष), तमिलनाडुके हिन्दू मक्कल मुन्नानी (हिन्दू जनताका गठबन्धन संगठन)के संस्थापक श्री. राधाकृष्णन् गोपालकृष्णन् (आयु ५२ वर्ष), ओडिशाके भारत रक्षा मंचके महासचिव श्री. मुरली मनोहर शर्मा (आयु ४९ वर्ष) तथा कन्याकुमारी, तमिलनाडुमें तीन आश्रमोंके विश्‍वस्त मंडलमें कार्यरत श्री. महादेवन् (आयु ६२ वर्ष) ने ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया । पू. डॉ. पिंगळेजीने आगे कहा, ये हिन्दुत्वनिष्ठ अपने कार्यसे एकरूप हो गए हैं    । उनका समर्पणभाव अनोखा है । उनकी कर्मयोगानुसार साधना हो गई है । हमें विश्‍वास है कि जैसे-जैसे इस प्रकार साधना करनेवाले धीरे-धीरे इस कार्यसे जुड जाएंगे, वैसे ही हिन्दू राष्ट्र स्थापित हो जाएगा ।

मध्यप्रदेशमें हिन्दू धर्मके प्रचार-प्रसार हेतु प्रयत्नशील निष्ठावान धर्मवीरोंका परिचय

श्री. योगेश व्हनमारे
२९.३.२०१४ से १३.४.२०१४ तक हिन्दू जनजागृतिके समितिके प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे मध्यप्रदेशकी प्रसार-यात्रापर थे । इस समय श्री. योगेश व्हनमारेको समाजके हिन्दुत्वनिष्ठोंसे सीखने मिले सूत्र प्रस्तुत कर रहे हैं ।
१. हिन्दू धर्माभिमानी श्री. आनंद सोनी !
१ अ. वैकुंठपुर, रीवामें अकेले सैनिककी भांति नियमितरूपसे संघकी शाखाका संचालन करना : वैकुंठपुर, रीवाके रा. स्व. संघके तहसीलस्तरके पदाधिकारी श्री. आनंद सोनी, प्रतिदिन प्रातः उठकर स्वयं संघकी शाखा संचालित करते हैं । सप्ताहमें कुछ दिन तो वे अकेले ही ध्वजारोहण कर शाखा संचालित करते हैं । उस समय  अन्य कोई भी उपस्थित नहीं रहता; परन्तु पू. डॉ. हेडगेवारका आदर्श सामने रखकर वे तत्त्वनिष्ठता और एकनिष्ठतासे सेवा करते हैं ।

सन्धिकालमें धर्मसंस्थापनाका कार्य करनेका महत्त्व !

     हिन्दू-राष्ट्र स्थापनाका कार्य इ.स. २०२३ तक पूर्ण होगा । आनेवाले  १० वर्षोंका काल सन्धिकाल होगा । इस कालमें सत्त्वगुणी और सत्त्व-रजगुणप्रधान व्यक्तियोंद्वारा धर्मसंस्थापनाका, अर्थात हिन्दू-राष्ट्र स्थापनाका कार्य करना अपेक्षित है । सूर्योदय, सूर्यास्त, ग्रहणकालादि सन्धिकालमें साधना करनेसे जैसा लाभ होता है, हिन्दू-राष्ट्र स्थापनाका कार्य करनेवालोंको इन १० वर्षोंके सन्धिकालमें वैसा लाभ होगा । - डॉ. जयंत बालाजी आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था

हिन्दी मासिक सनातन प्रभातमें प्रयोग की जानेवाली भाषासम्बन्धी नीति

    मासिक सनातन प्रभात भाषाको चैतन्यमय बनानेके लिए सदैव शुद्ध हिन्दीका समर्थक रहा है । जिस प्रकार संस्कृतमें समान वर्गके शब्दोंके लिए अनुस्वारके स्थानपर अधूरे शब्दोंका प्रयोग किया जाता है, आगेसे हिन्दीमें भी उसी प्रकार लिखा जाएगा; तथापि पाठकोंकी सुविधाके लिए कठिन शब्द उदा. गंगा अथवा चंचलको गङगा अथवा चञ्चल न लिख, प्रचलित पद्धतिके अनुरूप अनुस्वारके साथ ही लिखा जाएगा ।
    हिन्दू शब्दसम्बन्धी दृष्टिकोण : हीनानि गुणानि दूषयति इति हिन्दुः, उक्तिनुसार धर्मके अर्थमें हिन्दु शब्दको उकारके साथ लिखना उचित है, जबकि धर्मीयके अर्थमें हिन्दू ऊकारके साथ लिखना उचित है; परन्तु प्रचलित पद्धतिमें हिन्दू ऊकारके साथ लिखा जाता है । अतएव पाठकोंके मनमें संभ्रम निर्माण न हो तथा भाषाका माधुर्य बना  रहे, इसलिए आगेसे हिन्दू शब्द ऊकारके साथ लिखा जाएगा । हम आशा करते हैं कि भाषाका माधुर्य तथा उसका चैतन्य बनाए रखने हेतु पाठक हमारा सहयोग करेंगे !

सनातनके साधक अपने बच्चोंपर ध्यान नहीं देते, ऐसा कहनेवालोंको करारा तमाचा !

अपनी सफलताका श्रेय साधनाको देनेवाले सनातनके किशोर साधक !


 

सनातन कार्य

संक्षिप्त समाचार
झारखंडके धनबाद, जमशेदुर एवं कतरासमें विद्यार्थी शिविर !
    इन विद्यार्थी शिविरोंमें सुसंस्कार एवं अच्छी आदतें, तनाव रहित छात्र जीवन हेतु स्वभावदोष-निर्मूलन एवं गुण-संवर्धन प्रक्रिया तथा आदर्श कृति कैसे करे इसका प्रायोगिक भाग दिखाया गया । प्रत्येक शिविरका लाभ लगभग ३०  विद्यार्थियोंने अपने माता-पिताके साथ लिया ।

धर्मसत्संगकी दृश्यश्रव्य-चक्रिकाओंका प्रसारण

५७,७५२०० से अधिक दर्शक धर्मसत्संगोंका लाभ ले रहे हैं ।
    देशके विविध राज्यों (उ.भारत, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक)में स्थानीय केबल नेटवर्कद्वारा सनातन संस्था चेन्नई तथा हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा निर्मित हिन्दी भाषाके धर्मसत्संगकी दृश्य-श्रव्यचक्रिकाओंका (VCD का) प्रसारण आरम्भ हुआ है ।

मई - जून २०१४ में ६० प्रतिशतसे अधिक आध्यात्मिक स्तर प्राप्त साधक



गुरुपूर्णिमानिमित्त संदेश

 
     अनादि अविद्या, काम तथा कर्मके वशीभूत जीव संसृति प्राप्त करता है । उसके भवबंधकी आत्यन्तिकी निवृत्ति ज्ञानी-तत्त्वदर्शी गुरुके अनुग्रहसे ही सम्भव है । गुरुदेवके प्रति आस्थान्वित शिष्य अभ्युदय और निःश्रेयसकी समुपलब्धिमें अवश्य समर्थ होता है । समर्थ सनातन गुरुके हृदयमें निजकल्याणकी सुमधुर कामनाके उद्दीपनमें समर्थ शिष्यका सर्वविध कल्याण सुनिश्‍चित है । तदर्थ श्रद्धापूर्वक प्राणिपात, तत्परतापूर्वक परिप्रश्‍न तथा संयतेन्द्रियतासहित सेवा अपेक्षित है। - निश्‍चलानन्दसरस्वती, श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य, श्रीगोवर्द्धनमठ पुरीपीठ, ओडिशा, वैशाख कृष्ण दशमी (२४.४.२०१४)