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धर्मजागृति, हिंदू-संगठन एवं राष्ट्ररक्षा हेतु साधकोंद्वारा साधनास्वरूप आर्थिक हानि सहते हुए भी चलाया जानेवाला एकमात्र मासिक !
अगस्त २०१४

हिन्दू धर्मबन्धुओ, अपने राष्ट्र्रधर्मको पहचानें !

(पू.) श्री. संदीप आळशी
    कश्मीरके विस्थापित हिन्दुआेंका प्रश्‍न हो, बांग्लादेशके अत्याचारोंसे पीडित शरणार्थी हिन्दुआेंका अथवा देशमें कट्टरपन्थियोंद्वारा किए दंगेमें पीडित हिन्दुआेंका, भारतके अनेक हिन्दुआेंकी भूमिका होती है, उनका भाग्य ही ऐसा है, तो हम इसमें क्या कर सकते हैं ? यह बात सही है; परन्तु कहनेसे पूर्व इसपर अवश्य विचार करें...
१. स्वतन्त्रतापूर्वकालमें देशकी जनता अंग्रेजोंसे त्रस्त थी, तब क्रान्तिकारियों और राष्ट्रपुरुषोंके त्यागके कारण हम आज स्वतन्त्रता उपभोग रहे हैं ।

अमरनाथ यात्रापर कट्टरपन्थियोंका आक्रमण कोई दुर्घटना नहीं, इस यात्रापर प्रतिबन्ध लगानेका षड्यन्त्र है ! - पू. (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे, राष्ट्रीय मार्गदर्शक, हिन्दू जनजागृति समिति

देहलीके जंतर-मंतरपर राष्ट्रीय
हिन्दू आन्दोलनमें सम्मिलित धर्माभिमानी हिन्दू
     अमरनाथ यात्राको सुरक्षा प्रदान करने, मानचित्रमें अरुणाचलप्रदेशको चीनमें दिखानेके विरोधमें, आइएसआइएस आतंकवादी संगठनको समर्थनके विरोधमें, हिन्दू सन्तोंकी अपकीर्ति रोकने, महाराष्ट्र सरकारद्वारा मुसलमानोंको ५ प्रतिशत आरक्षण देनेके निर्णयके विरोधमें तथा आंध्रप्रदेशमें श्रीशैलके श्री मल्लिकार्जुन मन्दिर कलशका पुनर्निर्माण करने हेतु देशभरमें राष्ट्रीय हिन्दू आन्दोलन !

भारतको विश्‍वके मानचित्रसे मिटा देंगे !: पाकके पीरजादाकी टाइम्स नाऊके चर्चासत्रमें भारतको धमकी

  हिन्दूद्रोही सूत्रसंचालक अर्णब गोस्वामीकी बोलती बन्द !
        मुम्बई - टाइम्स नाऊ इस अंग्रेजी दूरदर्शनवाहिनीके न्यूजआवर इस कार्यक्रमके एक चर्चासत्रमें पाकके प्रवक्ताके रूपमें आए सय्यद तारिक पीरजादाने प्रक्षोभक धमकी दी है । भारतीयोंको सम्बोधित कर उन्होंने कहा, आप नहीं जानते कि युद्ध होनेपर, हम आपको तहस-नहस कर देंगे (धूलमें मिला देंगे) । सब कुछ इधरका उधर कर देंगे । विश्‍वके मानचित्रसे भारतको मिटा देंगे...!

जूते पहनकर किया व्यासपीठपर दीपप्रज्वलन !

रा.स्व. संघद्वारा संस्कारित प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी
और गृहमन्त्री राजनाथ सिंहका धर्मविरोधी आचरण !
    सूरजकुंड (हरियाणा) - भाजपाके सांसदोंके मार्गदर्शन हेतु २८ और २९ जूनको दो दिनकी कार्यशाला हरियाणाके सूरजकुंडमें सम्पन्न हुई । इसका उद्घाटन प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमन्त्री राजनाथ सिंह और प्रधानमन्त्री कार्यालयके राज्यमन्त्री व्यंकय्या नायडूद्वारा व्यासपीठपर  दीपप्रज्वलन कर किया गया । इस अवसरपर तीनोंने ही बिना अपने जूते उतारे व्यासपीठपर दीपप्रज्वलन किया । (उपरोक्त छायाचित्रमें स्पष्ट दिख रहा है ।) (भारतमाताका पूजन करनेकी शिक्षा देनेवाले संघके इन स्वयंसेवकोंद्वारा हुआ यह अनादर सनातनकी आलोचना करनेवाले संघवालोंको क्या स्वीकार है ? क्या यह प्रश्‍न वे मोदीजी और राजनाथ सिंहसे पूछेंगे ? अथवा इस नई विचारधाराका क्या वे भी अंगीकार करनेवाले हैं ? - सम्पादक)

मोदी शासनके वित्तीय बजटमें सिंहस्थ कुम्भमेलेके लिए आवश्यक राशिका उल्लेख ही नहीं !

हिन्दुत्वके सूत्रपर निर्वाचित मोदी शासनके पास हिन्दुआेंको
कुम्भमेलेके लिए वित्तीय सहायताकी मांग करनी पडती है, यह लज्जाजनक !
   नासिक - २०१५ में नासिक-त्र्यम्बकेश्‍वरमें होनेवाले कुम्भमेलेके लिए लगभग २ सहस्र ३७८ करोड रुपयोंका प्रारूप बनाया गया है; परन्तु १० जुलाईके मोदी शासनके बजटमें इस कुम्भमेलेके लिए कोई प्रावधान न किए जानेकी बात ध्यानमें आई । इसलिए नासिकवासियोंने मांग की है कि नासिक और दिण्डोरीके जनप्रतिनिधियोंको बजटकी चर्चामें सिंहस्थके राशिका प्रश्‍न उपस्थित करना चाहिए और शासनको भरपूर राशि उपलब्ध करवानेके लिए मनाना चाहिए ।

दैनिक लोकसत्तामें नरेंद्र मोदीको श्री विठ्ठलके रूपमें दिखाकर किया गया अनादर

हिन्दुओ, आपके आस्थास्थानोंपर हो रहे
इन आघातोंके विरोधमें वैध मार्गसे रोष व्यक्त करें !
मुंबई - दैनिक लोकसत्ताके ११ जुलाई के संस्करणमें पृष्ठ १ पर वित्तीय बजटका समाचार देते हुए श्री. नरेंद्र मोदीको करोडों हिन्दुआेंके आस्थास्थान भगवान विठ्ठलके रूपमें दिखाकर व्यंग्य चित्रकार नीलेशने अनादर किया । श्री विठ्ठलके रूपमें मोदीके कन्धोंपर दो, गलेमें एक और हाथमें एक कमल बंधा दिखाया गया । साथ ही इस संस्करणमें वित्तीय बजटके प्रावधानोंके समाचारमें सन्त तुकाराम महाराजके अभंगोंका उपयोग किया गया, अर्थमन्त्री अरुण जेटली केवल एक माध्यम हैं और मोदीको गोविन्द (श्रीकृष्ण) की उपमा देनेवाली पंक्तियां इस चित्रके नीचे दी गईं हैं । इससे धर्माभिमानी हिन्दुआेंकी धर्मभावनाएं आहत हुई हैं । (हिन्दू असंगठित और अतिसहिष्णु होनेसे ही उनके आस्थास्थानोंका इस प्रकार अनादर किया जाता है ! हिन्दुआेंमें धर्मशिक्षाका अभाव होनेके कारण ही वे ऐसे कुकर्म कर पापके भागीदार बन रहे हैं । इस स्थितिमें परिवर्तन लानेके लिए हिन्दुआेंको धर्मशिक्षा देना अनिवार्य है ! - सम्पादक) 
धर्माभिमानी हिन्दू निम्न पतेपर निषेध व्यक्त कर रहे हैं ।
दैनिक लोकसत्ता, मुंबई 
दू.क्र. : (०२२) २२०२२६२७, ६७४४००००
फैक्स क्र. : (०२२) २२८२२१८७
इमेल : loksatta@expressindia.com

कश्मीरमें जम्मू-कश्मीरको इस्लामी राज्य दर्शानेवाले फलक फहराए गए !

क्या इन संकटोंका प्रत्युत्तर देनेके लिए मोदी शासन सिद्ध है ?
मोदी शासन इन अलगाववादी प्रवृत्तियोंका अन्त कैसे करनेवाला है ? 
    श्रीनगर - इराकमें शिया और सुन्नी मुसलमानोंमें हो रहे युद्धका प्रभाव अब कश्मीरमें भी दिखाई देने लगा है । यहांके युवक जम्मू-कश्मीरको इस्लामी राज्य दर्शानेवाले फलक लेकर घूमते दिखाई दे रहे हैं । इन युवकोंका कहना है, आइएसआइएस नेता अबु बगदादी ही हमारा हीरो है । बगदादीने जिस प्रकार इराकमें इस्लामका निर्माण किया है, उस प्रकार वह यहां भी निर्माण होगा ।

गोवामें आनेपर आर्च बिशप फिलिप नेरीको सदिच्छा भेंट देनेवाले प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके पास उन्हें प्रधानमन्त्री होनेका आशीर्वाद देनेवाले पूज्यपाद आसारामजी बापूसे मिलनेके लिए समय नहीं !

      कुछ वर्ष पहले पूज्यपाद सन्तश्री आसारामजी बापूने श्री. नरेन्द्र मोदीको शुभाशीर्वाद देते समय कहा था, मैं आपको देशके प्रधानमन्त्रीके रूपमें देखना चाहता हूं । पू. बापूका वह संकल्प साकार हुआ है ।
     गुजरातके मुख्यमन्त्रीपदपर रहते समय नरेन्द्र मोदीने पूज्यपाद सन्त श्री आसारामजी बापूकी भेंटके समय कहा था, मेरा ऐसा सद्भाग्य रहा है कि जीवनमें जब कोई पहचानता नहीं था, तबसे मुझे पू. बापूजीके आशीर्वाद और स्नेह मिलता रहा है । मैं मानता हूं कि पू. बापूजीके शब्दोंमें एक योगिक शक्ति वास करती है । इस योगिक शक्तिके विश्‍वासपर हम करोडों गुजरातवासियोंके स्वप्न साकार होंगे ।

हिन्दुओ, भारतका तेजीसे होनेवाला इस्लामीकरण रोकें !

    बंगाल - वर्धमान जनपदके ओरग्राम चतुसपल्ली नामक मदरसेमें ८४० हिन्दू विद्यार्थी एक मौलवीसे कुरान और इस्लामकी शिक्षा ले रहे हैं । इस मदरसेमें कुल १४०० विद्यार्थियोंमेंसे ६० प्रतिशत हिन्दू धर्मीय हैं । इस मदरसेको राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त हुआ है !
१. बंगालमें ६०० मदरसे शासनमान्य हैं ।
२. राज्यके मदरसोंमें लडकियोंकी संख्या लडकोंसे अधिक है । बंगालमें ४ लाखसे अधिक विद्यार्थी मदरसोंमें शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । हिन्दू धर्मीय विद्यार्थी इन मदरसेकी ओर भारी संख्यामें आकर्षित हो रहे हैं और अनेक मदरसोंमें मुसलमान विद्यार्थियोंकी तुलनामें हिन्दू विद्यार्थियोंकी संख्या अधिक देखने मिलती है ।
    (धर्मशिक्षा न मिलनेका भयानक दुष्परिणाम ! हिन्दुओ, अब तो धर्मशिक्षाका महत्त्व समझकर धर्मशिक्षा लें ! - सम्पादक)

हिन्दुओ, कट्टरपन्थियोंकी चापलूसीमें सबसे अग्रसर टाइम्स नाऊका बहिष्कार करें और पीरजादापर कठोर कार्यवाही हेतु संगठित होकर आवाज उठाएं !

    टाइम्स नाऊ, टाइम्स ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग कम्पनी लिमिटेड, ट्रेड हाऊस, पहला माला, सेनापति बापट मार्ग, लोअर परेल, मुंबई - ४०० ०१३
सम्पर्क : (+९१२२) २४९९९९४४, फैक्स : (९१२२)२४९३१३४१
इ-मेल : vivek.narayan@timesgroup.com, legalnow@timesgroup.com, info@timesnow.tv
राष्ट्रप्रेमी नागरिक उपरोक्त क्रमांकपर रोष व्यक्त कर रहे हैं ! आप भी इसमें सहभागी होकर अपना धर्मकर्तव्य निभाएं !

अरुणाचल प्रदेशके दुर्गम क्षेत्रोंमें भारतके नहीं, अपितु चीनके भ्रमणभाष प्रतिष्ठानोंका नेटवर्क !

    अरुणाचल प्रदेश - यहांके दुर्गम क्षेत्रोंकी यात्राके समय केन्द्रीय गृहमन्त्रालयके उच्च पदाधिकारियोंको स्पष्ट हुआ कि वहांपर भारतीय  भ्रमणभाष (मोबाइल) प्रतिष्ठानोंके नेटवर्ककी अपेक्षा चीनके प्रतिष्ठानोंके नेटवर्क मिल रहे हैं । दूरसंचार विभागके सचिवको भेजे पत्रमें उन्होंने कहा है कि पूर्वोत्तर भारतकी सीमा, एक संवेदनशील क्षेत्र है । इसलिए यहांके नेटवर्कपर भारतका पूर्ण नियन्त्रण होना चाहिए । अतः केन्द्रशासनद्वारा ही स्वयं आगे बढकर नए नेटवर्क टावरोंका निर्माण आवश्यक है ।

तिहार कारागृहमें १५० हिन्दू बन्दीवान भी रखेंगे रोजा !

    नई देहली - तिहार कारागृहके अधिकारीने जानकारी दी है कि कारागृहके २ सहस्र ३०० मुसलमान बन्दीवानोंके साथ १५० हिन्दू बन्दीवान तथा ७० महिला बन्दीवान भी रमजानमें रोजा रखेंगे । (हिन्दुआेंमें धर्माभिमान न होनेके कारण ही बहुसंख्यक होते हुए भी उनकी स्थिति इतनी दयनीय हो गई है और प्रखर धर्माभिमानके कारण ही अल्पसंख्य मुसलमान हिन्दुआेंपर भारी पड रहे हैं ! - सम्पादक)
    तिहार कारागृहके प्रवक्ता सुनील गुप्ताने कहा, यह बन्दीवानोंमें विद्यमान एकताका प्रतीक है । रमजानमें रोजा करनेवालोंको कोई अडचन नहीं आएगी । बन्दीवानोंके इफ्तार और नमाज पठनके लिए विशेष सिद्धता की गई है । सेहरी और इफ्तारके लिए बन्दीवानोंको फल, मिठाई, सुखामेवा और विशेष अल्पाहार दिया जानेवाला है । (हिन्दुआेंके त्यौहार-उत्सवोंमें क्या हिन्दू बन्दीवानोंको ऐसी सुविधाएं कभी दी जाती हैं ? - सम्पादक)

संक्षिप्त वृृत्त

हिन्दुआेंके आस्थास्थानोंको कलंकित करनेका दुष्ट उद्देश्य रखनेवाले निधर्मियोंको तमाचा !
भक्तोंका सैलाब ही सिद्ध करता है पूज्यपाद आसारामजी बापूका सन्तत्व !
    जोधपुर (राज.) - प्रतिवर्षकी भांति गुरुपूर्णिमाके दिन पूज्यपाद बापूजीके दर्शन-सत्संगका पूरे देशमें आयोजन किया गया था । वर्ष २०१३ में पूरे देशमें १३ स्थानोंपर गुरुपूर्णिमा महोत्सवका आयोजन किया गया था । इस वर्ष गुरुपूर्णिमाके दिन बापूने भक्तोंको आश्रममें ही गुरुपूर्णिमा मनानेका सन्देश दिया था; परन्तु गुरुपूर्णिमाके दिन गुरुदर्शनके उपरान्त ही अन्न ग्रहण करनेवाले सहस्रों भक्तोंका सैलाब पूज्यपाद बापूजीके दर्शन हेतु जोधपुर कारागृहमें उमड पडा था । देश-विदेशमें विद्यमान बापूजीके भक्तोंने कहा कि पूज्यपाद बापूजीके कारण ही हमारा दु:ख दूर हुआ है । हमारे जीवनमें परिवर्तन लानेवाले बापूजी पूर्णत: निर्दोष हैं ।

केन्द्रीयमन्त्री सुषमा स्वराजने पहना हिजाब !

हिन्दू होकर भी धर्माचरण न करनेवाले भाजपाके मन्त्री
मुसलमानोंके नियमोंनुसार तत्काल आचरण करते हैं !
    नई देहली - भारतकी विदेशमन्त्री सुषमा स्वराज २३ जूनको अखिल भारतीय हज समितिकी बैठकमें हिजाब (इस्लामी धर्मानुसार सिर ढकनेके लिए बांधा जानेवाला बडा रूमाल) पहनकर उपस्थित रही । (नरेन्द्र मोदीने इस्लामी गोल टोपी पहनना स्वीकार नहीं किया और भारतकी विविध संस्कृतियोंके प्रतीकस्वरूप अनेक प्रकारकी वेशभूषाएं की थीं । लगता है सुषमाजीको इसका विस्मरण हो गया ! यदि सुषमा स्वराजको बैठकमें आनेके लिए किसीने कहा होगा कि हिजाब पहनना आवश्यक है, तो उनका बैठकमें न जाना ही उचित होता । आज उन्होंने हिजाब पहना, कल उन्हें बुरखा भी पहननेको बताया जाएगा ! - सम्पादक)

पत्रकार वैदिकपर देशद्रोहका अभियोग प्रविष्ट होना चाहिए ! - हरि किशन कौशिक, विश्‍वस्त, अस्तित्व न्यास, हरियाणा

भिवानी (हरियाणा) - यहांके हरि किशन कौशिकने केन्द्र सरकारसे मांग की है कि एक पत्रकारके रूपमें जामाद-उद-दावा इस जिहादी आतंकवादी संगठनके दुर्दान्त आतंकवादी हाफिज सईदसे मिलकर हिन्दुस्थानके विषयमें जानकारी देनेवाले देशद्रोही वेदप्रकाश वैदिकका पारपत्र तुरन्त नियन्त्रणमें लिया जाए । उनके सारे अधिकोष (बैंक) खाते सील कर केंद्रीय अन्वेेषण तन्त्रद्वारा उनके वार्तालापकी छानबीन की जाए ।

जयललिता रमजानमें निःशुल्क बांटेगी, ३ सहस्र मस्जिदोंको साढे चार सहस्र टन चावल !

हिन्दुआें, ध्यान दें ...
  • धर्मके नामपर सुविधाएं देनेवाले राज्यकर्ता अपनेआपको धर्मनिरपेक्ष कहते हैं !
  •  हिन्दुआेंके मन्दिर, मठ अथवा आश्रमोंको त्यौहारोंके दिनोंमें कौनसी सरकार अन्न-धान्य देती है ?
  •  ध्यान रखें कि मुसलमानोंकी चापलूसी करनेके लिए तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी सत्ताका उपयोग कर ऐसे निर्णय लेते हैं; परन्तु तथाकथित हिन्दुत्वनिष्ठ भाजपा हिन्दुआेंके लिए कोई भी निर्णय नहीं लेती !
  •  मोदी शासनद्वारा यदि गलतीसे भी हिन्दुआेंको ऐसी सुविधा दी जाती, तो एकसाथ देशके सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादियोंने देश सिरपर उठा लिया होता !

स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउण्डेशनके (एस.एस.आर.एफ.के) विदेशी साधकोंके लिए आयोजित कार्यशाला भावपूर्ण वातावरणमें प्रारम्भ !

दीपप्रज्वलनसे कार्यशालाका 
शुभारम्भ करते हुए एस.एस.आर.एफ.
के सन्त पू. सिरियाक वाले
रामनाथी (गोवा) - स्पिरिच्युअल साइन्स रिसर्च फाउण्डेशनके विदेशी साधकोंके लिए आयोजित कार्यशाला २२ जुलाईको सनातनके आश्रममें भावपूर्ण वातावरणमें प्रारम्भ हुई । इस कार्यशालामें ऑस्ट्रिया, क्रोएशिया, जर्मनी, बल्गेरिया, मॉरिशस, नेपाल, ब्रिटन, अमेरिका आदि १४ देशोंके ७० साधक सहभागी हुए । इस उद्घाटन में अन्तरजाल (इण्टरनेट)के माध्यमसे विश्‍वभरसे ५० साधक उपस्थित हुए । बोलिवियाकी साधिका कु. सिल्विया विजकाराने कार्यक्रमका सूत्रसंचालन किया । 
क्षणिकाएं : १. जर्मन भाषामें एस.एस.आर.एफ.के अध्यात्मका प्रस्तावनात्मक विवेचन नामक प्रथम ग्रन्थका पू. सिरियाक वालेके शुभहस्तों लोकार्पण हुआ !
२. एस.एस.आर.एफ. जालस्थलके सम्पादक श्री. शॉन क्लार्क एवं अमेरिकाकी ६९ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर-प्राप्त साधिका श्रीमती भावना शिंदे-हर्लीके पुत्र कु. अफोलाबी मिसा (आयु १५ वर्ष) का ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर घोषित किया गया !

हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाकी दृष्टिसे साधनाका महत्त्व !

तृतीय अखिल भारतीय हिन्दू अधिवेशनमें सनातनकी सन्त
पू. अनुराधा वाडेकरजीके अनमोल मार्गदर्शनसे कुछ अंश...
पू. अनुराधा वाडेकरजी
        सनातन वैदिक हिन्दू धर्म कहता है, दुर्लभ मनुष्यजन्म ईश्‍वरप्राप्तिसे ही सार्थक होता है । ईश्‍वरकी प्राप्तिके लिए प्रतिदिन किए जानेवाले प्रयासोंको साधना कहते हैं ।  हम सभी समझ पाएं कि हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके लिए साधना करना महत्त्वपूर्ण क्यों है तथा इस उद्देश्यसे कार्य करनेवाले सहयोगियों और कार्यकर्ताआेंको भी वह बता पाएं, इसलिए आज आप सभीके समक्ष साधनाका महत्त्व प्रस्तुत कर रहे हैं ।

सत्त्वगुणी व्यक्ति ही राष्ट्र व धर्महित साध्य कर सकता है, यह प्रमाणित करनेवाला अध्यात्म विश्‍वविद्यालयका शोध

दो राजनीतिज्ञ और एक सन्त के छायाचित्रोंसे प्रक्षेपित
स्पन्दनोंका वैज्ञानिक उपकरणोंकी सहायतासे किया अध्ययन
१. स्वतन्त्रताप्राप्तिके पश्‍चात भारतको मिले राज्यकर्ता : वर्ष १९४७ में भारतको स्वतन्त्रता प्राप्त होनेके उपरान्तसे आजतक यहांकी जनताको खरे अर्थसे लोकाभिमुख राज्यकर्ता मिले ही नहीं। गत ६६ वर्ष जनता केवल नाममात्र ही लोकतन्त्रका उपभोग करती रही है । आजतक मिले राज्यकर्ताआेंमेंसे हाथकी उंगलियोंपर गिने जा सकें, बस इतने ही राज्यकर्ता गुणवान और अच्छे पात्र सिद्ध हुए । शेष सभी अल्पाधिक मात्रामें स्वार्थी, सत्ताके लिए राजनीति करनेवाले, धनके लोभी, नीतिहीन और अहंकारी ही निकले । राज्यकर्ताआेंके इन अवगुणोंमें गत ६६ वर्षोंमें वृद्धि होती गई । इसका मुख्य कारण यह था कि इस कालावधिमें धर्माचरण अल्प होता गया । परिणामस्वरूप राज्यकर्ता साधनाके दृष्टिकोणसे दूर ही रहे । राज्यकर्ताआेंको यह दिखा देना आवश्यक है कि उनमें सत्त्वगुण न्यून होता जा रहा है । अब यह वैज्ञानिक उपकरणद्वारा भी दिखाना सम्भव हो गया है ।

सनातन प्रभातकी ओरसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमीकी हार्दिक शुभकामनाएं !

भगवान श्रीकृष्णजीका सनातन-निर्मित
सात्त्विक चित्र (कृष्णतत्त्व - २९.३ प्रतिशत)

सुलभ स्वास्थ्यप्रद दिनचर्या

शरीर स्वस्थ रखनेके लिए आयुर्वेदोक्त नियमोंका पालन करें !
वज्रासनमें बैठनेकी उचित पद्धति
    शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् । अर्थात धर्माचरणके लिए (साधना करनेके लिए) शरीरका स्वस्थ होना अत्यन्त आवश्यक है । शरीर स्वस्थ रहे, इस हेतु आयुर्वेदमें दिनचर्या और ऋतुचर्या बताई हैं। इनके पालनसे स्वास्थ्यमें सुधार होनेके साथ-साथ साधनाकी फलोत्पत्ति भी बढती है । आज हम दैनिक जीवनमें आचरणमें लाने-योग्य कुछ सूत्र समझ लेंगे । दिनचर्याके पालन हेतु अलग समय न देते हुए दैनिक व्यवहारमें ही ये कृत्य सुलभ पद्धतिसे आचरणमें लाना कैसे सम्भव होगा, इसका विचार इस लेखमें किया गया है ।
(टिप्पणी : इस लेखका पूर्वार्ध जून २०१४ के सनातन प्रभातमें गया था ।)

श्रावण मासमें मनाए जानेवाले त्यौहार तथा व्रतोंका महत्त्व (अंग्रेजी भाषामें) जान लें !

* नागपंचमी, नारियल पूर्णिमा, रक्षाबन्धन, कृष्णजन्माष्टमी आदि त्यौहारोंका इतिहास, महत्त्व तथा उन्हें कैसे मनाएं यह जानने के लिए क्लिक करें : www.sanatan.org/en/a/cid_12.html
* चातुर्मास तथा चातुर्मासमें किए जानेवाले व्रतोंका महत्त्व उदा. मंगलागौर, जिवंतिका पूजन, शिवमुष्टिका आदि जानने हेतु 

हिन्दुआें, कालानुसार गुरू को अपेक्षित 'क्षात्रधर्म साधना' करें !

राष्ट्र एवं धर्म सम्बन्धी जानकारी देनेवाले फलकोंद्वारा प्रसारका सुअवसर !

राष्ट्राभिमान संजोनेका एक मार्ग है कि प्रत्येक देशवासी अपने राष्ट्रीय प्रतीकोंका आदर करे । देशकी स्वतन्त्रताके लिए सर्वस्वका त्याग करनेवाले क्रान्तिकारियों और उनके कार्यके स्मरणसे भी राष्ट्राभिमान जागृत होकर राष्ट्रभक्ति निर्मित होती है । साथ ही हम जिस देवताकी उपासना करते हैं, उस देवताके सन्दर्भमें शास्त्र ज्ञात होनेपर हम उपासनाके सर्व कृत्य अधिक भावपूर्ण कर सकते हैं । ऐसा करनेसे उन कृत्योंकी फलप्राप्ति भी अधिक होती है । यह ध्यानमें रखते हुए सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा राष्ट्र्राभिमान बढानेवाले तथा धर्मशिक्षा प्रदान करनेवाले फलेक्स-फलकोंकी निर्मिति की गई है । इन फलकोंको मन्दिर, धार्मिक स्थल, विद्यालय, महाविद्यालय, पुलिस थाने जैसे स्थानोंपर लगाकर राष्ट्र एवं धर्म कार्यमें सहभागी हो जाईए । प्रायोजन करने हेतु इच्छुक सज्जन पृष्ठ क्रमांक २ पर दिए दूरभाष क्रमांकपर सम्पर्क करें !

क्रान्तिवीरोंका धधकता इतिहास!

हुतात्मा शब्दमें जो तेज 
और पवित्रता है, वह शहीद शब्दमें नहीं !
     स्वतन्त्रताके लिए जो प्राणोंकी आहुति देते हैं, वे हुतात्मा होते हैं । हुतात्मा शब्दका तेज और पवित्रता शहीद शब्दमें नहीं । शहीद शब्दको हिन्दुआेंका रक्त लगा है । अतः इस शब्दको बहिष्कृत करें और हुतात्माआेंकी स्मृतिके सामने नतमस्तक होकर हम स्वतन्त्रता मनाना सीखेंगे ।
- श्री. अरविन्द विठ्ठल कुळकर्णी, ज्येष्ठ पत्रकार, मुंबई. 

लोकमान्य तिलकने क्रान्तिकारियोंद्वारा किए बमविस्फोटका केसरीमें समर्थन किया !

लोकमान्य तिलक
वर्ष १९०८ में खुदीराम बोसने किंग्ज फोर्डपर बम फेंकनेका जो प्रयत्न किया, उस सन्दर्भमें शासकीय और ब्रिटिश पत्रकारोंने इन जहाल मतवादियोंकी आलोचना करना आरम्भ किया । पायोनिअर, स्टेट्समैन, इंग्लिशमैन, एशियन आदि समाचारपत्रिकाआेंने बहुत ही प्रखर लेखन किया । टाइम्स ऑफ इण्डियाने तो स्पष्ट आरोप लगाया कि  देशके युवकोंको भडकानेमें हिन्दुस्थानी समाचारपत्रिकाएं और नेता ही उत्तरदायी हैं । यह सहन न कर पानेसे लोकमान्य तिलकने १२.५.१९०८ के केसरीमें देशका दुर्भाग्य यह लेख लिखा । इसमें वे कहते हैं, जिन युवा बंगाली गृहस्थोंने यह सब किया, वे कोई चोर अथवा बदमाश नहीं थे । बंगालकी युवा पीढीका यह गुप्त षडयन्त्र, रूसके विद्रोही लोगोंकी भांति अधिकारियोंकी गुप्त हत्या करने हेतु यदि हुआ भी हो, तो भी वह स्वार्थके लिए नहीं, अपितु अनियन्त्रित और बलवान श्‍वेतवर्णीय अधिकारी वर्गकी अखण्ड सत्ताके कारण उत्पन्न हुआ है, यह बात उनके वक्तव्योंसे स्पष्ट होती है ।

युवा हिन्दुआेंको क्रान्तिके लिए प्रवृत्त करनेवाले और सैनिकोंमें वीरश्री जागृत करनेवाले विचार देनेवाला गदर समाचार-पत्र !

गदर, एक पंजाबी शब्द है और उसका अर्थ है विद्रोह अथवा क्रान्ति । गदर नामक इस समाचारपत्रिकाके पहले ही संस्करणमें भारतीय सेनामें राजद्रोही वृत्तिका प्रसार करना, क्रान्तिका झण्डा फहराना, कारागृह तोडना, सरकारी कार्यालय लूटना, राजद्रोही वाङमयका प्रचार-प्रसार करना, शस्त्रसंग्रह और बम बनाना, ब्रिटिशोंके शत्रु-देशोंसे मित्रता करना, क्रान्तिकारियोंके गुप्त संगठन बनाकर उसमें निरन्तर युवकोंको भर्ती करना आदि गदर पार्टीकी सर्वंकष स्वतन्त्रता संग्रामकी धधकती नीतियां साहसपूर्ण पद्धतिसे प्रस्तुत की थीं । इस प्रथम संस्करणने ही पूरे विश्‍वमें खलबली मचा दी । गदर इस नामकी इतनी चर्चा होने लगी कि हिन्दू एसोसिएशनको लोग गदर पार्टीके नामसे पहचानने लगे । १८ अगस्त १९१४ के संस्करणमें प्रकाशित निम्न विज्ञापन, उदाहरणके लिए देखने-योग्य है । 
चाहिए, हिन्दुस्थानमें जाकर 'गदर' की क्रान्ति करनेवाले शूर सैनिक ! 
वेतन : मृत्यु, पुरस्कार : हौतात्म्य, पेन्शन : स्वतन्त्रता, नौकरीका क्षेत्र : हिन्दुस्थान 
श्री. यशवंत जोगळेकर (मासिक स्वातंत्र्यवीर, दिवाली संस्करण २००६)
देशकी अस्मिताके लिए लडनेवाले भगत सिंहका नाम आज सभीके मुखपर है; परन्तु उनके विरुद्ध साक्षि देनेवाले ३०० राष्ट्रद्रोहियोंके नाम इतिहासमें लुप्त हो गए हैं ! 
- श्री. तरुण विजय, भूतपूर्व सम्पादक, पांचजन्य तथा भाजपाके सांसद

क्रोध और द्वेषसे प्रेरित तथा इच्छापूर्तिके लिए इतिहासमें हुई तथाकथित क्रान्तियां !

क्रोध और द्वेषसे प्रेरित - स्ववासनापूर्तिके लिए ही
विधवा पुनर्विवाह, विवाहविच्छेद, फ्रेंच क्रान्ति जैसी क्रान्तियां हुईं ।
१. ईसाइयोंकी धर्मविरोधी वासनाआेंको धर्मका स्वरूप देनेवाली प्रोटेस्टेण्ट क्रान्ति ! 
रोमन कैथलिक धार्मिक सन्दर्भमें कट्टर होते हैं । स्त्रीके अस्पर्श होनेपर अथवा उसके ऋतुकालमें उसे ७ दिन बाहर बैठना पडता है । वे परिवारनियोजन नहीं मानते हैं । उन्हें गर्भपात (भ्रूणहत्या) भी अस्वीकार है । वे विवाहविच्छेद और पुनर्विवाहका निषेध करते हैं । विवाहविच्छेद करनेवाले व्यक्तिको धर्मबाह्य किया जाता है ।
  इंग्लैण्डके राजपरिवारको रोमन कैथलिक धर्मके नियमोंका पालन करना पडता है । वैसा उन्हें बन्धन है । छठे एडवर्डको उसकी धर्मपत्नीसे अलग होना था और दूसरा विवाह करना था; परन्तु कैथलिकोंके धर्मनियममें यह नहीं आता था । 

सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति और संलग्न आध्यात्मिक संस्थाआेंद्वारा आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव देश-विदेशमें भावपूर्ण एवं मंगलमय वातावरणमें सम्पन्न !

  सन्तोंकी वन्दनीय उपस्थिति !  
 सनातन-निर्मित १३ ग्रन्थोंका लोर्कापण
     गुरुपूर्णिमा ! साधना करनेवाले प्रत्येक जीवको १ सहस्र गुना गुरुतत्त्वका लाभ होनेका दिन ! सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति और संलग्न आध्यात्मिक संस्थाआेंकी ओरसे भारतभरमें ६० एवं विदेशमें १४ स्थानोंपर आयोजित गुरुपूर्णिमा महोत्सव भावपूर्ण वातावरणमें सम्पन्न हुआ । साधकोंने गुरुके प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर, हिन्दू समाज, राष्ट्र और धर्मके हितके लिए भारतमें हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना करना, साथ ही अखिल मानवजातिके हितके लिए पूरे विश्‍वमें हिन्दू धर्म प्रस्थापित करने हेतु दृढ निश्‍चय किया । इस अवसरपर परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजीके अद्वितीय कार्यका परिचय दिया गया । तदुपरान्त हिन्दुत्वनिष्ठ अतिथियोंके मार्गदर्शनके उपरान्त उपस्थितोंका धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना और इससे सम्बन्धित दिशा विषयपर मार्गदर्शन किया गया ।